जबलपुर, 13 मई 2026: मध्य प्रदेश शासन, स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के आदेश अनुसार कर्मचारी चयन मंडल भोपाल द्वारा चयनित 13000 से अधिक प्राथमिक शिक्षकों को हाई कोर्ट से आज बड़ा झटका लगा है। मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालय ने इस परीक्षा की मेरिट लिस्ट नए सिरे से तैयार करने के आदेश दिए हैं। मामला 5% बोनस अंक का है।
MP Primary Teacher Recruitment in Trouble as High Court Delivers Major Blow
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल, भोपाल द्वारा आयोजित प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 के परिणामों में कथित गड़बड़ी और अपात्र उम्मीदवारों को गलत तरीके से 5% बोनस अंक दिए जाने का मामला सामने आया था। इसके बाद चयन सूची से बाहर हुए अभ्यर्थियों ने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। बुधवार को मामले की अंतिम सुनवाई के बाद एकलपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। 13 मई को फैसला सुनाया गया।
गैर-RCI डिप्लोमा धारकों को बाहर करने के निर्देश
जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने नए सिरे से मेरिट सूची तैयार करने और गैर भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) डिप्लोमा धारक अपात्र अभ्यर्थियों की अभ्यर्थिता समाप्त कर उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर करने के निर्देश राज्य शासन को दिए हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि उम्मीदवारों को पकड़े जाने के बाद अपने अंक कम करने या ‘नहीं’ का विकल्प चुनने की अनुमति दी जाती है, तो यह बेईमानी को बढ़ावा देने और ईमानदार उम्मीदवारों को दंडित करने जैसा होगा।
14,964 उम्मीदवारों ने बोनस अंक प्राप्त कर लिए
नरसिंहपुर निवासी सोनम अगरैया सहित अन्य दो उम्मीदवारों ने याचिका दायर कर कहा था कि प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 के भर्ती विज्ञापन की कंडिका 7.7 के तहत केवल उन उम्मीदवारों को 5% बोनस अंक मिलने थे, जिनके पास ‘भारतीय पुनर्वास परिषद’ (RCI) से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा में डिप्लोमा है। इसके बावजूद चयन सूची में लगभग 14,964 उम्मीदवारों ने खुद को इस श्रेणी में दर्शाकर बोनस अंक प्राप्त कर लिए। याचिका में Rehabilitation Council of India (RCI) के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा है कि पूरे मध्य प्रदेश में RCI पोर्टल पर केवल 2,194 कार्मिक और 3,077 पेशेवर ही पंजीकृत हैं। ऐसे में करीब 15 हजार उम्मीदवारों का विशेष शिक्षा प्रमाणपत्र धारक होना प्रथम दृष्टया संदिग्ध है।
ESB BHOPAL ने RCI पंजीकरण संख्या या प्रमाणपत्र नहीं मांगा
याचिका के अनुसार, लोक शिक्षण संचालनालय ने जनवरी 2026 में ही विभाग को आगाह किया था कि लगभग 18 हजार उम्मीदवारों ने ‘हां’ का विकल्प चुना है, जो अत्यधिक प्रतीत होता है। इसके बावजूद सुधार के लिए पोर्टल खोले जाने के बाद भी मंडल ने उम्मीदवारों से RCI पंजीकरण संख्या या प्रमाणपत्र नहीं मांगा।परिणामस्वरूप बिना किसी भौतिक सत्यापन के केवल उम्मीदवारों के डिक्लेरेशन के आधार पर सॉफ्टवेयर के माध्यम से बोनस अंक दे दिए गए। इससे वास्तविक और योग्य उम्मीदवारों की मेरिट प्रभावित हुई और वे चयन से बाहर हो गए।
जिन्हें बोनस अंक मिला, वे भी पहुंचे कोर्ट
कोर्ट में यह भी दलील दी गई कि गलत जानकारी देकर चयनित हुए कई अभ्यर्थी भी हाईकोर्ट पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि जल्दबाजी में हुई त्रुटि के कारण उन्होंने बोनस अंक का लाभ ले लिया, जबकि उनके पास संबंधित प्रमाणपत्र नहीं था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिकाएं खारिज कर दीं।
याचिका में 27 फरवरी 2026 को जारी कथित दोषपूर्ण मेरिट सूची को रद्द करने और केवल वैध RCI प्रमाणपत्र धारकों को बोनस अंक देकर नई मेरिट सूची जारी करने के निर्देश देने की मांग की गई थी।

.webp)