भोपाल समाचार, 18 मई 2026: सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार विशेष पात्रता परीक्षा के दायरे में आए मध्य प्रदेश के शिक्षकों की एकता टूट गई है। पुराने वालों की डिमांड बदल गई है। दरअसल शिक्षकों के दबाव में मध्य प्रदेश सरकार ने पुनर्विचार याचिका तो दाखिल कर दी थी परंतु लीगल प्रोफेशनल्स जानते थे कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने वाली है, और वही होने जा रहा है।
MP Teachers Under TET Pressure See Split in Unity, Demands Shift
शिक्षकों की पात्रता परीक्षा के खिलाफ रिव्यू पिटीशन पर 13 मई को हुई सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद अभी फैसला आना बाकी है। इस बीच प्रदेश के कुछ शिक्षक संगठनों ने RTE संशोधन नियम 2017 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET से राहत का लाभ देने की डिमांड रखी है। शिक्षकों के संगठन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि संसद में पुनः स्पष्ट संशोधन लाया जाए या स्थिति स्पष्ट करने की पहल की जाए, जिससे सेवारत शिक्षकों के भविष्य और रोजगार की सुरक्षा हो सके।
पात्रता परीक्षा से बचाव के लिए किए जा रहे ताजा प्रयासों को लेकर शासकीय शिक्षक संगठन ने कहा है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के नियमों में वर्ष 2017 में किए गए संशोधन एवं भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार 31 मार्च 2015 तक नियुक्त या कार्यरत शिक्षकों को न्यूनतम योग्यता हासिल करने के लिए विशेष प्रावधान दिए गए थे। राजपत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि ऐसे शिक्षकों को तय अवधि में न्यूनतम योग्यता पाने का अवसर दिया गया।
विभागीय कार्रवाई के बाद उपेंद्र कौशल के सुर बदले
उपेंद्र कौशल, इस मामले में शिक्षकों की सबसे बड़े नेता बन गए थे। दैनिक भास्कर में हर रोज उनके बयान छप रहे थे। मुख्यमंत्री ने पुनर्विचार याचिका की मांग स्वीकार कर ली इसके बाद भी राजधानी भोपाल में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने उपेंद्र कौशल को उनकी मूल पद स्थापना पर वापस भेज दिया। इसके बाद उपेंद्र कौशल के सुर बदल गए। शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने ताज़ा बयान में कहा है कि वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की सेवाओं को वर्तमान में TET की अनिवार्यता के आधार पर प्रभावित करना न्यायसंगत नहीं है। संगठन का कहना है कि जब RTE अधिनियम लागू नहीं था, उस समय नियुक्त शिक्षकों पर बाद में लागू की गई शर्तों को कठोरता से लागू करना संवैधानिक भावना एवं प्राकृतिक न्याय के विपरीत है।
संगठन ने केंद्र एवं राज्य सरकार से मांग की है कि भारत सरकार के राजपत्र दिनांक 17 अक्टूबर 2017 में प्रकाशित संशोधित नियमों एवं प्रावधानों के अनुरूप पूर्व नियुक्त शिक्षकों को राहत प्रदान की जाए तथा उनकी सेवाओं और वरिष्ठता को सुरक्षित रखा जाए।

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