आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने सुपरवाइजों के खिलाफ शपथपत्र दिया, ना जांच, ना कार्रवाई

Updesh Awasthee
भोपाल, 8 जून 2026
: मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले में महिला बाल विकास विभाग के अंतर्गत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने शपथपत्र प्रस्तुत करके शिकायत की है कि सुपरवाइरों द्वारा उनसे रिश्वत वसूली की जा रही है परंतु अब तक मामले की जांच के आदेश तक नहीं दिए गए हैं। जबकि नोटरी किया गया शपथ पत्र एक एवीडेंस माना जाता है और झूठा शपथ पत्र प्रस्तुत करना एक अपराध है। इसका मतलब हुआ कि यदि शपथ पत्र पर दी गई जानकारी गलत है तो शिकायतकर्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। 

AshokNagar Anganwadi Workers Submit Affidavit Against Supervisors, Allege No Inquiry or Action

पिपरई सेक्टर के ग्राम चिरवांस की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आशा बाई अहिरवार ने बताया कि शपथ-पत्र के अनुसार सुपरवाइजर रचना राठौर द्वारा हर महीने होने वाली बैठक में एमपीआर के नाम पर प्रत्येक कार्यकर्ता से जबरन 200 रुपए वसूले जाते हैं। ईसागढ़ के ग्राम सरजापुर की राजकुमारी आदिवासी ने शपथ पत्र में लिखा कि मिनी से फुल आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद पर प्रमोशन हुआ था। सुपरवाइजर चंचल अहिरवार ने पदभार ग्रहण कराने और मानदेय जारी करने के बदले 15 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। मैंने अपनी चांदी की पायल और मंगलसूत्र गिरवी रखकर 15 हजार रुपए सुपरवाइजर को दिए। मां बंजारी स्व सहायता समूह गहोरा की अध्यक्ष रजनी विश्वकर्मा ने एसडीएम को दी शिकायत में बताया कि वे 4 आंगनबाड़ियों में भोजन-नाश्ता बांट रही थीं। समूह के भोजन वितरण का बिल पास कराने के एवज में सुपरवाइजर रजनी बालू द्वारा रुपयों की मांग की गई। तो रजनी के पति के खाते में 5 हजार रुपए ट्रांसफर किए।

एक नया पैटर्न दिखाई दिया
इन तीनों शिकायतों में एक बात समान दिखाई दे रही है। महिला सुपरवाइजर्स द्वारा डायरेक्ट रिश्वत नहीं ली जा रही बल्कि अपने अपने पतियों के बैंक खातों में ट्रांसफर करवाई जा रही है। 

स्पष्टीकरण
सुपरवाइजर चंचल अहिरवार ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। सुपरवाइजर रचना राठौर की तरफ से उनके पति संदीप राठौर ने कहा, असल में सुपरवाइजर (मेरी पत्नी) ने उनके केंद्र का निरीक्षण कर लापरवाही मिलने पर नोटिस जारी किया था और वेतन काटा था। यह झूठा शपथ-पत्र दिया है। हमें किसी पैसे की कोई जानकारी नहीं है। सुपरवाइजर रजनी बालू का पक्ष : गहोरा समूह को कलेक्टर साहब के निर्देश पर हटाया है। रही बात मेरे पति के खाते में पैसे ट्रांसफर होने की, तो मेरे पति नपा में अस्थायी कर्मी हैं और प्रॉपर्टी का काम करते हैं। इस पैसे के लेनदेन की जानकारी न तो मुझे है और न ही मेरे पति को। ये हम पर दबाव बनाने की साजिश है।

मामले का कानूनी पहलू
महिला कर्मचारियों द्वारा शपथ पत्र पर शिकायत की गई है। नोटरी किए हुए शपथ पत्र की अपनी कानूनी वैल्यू होती है। किसी के बयान से शपथ पत्र की वैल्यू कम नहीं होती। यदि शपथ पत्र झूठा है तो यह साबित करना होगा और शपथ पत्र प्रस्तुत करने वाले के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। 

इस मामले में कलेक्टर को तत्काल जांच के आदेश देने चाहिए थे, क्योंकि महिला एवं बाल विकास विभाग, कलेक्टर के अधीन आता है और वो इसके लिए प्राधिकृत अधिकारी हैं। कलेक्टर द्वारा जांच के आदेश ना देना, उनके संदेह के घेरे में लाकर खड़ा करता है। 

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