शिक्षक भर्ती 2023 के अभ्यर्थियों ने लोक शिक्षण संचालनालय के सामने मुंडन करवाया

Updesh Awasthee
भोपाल, 13 मई 2026:
मध्य प्रदेश में उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती 2023 के अभ्यर्थियों का संघर्ष अब एक मार्मिक मोड़ पर पहुँच गया है। हजारों चयनित अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर कई सालों से संघर्ष कर रहे अभ्यर्थियों ने आज फिर लोक शिक्षण संचालनालय के सामने प्रदर्शन किया और मुंडन करवाया। 

विरोध का कड़ा रुख: मुंडन और दंडवत प्रदर्शन 

अपनी मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए अभ्यर्थियों ने भोपाल में लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के सामने मार्मिक प्रदर्शन किया। विरोध के इस दौर में अभ्यर्थियों ने न केवल दंडवत होकर अपनी व्यथा सुनाई, बल्कि शासन के उदासीन रवैये के खिलाफ सामूहिक मुंडन भी करवाया। इस आंदोलन की गंभीरता और अभ्यर्थियों की मानसिक पीड़ा को साफ तौर पर दर्शाता है। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पूर्व में खून से पत्र लिखने से लेकर हर संभव प्रयास कर चुके हैं, लेकिन आज भी वे वहीं खड़े हैं जहाँ से शुरू किया था।

कानूनी दांवपेंच में उलझा भविष्य 

भर्ती प्रक्रिया के रुकने के पीछे आयु सीमा में छूट से संबंधित एक कानूनी मामला है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने 15 अक्टूबर 2024 को अभ्यर्थियों के पक्ष में निर्णय देते हुए आयु में छूट प्रदान करने का आदेश दिया था। हालांकि, इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, जहाँ मई 2025 से 'यथास्थिति' (Status Quo) लागू है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि विभाग केवल औपचारिकता निभा रहा है और पिछले 8 महीनों से दस्तावेजों को व्यवस्थित करने के नाम पर समय बर्बाद किया जा रहा है। उनका तर्क है कि यदि यह मामला किसी राजनीतिक प्राथमिकता से जुड़ा होता, तो शायद अब तक त्वरित निर्णय आ गया होता।

प्रमुख मांगें और शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव 

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की मुख्य मांग पदों में वृद्धि के साथ द्वितीय काउंसलिंग का त्वरित आयोजन है। अभ्यर्थियों के अनुसार, 5 साल के लंबे अंतराल के बाद आई यह भर्ती बहुत ही सीमित पदों पर थी, जिनमें से भी अधिकांश बैकलॉग पद थे। रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है; जहाँ मध्य प्रदेश का 10वीं का परिणाम 73.42% रहा, वहीं पड़ोसी राज्य राजस्थान का परिणाम 94% और उत्तर प्रदेश का 90% रहा है। अभ्यर्थियों का मानना है कि बिना पर्याप्त शिक्षकों के स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना संभव नहीं है।

अभ्यर्थियों की हताशा और मानसिक स्थिति 

"वर्ग एक में सम्मान हमारा, अधिकार हमारा" के नारों के साथ अभ्यर्थी सरकार से अपने हक की मांग कर रहे हैं। दो-दो कठिन परीक्षाएं पास करने के बावजूद 2023 से भटक रहे इन युवाओं की मानसिक स्थिति अब दयनीय होती जा रही है। अभ्यर्थियों ने भावुक होकर यहाँ तक कहा है कि अब उनमें लड़ने की शक्ति नहीं बची है और शासन की लापरवाही के कारण वे न केवल अपनी योग्यता, बल्कि जीवन की उम्मीद भी खो रहे हैं।

सरकार से त्वरित निर्णय की अपील अभ्यर्थियों ने माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह से इस विषय पर तुरंत संज्ञान लेने का निवेदन किया है। उनका कहना है कि सरकार यदि चाहे तो जुलाई तक ज्वाइनिंग देकर उन्हें स्कूलों में पढ़ाने का अवसर दे सकती है, जिससे लाखों स्कूली बच्चों का भविष्य संवर सकता है।

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