नई दिल्ली, 8 मई 2026: उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा अपने मंत्री कुंवर विजय शाह (Kunwar Vijay Shah) के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी (Prosecution Sanction) देने में की जा रही देरी पर सख्त रुख अपनाया है। यह मामला कर्नल सोफिया कुरैशी (Colonel Sofiya Qureshi) के खिलाफ मंत्री द्वारा की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से संबंधित है।
"अब बहुत हो गया": सीजेआई की सख्त टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ ने विशेष जांच दल (SIT) द्वारा मांगी गई अभियोजन मंजूरी पर निर्णय न लेने पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, "बस अब हमारे आदेश का पालन करें। बहुत हो गया (Enough is enough)। पहली चीज माफी होनी चाहिए थी"। अदालत ने नाराजगी व्यक्त की कि मंजूरी पर फैसला दो सप्ताह पहले ही आ जाना चाहिए था।
It was not unfortunate. It was most unfortunate
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने मंत्री का बचाव करते हुए कहा कि शाह की टिप्पणियों को गलत समझा गया होगा और शायद वे महिला अधिकारी की प्रशंसा करना चाहते थे। हालांकि, सीजेआई सूर्य कांत इस तर्क से सहमत नहीं हुए। उन्होंने एसजी मेहता के 'दुर्भाग्यपूर्ण' (unfortunate) शब्द को सुधारते हुए कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण नहीं था। यह 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' (most unfortunate) था"। कोर्ट ने आगे कहा कि एक राजनेता के रूप में शाह भली-भांति जानते हैं कि कैसे स्पष्ट रूप से प्रशंसा की जाती है।
न्यायमूर्ति बागची ने एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह भी उल्लेख किया कि शाह को इस तरह की टिप्पणियां करने की आदत है।
क्या था पूरा विवाद?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब मंत्री विजय शाह ने रायकुंडा गाँव में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर कहा, "जिन्होंने हमारी बेटियों को विधवा किया, हमने उन्हें सबक सिखाने के लिए उनकी ही एक बहन को भेजा"। इस टिप्पणी को कर्नल सोफिया कुरैशी और उनके धर्म पर एक परोक्ष हमले के रूप में देखा गया। कर्नल कुरैशी उन सैन्य अधिकारियों में शामिल थीं, जिन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ भारत की सीमा पार सैन्य कार्रवाई 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) के बारे में मीडिया को जानकारी दी थी।
I will bring hell down
इस मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया था। जस्टिस अतुल श्रीधरन ने पुलिस को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था, "इस अदालत के आदेश को लागू करने के लिए, यदि आवश्यकता पड़ी, तो मैं नर्क नीचे ले आऊंगा (I will bring hell down)"। इसके बाद शाह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई:
धारा 152: राष्ट्रीय संप्रभुता को खतरे में डालने वाले कृत्य।
धारा 196(1)(b) और 197(1)(c): विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना।
सुप्रीम कोर्ट ने मोहन सरकार को 1 महीने का टाइम दिया
सुप्रीम कोर्ट ने शाह की FIR पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, हालांकि उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की गई है। कोर्ट ने मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया है और राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वे "परिस्थितियों की समग्रता" पर विचार करते हुए अभियोजन की मंजूरी पर निर्णय लें। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।

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