भोपाल, 4 जून 2026: बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा यूनिवर्सिटी का नाम बदलने का प्रस्ताव पास किया गया। यह सरकार के पास भेजा जाना चाहिए था परंतु राज्यपाल महोदय के पास भेज दिया गया और इसी के साथ ऐलान कर दिया कि बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदल गया है। इस प्रकार के समाचारों के कारण बरकतुल्लाह के समर्थन में प्रदर्शन शुरू हो गए। बात को बढ़ता हुआ देख, उच्चशिक्षा मंत्री ने बयान देकर मामले को शांत करने की कोशिश की है।
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद कहा: कल कार्यपरिषद की बैठक में यह प्रस्ताव आया है। वो प्रस्ताव सरकार और हमारे विभाग के पास आने वाला है उसके बाद हम उस पर विचार करेंगे। विश्वविद्यालय ऑटोनॉमस बॉडी है कार्यपरिषद अपने निर्णय लेती है। उनका प्रस्ताव अभी हमारे पास आया नहीं है उसको देखकर मुख्यमंत्री जी से विमर्श करके फिर आगे निर्णय करेंगे। अभी ये कार्यपरिषद का निर्णय है। उस निर्णय का हम समग्र अध्ययन करेंगे।
नाम बदलने के विरोध में किसने क्या कहा?
नाम बदलने का विरोध मुख्य रूप से कार्यपरिषद की बैठक में और राजनीतिक दलों/व्यक्तियों द्वारा व्यक्त किया गया। डॉ. ताहिरा अब्बासी (कार्यपरिषद सदस्य और फारसी विभाग से जुड़ी): सबसे स्पष्ट और आधिकारिक विरोध किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा नाम स्वतंत्रता सेनानी मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली की स्मृति से जुड़ा है, इसे बदलना उचित नहीं। सुझाव दिया कि यदि नया नाम देना ही है तो किसी नए विश्वविद्यालय को दिया जाए, न कि मौजूदा का नाम बदला जाए। उनके इसी पाइंट के लगभग सभी नेताओं द्वारा दोहराया जा रहा है।
कांग्रेस नेता और विधायक आरिफ मसूद ने राजनैतिक आरोप लगाया कि यह कदम मुस्लिम समुदाय के योगदान को मिटाने का प्रयास है। कहा “यह फैसला मुस्लिम समुदाय के सदस्यों के योगदान को भुलाने के लिए ज्यादा है। हम इसके खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।”
कुछ इतिहासकारों (जैसे इरफान हबीब) और सामाजिक-शैक्षणिक हलकों में इसे “सांप्रदायिक” या विरासत मिटाने वाला कदम बताया गया।
सोशल मीडिया में “बहस छिड़ गई” या “विरोध शुरू” की बात कही गई, लेकिन कोई ठोस प्रदर्शन की खबर नहीं।

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