मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पेश किया मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास का नया रोडमैप

Updesh Awasthee
भोपाल, 27 जून 2026:
रवींद्र भवन में आयोजित 'सशक्त उ‌द्यमी-समृद्ध मध्यप्रदेश समिट' के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के भविष्य के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस के अवसर पर यह स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश सरकार का मुख्य फोकस गरीब, किसान, युवा और नारी (Gyan) के सर्वांगीण विकास पर है।

Madhya Pradesh MSME Summit 2026 and CM Dr. Mohan Yadav’s Vision for Industrial Growth

इसी कड़ी में उन्होंने घोषणा की कि साल 2027 को 'युवा वर्ष' के रूप में मनाया जाएगा, जबकि साल 2026 को 'कृषक कल्याण वर्ष' और 2025 को 'उद्योग एवं रोजगार वर्ष' के रूप में समर्पित किया गया है। इसके साथ ही, राजधानी भोपाल में आगामी ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट (GIS) जनवरी में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।

Financial Assistance for MSMEs and Investment Opportunities in Madhya Pradesh 

राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने 760 से अधिक एमएसएमई इकाइयों को प्रोत्साहन राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से वितरित की। सरकार ने उद्योगों को कुल 1,274 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है और 137 स्टार्टअप्स को 1.5 करोड़ रुपये की मदद दी गई है। एमएसएमई विभाग का बजट भी 1100 करोड़ से बढ़ाकर 2100 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो राज्य की आर्थिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, 'प्ले एंड प्लग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' के साथ स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए एमओयू (MoU) भी साइन किए गए हैं।

Empowerment of Women Entrepreneurs in MP and MSME Sector Growth 

मध्यप्रदेश में नारी शक्ति औद्योगिक क्रांति का नेतृत्व कर रही है। वर्तमान में प्रदेश की 4 लाख 41 हजार से अधिक एमएसएमई इकाइयों की कमान महिलाओं के हाथों में है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 से 2026 के बीच एमएसएमई में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 59 प्रतिशत बढ़ा है और 50 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप्स का नेतृत्व बेटियां कर रही हैं। सरकार महिलाओं की सुविधा के लिए वर्किंग वुमन हॉस्टल का निर्माण भी करा रही है, ताकि वे निर्बाध रूप से आर्थिक गतिविधियों में योगदान दे सकें।

Industrial Infrastructure Development and Land Bank Allocation in Madhya Pradesh 

औद्योगिक विस्तार के लिए आधारभूत संरचना (Infrastructure) पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार ने अब तक 16 क्लस्टर तैयार किए हैं और 14 नए क्लस्टरों पर काम चल रहा है। पिछले एक साल में उद्योगों के लिए लगभग 1200 भूखंड (plots) आवंटित किए गए हैं, और अगले डेढ़ साल में 3000 और भूखंड देने का लक्ष्य है। देवास, पांढुर्ना, टीकमगढ़ और उज्जैन को नए एमएसएमई भवनों की सौगात मिली है, जबकि मंदसौर, मंडला, जबलपुर और नीमच जैसे जिलों में सैकड़ों नए भूखंड विकसित किए गए हैं।

MP MSME Export Ranking and Ease of Doing Business Reforms 

मध्यप्रदेश अब ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) के मामले में देश का 'टॉप अचीवर' बन गया है। राज्य ने भारत सरकार द्वारा तय किए गए सभी 23 सुधारों को शत-प्रतिशत लागू किया है। निवेशकों की सुविधा के लिए 900 से अधिक अनावश्यक कानूनों को शिथिल किया गया है और 100 से अधिक कानूनों में सजा के प्रावधान को जुर्माने (Penalty) में बदला गया है। इन सुधारों का परिणाम है कि एमएसएमई उत्पादों के निर्यात में मध्यप्रदेश अब देश में 11वें स्थान पर पहुंच गया है, जिसने एक साल में 4 अंकों की छलांग लगाई है। 

Foreign Direct Investment in MP and Agricultural Modernization Roadmap 

प्रदेश में विदेशी निवेश (FDI) भी तेजी से बढ़ रहा है। कनाडा की मैकमैन कंपनी, यूके की दो बड़ी कंपनियां और जापान, चीन, आयरलैंड व दक्षिण कोरिया की कंपनियां मध्यप्रदेश में अपने पैर पसार रही हैं। अब तक 9,300 करोड़ रुपये का निवेश धरातल पर आ चुका है। कृषि क्षेत्र में सुधार करते हुए मुख्यमंत्री ने कपास पर मंडी शुल्क को आधा कर दिया है और किसानों को शून्य ब्याज दर पर लोन देने की सुविधा दी है। अब किसान लोन लेने के बाद उसे चुकाने के लिए पूरे 12 महीने का समय ले सकेंगे, जिससे 31 मार्च की समय सीमा की बाध्यता समाप्त हो गई है।

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