नई दिल्ली, 19 मई 2026: आवारा कुत्तों के मामले में देश के सबसे बड़े विवाद का फैसला हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि, इंसानों के लिए खतरनाक आवारा कुत्तों का संरक्षण नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे सभी सड़क छाप कुत्तों को मार डालने के निर्देश दिए हैं जो इंसानों के लिए खतरनाक हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ अवमानना केस किया जाए।
Kill Dangerous Stray Dogs if Needed, Act Against Negligent Officials: Supreme Court
यह मामला 28 जुलाई 2025 को शुरू हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने देश में आवारा कुत्तों के हमलों और उनसे होने वाली मौतों पर स्वतः संज्ञान लिया था। 11 अगस्त 2025 को कोर्ट ने दिल्ली-NCR से 8 हफ्ते के भीतर सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में भेजने का आदेश दिया था।
इसके खिलाफ विरोध होने पर 22 अगस्त 2025 को कोर्ट ने अपने आदेश में बदलाव किया। कोर्ट ने कहा कि जिन कुत्तों में रेबीज नहीं है और जो आक्रामक नहीं हैं, उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी इलाके में छोड़ा जा सकता है, जहां से पकड़ा गया था।
बाद में मामले का दायरा पूरे देश तक बढ़ा दिया गया। 7 नवंबर 2025 को कोर्ट ने अंतरिम आदेश में राज्यों और NHAI को हाईवे, अस्पताल, स्कूल और दूसरे संस्थानों के आसपास से आवारा जानवर हटाने को कहा था।
नवंबर 2025 में शीर्ष कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश जारी किए थे। कहा था कि कुत्तों को शेल्टर होम्स में रखें और उन्हें वापस न छोड़ें। सड़कों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर भी बैन लगाया था। इसके बाद डॉग लवर्स और NGO ने इन निर्देशों को रद्द करने के लिए आवेदन दिया था। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने मामले की सुनवाई की।
आवारा कुत्तों के बारे में सुप्रीम कोर्ट के 9 निर्देश
- राज्य सरकारें पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) के नियमों को मजबूत करें और सही तरीके से लागू करें।
- हर जिले में कम से कम 1 पूरी तरह काम करने वाला ABC सेंटर (एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर) बनाया जाए।
- जहां आबादी ज्यादा है, वहां जरूरत के हिसाब से ABC सेंटरों की संख्या बढ़ाई जाए।
- कोर्ट के आदेशों और पशु कल्याण नियमों को पूरी तरह लागू किया जाए।
- जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर भी ये नियम लागू करने पर फैसला लिया जाए और उसे तय समय में लागू किया जाए।
- एंटी-रेबीज दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
- NHAI राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाए, जैसे पुराने ट्रांसपोर्ट वाहनों का इस्तेमाल कर उन्हें हटाना। NHAI इसके लिए मॉनिटरिंग और समन्वय व्यवस्था भी बनाए।
- रेबीज से संक्रमित या बेहद खतरनाक कुत्तों के मामले में, कानून के तहत जरूरत पड़ने पर यूथेनेशिया (दया मृत्यु) जैसे कदम उठाए जा सकते हैं ताकि लोगों की जान सुरक्षित रहे।
- कोर्ट के आदेश लागू करने वाले नगर निगम और सरकारी अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा दी जाए। सामान्य तौर पर उनके खिलाफ FIR या सख्त कार्रवाई न की जाए।
कोर्ट ने ये भी कहा कि अकेले राजस्थान के श्रीगंगानगर शहर में ही एक महीने के भीतर कुत्तों के काटने की 1084 घटनाएं सामने आईं। रिपोर्ट्स के अनुसार, छोटे बच्चों को गंभीर चोटें आईं, चेहरे पर गहरे घाव हो गए। तमिलनाडु में साल के पहले चार महीनों में ही कुत्तों के काटने की लगभग 2 लाख घटनाएं दर्ज की गईं।

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