BU BHOPAL UPDATE - बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने हेतु राज्यपाल को परिषद का प्रस्ताव

Updesh Awasthee
भोपाल, 3 जून 2026:
भोपाल यूनिवर्सिटी, जिसका नाम 1988 में बदलकर बरकतउल्ला विश्वविद्यालय कर दिया गया था, एक बार फिर बदल सकता है। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद (ईसी) ने बुधवार को संस्थान का नाम ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके बाद प्रस्ताव राज्यपाल और कुलाधिपति मंगुभाई पटेल के पास भेज दिया गया है।

Barkatullah University Name Change Proposal Sent to Governor

ईसी की बैठक में तर्क दिया गया कि राजा भोज का नाम प्रदेश की ऐतिहासिक और बौद्धिक विरासत का प्रतीक है। इसी आधार पर विश्वविद्यालय को उनके नाम से जोड़ने की बात रखी गई।सिर्फ नाम ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के अकादमिक ढांचे में भी बदलाव तय किए गए हैं। अरबी और पर्शियन जैसे पारंपरिक विषयों को एक साथ लाकर ‘तुलनात्मक भाषा एवं संस्कृति विभाग’ के रूप में पुनर्गठित किया जाएगा।

ईसी की सदस्य डॉ. ताहिरा अब्बासी ने इस फैसले का विरोध किया है। उन्होंने कहा- विश्वविद्यालय का मौजूदा नाम गदर पार्टी के संस्थापक सदस्य, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और भारत की निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री बरकतउल्ला भोपाली की स्मृति से जुड़ा है, जिसे बदला जाना उचित नहीं होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि नया नाम देना ही है तो किसी नए विश्वविद्यालय को दिया जाए।

सरकारी यूनिवर्सिटी का नाम कैसे बदला जाता है

किसी सरकारी विश्वविद्यालय का नाम बदलना सिर्फ घोषणा भर नहीं होता, बल्कि इसके लिए पूरी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। सबसे पहले विश्वविद्यालय की कार्य परिषद या एग्जीक्यूटिव काउंसिल में नाम परिवर्तन का प्रस्ताव रखा जाता है। परिषद से मंजूरी मिलने के बाद यह प्रस्ताव राज्य के उच्च शिक्षा विभाग और फिर सरकार के पास भेजा जाता है।

अधिकांश सरकारी विश्वविद्यालय राज्य सरकार द्वारा बनाए गए अधिनियमों के तहत संचालित होते हैं, इसलिए नाम बदलने के लिए संबंधित कानून में संशोधन जरूरी है। इसके लिए विधानसभा में संशोधन विधेयक पेश किया जाता है। विधानसभा से विधेयक पारित होने और राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद सरकार राजपत्र में अधिसूचना जारी करती है।

अधिसूचना प्रकाशित होते ही विश्वविद्यालय का नया नाम आधिकारिक रूप से लागू हो जाता है। इसके बाद विश्वविद्यालय की वेबसाइट, डिग्री, प्रमाणपत्र, रिकॉर्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों में नया नाम अपडेट किया जाता है।

मेरी टिप्पणी
इसमें कोई डिबेट नहीं कि बरकतउल्ला भोपाली एक महान इंसान थे। भारत को ऐसे लाखों इंसानों की जरूरत है। डॉ अब्बासी का कहना बिल्कुल सही है, यदि सरकार को कोई नया नाम देना तो नई यूनिवर्सिटी बनाकर नया नाम देना चाहिए। यह फार्मूला 1988 की अर्जुन सरकार पर भी लागू होता है। इसलिए यूनिवर्सिटी का नाम भोपाल यूनिवर्सिटी ही होना चाहिए। मोहन सरकार वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय के नाम से नई यूनिवर्सिटी बनाए। 

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!