खरगोन, 16 मई 2026: भारत की प्राचीन कथाओं में कई बार बताया जाता है कि यमराज अथवा यमदूत से कोई गलती हो जाती है। वह ऐसे व्यक्ति के प्राणों का हरण कर लेते हैं, जिसका समय पूरा नहीं हुआ था। और आज तो वट सावित्री अमावस्या भी है। जब सत्यवान के प्राण वापस आ गए थे। खरगोन में कुछ ऐसी ही घटना हुई है। इस घटना को देखकर कोई नहीं कह सकता कि बालक जिंदा बचा होगा लेकिन बालक जिंदा है और खतरे से बाहर है।
Vat Amavasya Miracle Story: Boy Recovers After Being Declared Critical
बालक की उम्र 17 वर्ष है। वह अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था तभी अचानक हादसे का शिकार हो गया और जब सबकी नजर उस पर पड़ी, तब यह दृश्य दिखाई दे रहा था। बाउंड्री वॉल से निकला लोहे का एंगल सीधे उसके जबड़े में घुसा हुआ था। सब ने काफी देर तक प्रयास किया लेकिन जब कोई उपाय नहीं सूझा तो लोहे के एंगल को दीवार से काटकर अलग किया गया और बालक को लेकर इंदौर दौड़ लगा दी गई। खरगोन से इंदौर तक लोहे का एंगल बालक के चेहरे के अंदर इसी प्रकार घुसा हुआ था। इंदौर में डॉक्टरों ने 100% रिस्क बताते हुए सर्जरी शुरू की और कुछ ही देर में चमत्कार हो गया। सर्जरी सक्सेसफुल रही। लोहे का एंगल चेहरे से बाहर निकाला जा चुका था। सबसे आनंद का समाचार यह है कि, बालक खतरे से बाहर है।
इस पूरे घटनाक्रम को देखकर, वह प्राचीन कथाएं याद आ जाती हैं, जिनमें यमदूत किसी के प्राणों का हरण करने के लिए घटना को घटित करते हैं, लेकिन तभी उन्हें पता चलता है कि, वह गलती कर रहे हैं। जिस व्यक्ति को घटा का शिकार बना दिया गया है, उसकी मृत्यु का समय अभी नहीं आया है। तब ऐसे चमत्कार होते हैं और कोई मृत्यु के मुख से बाहर निकल आता है।

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