ज्ञान विज्ञान न्यूज डेस्क, 4 जून 2026: क्या आप जानते हैं, आपकी शादी की अंगूठी, मंगलसूत्र और दुनिया भर में मौजूद सोने का हर एक कण कहां से आया है। वैज्ञानिक कहते थे कि कोई Asteroid टकराया, जिसमें सोना था परंतु सवाल यह है कि Asteroid में सोना कहां से आया और प्रत्येक Asteroid में सोना क्यों नहीं होता। 17 अगस्त 2017 को पृथ्वी से लगभग 130 मिलियन प्रकाश-वर्ष दूर हुई एक भयंकर घटना ने इस सवाल का जवाब दे दिया।
How gold is made in space
17 अगस्त 2017 को पृथ्वी से लगभग 130 मिलियन प्रकाश-वर्ष दूर NGC 4993 नामक आकाशगंगा में दो न्यूट्रॉन सितारों के बीच भीषण टक्कर हुई। लाखों वर्षों तक एक-दूसरे के चारों ओर घूमने के बाद, ये तारे एक सेकंड के कुछ ही हिस्सों में आपस में टकरा गए। इस घटना को GW170817 नाम दिया गया, जिसे पृथ्वी पर स्थित LIGO और Virgo वेधशालाओं ने गुरुत्वाकर्षण तरंगों (Gravitational waves) के माध्यम से पहचाना। इस टकराव ने न केवल विज्ञान की एक बड़ी गुत्थी सुलझाई, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि ब्रह्मांड में सोने (Gold) की उत्पत्ति वास्तव में कहाँ से होती है।
Stellar Nucleosynthesis limits
अक्सर यह माना जाता है कि सभी तत्व तारों के अंदर बनते हैं, लेकिन साधारण तारों की अपनी सीमाएँ होती हैं। सामान्य तारे हाइड्रोजन को हीलियम में और फिर कार्बन जैसे भारी तत्वों में फ्यूज करते हैं, लेकिन यह प्रक्रिया लोहे (Iron) पर आकर रुक जाती है। लोहे से भारी तत्वों, जैसे चांदी, सोना, प्लेटिनम और यूरेनियम को बनाने के लिए ऊर्जा पैदा करने के बजाय ऊर्जा देने की आवश्यकता होती है। जबकि 'स्लो न्यूट्रॉन कैप्चर' (s-process) के जरिए बिस्मथ तक के तत्व बन सकते हैं, लेकिन सोने जैसे भारी तत्वों के निर्माण के लिए एक बहुत ही विशिष्ट और हिंसक प्रक्रिया की आवश्यकता होती है।
r-process nucleosynthesis explained: न्यूट्रॉन सितारों के टकराव से भारी तत्वों का निर्माण
ब्रह्मांड में होने वाली एक विशेष प्रक्रिया 'रैपिड न्यूट्रॉन कैप्चर' या r-process के कारण सोना पैदा होता है। इसमें परमाणु नाभिक (atomic nuclei) पर इतनी तेज़ी से न्यूट्रॉन की बौछार होती है कि वे रेडियोधर्मी क्षय (decay) होने से पहले ही उन्हें अवशोषित कर लेते हैं, जिससे भारी और स्थिर तत्व बनते हैं। 2017 की खोज ने यह साबित कर दिया कि न्यूट्रॉन सितारों का विलय (Neutron-star mergers) ही वह स्थान है जहाँ 'r-process' के लिए आवश्यक अत्यधिक न्यूट्रॉन घनत्व और ऊर्जा मौजूद होती है।
The physics of Kilonova
न्यूट्रॉन सितारों के इस टकराव को वैज्ञानिकों ने 'किलोनोवा' (Kilonova) का नाम दिया है। यह शब्द 2010 में ब्रायन मेट्ज़गर द्वारा गढ़ा गया था, जिन्होंने गणना की थी कि इस टकराव से निकलने वाली रोशनी एक सामान्य नोवा से हजार गुना अधिक चमकदार होगी। GW170817 के दौरान, वैज्ञानिकों ने देखा कि नए बने भारी तत्वों के रेडियोधर्मी क्षय के कारण किलोनोवा से एक विशिष्ट लाल रंग की चमक (reddish glow) निकलती है। स्पेक्ट्रोस्कोपिक साक्ष्यों ने पहली बार प्रत्यक्ष रूप से 'r-process' के माध्यम से भारी तत्वों के निर्माण की पुष्टि की।
एक टकराव से बना पृथ्वी के द्रव्यमान से 200 गुना ज्यादा सोना
यूसी बर्कले और कोलंबिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार, GW170817 घटना ने भारी मात्रा में तत्वों को अंतरिक्ष में फेंका। अनुमान है कि इस एक टक्कर से सौर द्रव्यमान का लगभग 6 प्रतिशत हिस्सा मलबे के रूप में बाहर निकला, जिसमें पृथ्वी के कुल द्रव्यमान का लगभग 200 गुना सोना और 500 गुना प्लेटिनम शामिल था। यह मात्रा इतनी विशाल है कि यह पूरी आकाशगंगा को समृद्ध करने के लिए पर्याप्त है। वैज्ञानिकों के मॉडल इस घटना से निकले मलबे की संरचना और चमक से पूरी तरह मेल खाते थे।
आपकी सोने की अंगूठी और 4.6 अरब साल पुराना इतिहास
आपकी शादी की अंगूठी या बैंक लॉकर में रखा सोना असल में सौर मंडल के बनने से बहुत पहले हुए ऐसे ही ब्रह्मांडीय टकरावों का परिणाम है। लगभग 4.6 अरब साल पहले, जब सूर्य और ग्रहों का निर्माण हो रहा था, वे अंतरतारकीय गैस और धूल के उस बादल से बने थे जो पहले की पीढ़ियों के सुपरनोवा और किलोनोवा के मलबे से समृद्ध था। पृथ्वी ने अपने हिस्से का सोना इसी समृद्ध बादल से प्राप्त किया। पृथ्वी के निर्माण के शुरुआती पिघले हुए चरण में, अधिकांश सोना इसके कोर (केंद्र) में समा गया था। आज हम जो सोना खदानों से निकालते हैं, वह बाद के समय में हुए क्षुद्रग्रहों के हमलों (asteroid impacts) के कारण ऊपरी सतह पर जमा हुआ है।
क्या किलोनोवा ही सोने का एकमात्र स्रोत है?
हालाँकि 2017 की घटना ने यह पुष्टि की कि न्यूट्रॉन सितारों के विलय से सोना बनता है, लेकिन वैज्ञानिकों के मन में अभी भी कुछ सवाल बाकी हैं। खगोलशास्त्री एथन सीगल के 2024 के विश्लेषण के अनुसार, ब्रह्मांड में न्यूट्रॉन स्टार मर्जर की दर वर्तमान में मौजूद सोने की प्रचुरता को पूरी तरह समझाने के लिए कम हो सकती है। इसका मतलब है कि 'कोलेप्सर' (Collapsar) या ब्लैक होल बनाने वाले दुर्लभ सुपरनोवा और मैग्नेटार (Magnetar) जैसी अन्य ब्रह्मांडीय घटनाएं भी सोना बनाने में योगदान दे सकती हैं।
यह स्पष्ट है कि पृथ्वी पर मौजूद सोने का हर एक परमाणु किसी मृत तारे के हिंसक अंत की कहानी कहता है, जो हमारे सौर मंडल के अस्तित्व में आने से अरबों साल पहले घटित हुई थी।

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