नई दिल्ली, 8 मई 2026: आज से करीब 27 साल पहले सन 1999 में हुए देशवाल सिंह हत्याकांड में रतलाम कोर्ट और फिर हाई कोर्ट द्वारा घोषित किए गए हत्यारे संजय सिंह को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है, लेकिन उसके माथे से कलंक नहीं मिटा है। संजय सिंह सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के बाद भी अपराधी है। बस अपराध बदल गया है।
यह मामला 12 मई 1999 की रात का है, जो मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के सरसी गांव में घटित हुआ था। गांव में हुई एक हिंसक झड़प के दौरान देशपाल सिंह नामक व्यक्ति को गोली लगी थी, जिनकी अगले दिन इलाज के दौरान मृत्यु हो गई थी। वर्ष 2001 में निचली अदालत ने संजय सिंह को मुख्य आरोपी महेंद्रपाल सिंह के साथ "समान इरादे" (Common Intention) के आधार पर हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले को 2011 में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा था।
सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां उच्चतम न्यायालय ने मामले की गहराई से जांच करते हुए पाया कि अभियोजन पक्ष अपीलकर्ता के विरुद्ध धारा 34 (समान इरादा) के आवश्यक तत्वों को साबित करने में विफल रहा है। न्यायालय ने निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं को रेखांकित किया:
- साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ कि अपीलकर्ता संजय सिंह मुख्य आरोपी के साथ नहीं आया था, बल्कि घटना शुरू होने के बाद दूसरी दिशा से वहां पहुँचा था।
- मृतक के मृत्यु पूर्व बयान (Dying Declaration) और गवाहों के बयानों से यह साबित नहीं हुआ कि अपीलकर्ता ने वह घातक गोली चलाई थी जिससे देशपाल सिंह की जान गई।
- एक घायल गवाह (PW-6) ने अदालत को बताया कि घटना के दौरान उसने हस्तक्षेप करते हुए अपीलकर्ता की बंदूक की नली को ऊपर की ओर कर दिया था, जिससे उसकी गोली मृतक को नहीं लगी।
न्यायालय का अंतिम आदेश अदालत ने स्पष्ट किया कि यद्यपि संजय सिंह का इरादा हत्या करने का साबित नहीं हुआ, लेकिन हथियार के साथ उसकी मौजूदगी और हमले की गंभीरता को देखते हुए उसे हत्या के प्रयास (धारा 307) का दोषी माना जाना उचित है।
न्यायालय ने यह देखते हुए कि अपीलकर्ता पहले ही 9 वर्ष और 9 महीने की जेल काट चुका है और घटना 27 साल पुरानी है, उसकी सजा को उसके द्वारा पहले से काटी गई अवधि तक ही सीमित कर दिया। इसके साथ ही न्यायालय ने संजय सिंह को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया, बशर्ते वह किसी अन्य मामले में वांछित न हो।

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