जबलपुर, 16 मई 2026: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित करते हुए एक याचिकाकर्ता (मध्य प्रदेश शिक्षक भर्ती परीक्षा के चयनित अभ्यर्थी) को स्कूल चॉइस फिलिंग और काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति प्रदान की है। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने तरुण अग्रवाल बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य (WP No. 18264 of 2026) के मामले में यह आदेश सुनाया है।
MP Teacher Recruitment: Jabalpur High Court Grants Big Relief in School Choice Filling Process
यह कानूनी विवाद स्कूल आवंटन प्रक्रिया से जुड़ा है। याचिकाकर्ता, तरुण अग्रवाल ने मध्य प्रदेश शासन के शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित की जा रही स्कूल चॉइस फिलिंग और काउंसलिंग प्रक्रिया के संबंध में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता श्री दिनेश सिंह चौहान ने पैरवी की, जबकि शासन की ओर से उप सरकारी अधिवक्ता (Dy. GA) सुश्री ऐश्वर्या सिंह उपस्थित हुईं।
याचिकाकर्ता के वकील, श्री दिनेश सिंह चौहान ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता को स्कूल चयन (Choice Filling) और काउंसलिंग की प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए। यह प्रक्रिया 12 मई 2026 से 18 मई 2026 के बीच निर्धारित की गई थी। श्री दिनेश सिंह ने भोपाल समाचार डॉट कॉम को बताया कि, माध्यमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा में उम्मीदवार को डॉक्यूमेंट सत्यापन के बाद बाहर कर दिया। बाहर करने का रीजन यह दिया की तरुण अग्रवाल के पास स्नातक में अंग्रेजी विषय नहीं था। जबकि विभाग के कर्मचारी अधिकारी अपने ही नियम को ढंग से नहीं पढ़ते हैं। नियम में साफ तौर पर लिखा है कि अगर किसी ने 4 वर्षी B.El.Ed किया है तो उसे स्नातक से संबंधित बाध्यता रखना जरूरी नहीं।
अधिवक्ता दिनेश सिंह चौहान ने तर्क रखा कि, विभाग में जो बैठे लोग हैं वह ना तो मार्कशीट देखते हैं साफ तरीके से, ना ही अपना ही नियम देखते हैं कि नियम में क्या लिखा है और अभ्यर्थियों को अपात्र कर देते हैं।अधिवक्ता दिनेश सिंह चौहान ने कोर्ट से प्रार्थना किया कि अभ्यर्थी को अपात्र कर दिया गया है तो उसको पात्र लिस्ट में डालते हुए इस साला चयन में सम्मिलित कराया जाए।
शासन की ओर से सुश्री ऐश्वर्या सिंह ने अपना पक्ष रखा।
न्यायालय ने दलीलें सुनने के बाद प्रतिवादियों (राज्य सरकार एवं अन्य) को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।
Court’s Special Observation and Decision
न्यायालय ने मामले की गंभीरता और समय सीमा (काउंसलिंग की अंतिम तिथि 18 मई) को देखते हुए याचिकाकर्ता को तत्काल राहत प्रदान की है। न्यायालय के आदेश के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
उच्च न्यायालय ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। यह नोटिस 'RAD' मोड के माध्यम से सात कार्य दिवसों के भीतर प्रक्रिया शुल्क (P.F) भुगतान करने पर भेजा जाएगा, जो चार सप्ताह के भीतर जवाबदेह होगा।
Interim Measure: न्यायालय ने स्पष्ट रूप से आदेश दिया कि सुनवाई की अगली तारीख तक, एक अंतरिम उपाय के रूप में, याचिकाकर्ता को स्कूल चॉइस फिलिंग/काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दी जाती है क्योंकि यह प्रक्रिया 12.05.2026 से 18.05.2026 तक निर्धारित है। याचिकाकर्ता की भागीदारी इस रिट याचिका के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगी।
निष्कर्ष और आगामी कार्यवाही
न्यायालय का यह आदेश उन अभ्यर्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल है जो प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तकनीकी बाधाओं का सामना करते हैं। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह के इस निर्णय से तरुण अग्रवाल को चल रही काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल होने का कानूनी अधिकार मिल गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होने की संभावना है, जब राज्य सरकार अपना पक्ष प्रस्तुत करेगी।

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