भोपाल, 11 जून 2026: आज एक बड़ा अजीब सा समाचार आया है। कलेक्टर की टीम की ओर से हैडलाइन में दावा किया गया है कि भोपाल को एलपीजी सिलेंडर फ्री बनाने का अभियान शुरू हो गया है। इसके बाद जो डिटेल दी गई है उसके हिसाब से कैलकुलेट करें तो भोपाल को रसोई गैस सिलेंडर फ्री बनाने में 64 साल लग जाएंगे। जबकि पूरे समाचार में कई बार दोहराया गया है कि इस योजना पर काम करने से काम बहुत तेजी से हो जाएगा। चलिए अपन भी कैलकुलेट करते हैं:-
Bhopal’s LPG-Free Vision Faces Scrutiny as Timeline Extends to 64 Years
कलेक्टर के निर्देशानुसार खाद्य विभाग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, शहर के पॉश इलाकों जैसे होशंगाबाद रोड, बावड़ियाकलां और साकेत नगर की 172 कॉलोनियों में अब तक गैस लाइन बिछाई जा चुकी है। लेकिन भोपाल की 1200 से अधिक कॉलोनियों के विशाल नेटवर्क को देखते हुए यह प्रगति ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन के अनुसार, अब रणनीति यह है कि एक समय में केवल 4 कॉलोनियों पर फोकस किया जाएगा और वहां 100% कनेक्शन होने के बाद ही अगली 4 कॉलोनियों का काम शुरू होगा।
धीमी गति का गणित: एक विश्लेषण
यदि हम दिए गए आंकड़ों और वर्णित नई रणनीति के आधार पर गणना करें, तो स्थिति काफी चिंताजनक नजर आती है:
कुल लक्ष्य: 1200+ कॉलोनियां।
अब तक की प्रगति: 172 कॉलोनियां।
शेष कार्य: 1200 - 172 = 1028 कॉलोनियां।
काम की नई गति (Current Strategy): एक बार में केवल 4 कॉलोनियां।
समय का अनुमान: सरकारी गाइडलाइन के अनुसार, जिस इलाके में लाइन बिछती है, वहां कनेक्शन पूरा करने के लिए 90 दिन (3 महीने) का समय अनिवार्य किया गया है। यदि हम एक बैच (4 कॉलोनियों) को पूरा करने में कम से कम यही 3 महीने का समय मानकर चलें:
कुल बैच: 1028 कॉलोनियां ÷ 4 कॉलोनियां प्रति बैच = 257 बैच।
कुल समय (महीनों में): 257 बैच × 3 महीने = 771 महीने।
कुल समय (वर्षों में): 771 महीने ÷ 12 महीने = लगभग 64.25 वर्ष।
निष्कर्ष: संकट का समाधान या समाधान का आश्वासन
उपरोक्त गणना स्पष्ट करती है कि यदि थिंक गैस और प्रशासन इसी "4-4 कॉलोनी" की कछुआ चाल से आगे बढ़ते हैं, तो भोपाल की अंतिम कॉलोनी तक पाइपलाइन पहुँचने में आधी सदी से भी अधिक का समय लग सकता है। वर्तमान में आपूर्ति और मांग के बीच भारी अंतर है, शहर में रोजाना 12 से 14 हजार सिलेंडरों की बुकिंग हो रही है, जबकि आपूर्ति केवल 9-10 हजार की ही है। ऐसे में पीएनजी को तेजी से विस्तार देने के लिए केंद्र सरकार के 'अनिवार्य वस्तु अधिनियम' के तहत नियमों को और भी सख्त किया गया है ताकि मंजूरी मिलने में होने वाली देरी को खत्म किया जा सके। लेकिन जब तक कार्यबल और प्रोजेक्ट की स्केल नहीं बढ़ाई जाती, तब तक आम जनता को गैस के लिए संघर्ष करना ही पड़ेगा।

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