भोपाल, 31 मई 2026: मध्य प्रदेश के 27 जिलों में संकट की स्थिति का संकेत मिला है। पिछले 48 घंटे में मध्य प्रदेश के 27 जिलों में बारिश हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में कहा जाता है "नौतपा न तपा तो अधूरी आस, भीग गया तो सत्यानाश"। इसका मतलब हुआ कि यदि नौतपा में भयंकर गर्मी नहीं पड़ी तो अच्छा मानसून नहीं मिलता और यदि बारिश हो गई तो समझो खेतों का सत्यानाश हो जाता है, क्योंकि मानसून का चक्र ही बिगड़ जाता है।
MP Weather Forecast: Warning Signals Emerge in 27 Districts Amid Changing Weather Conditions
मध्य प्रदेश में 29 तारीख शुक्रवार शाम से शनिवार की रात तक आधे हिस्से में बारिश का दौर बना रहा। टीकमगढ़ में सवा इंच पानी गिर गया। दतिया में आधा इंच और नौगांव में पौन इंच पानी गिरा। इसके अलावा ग्वालियर, इंदौर, धार, गुना, रतलाम, उज्जैन, दमोह, खजुराहो, रीवा, सागर, सतना, उमरिया, खरगोन, शिवपुरी, डिंडौरी, मंदसौर, खंडवा, शाजापुर, देवास, झाबुआ, टीकमगढ़, मुरैना, बैतूल, बालाघाट, श्योपुर में भी बारिश हुई। श्योपुर में ओले भी गिरे।
नौतपा में बारिश के बारे में वैज्ञानिकों का अनुभव और अध्ययन
भारत के मैदानी इलाकों में जब सूर्य की तीव्र गर्मी से जमीन बहुत अधिक गर्म हो जाती है, तो वहां 'निम्न वायुदाब' (Low Pressure) का एक क्षेत्र बनता है। यह क्षेत्र एक चुंबक की तरह कार्य करता है जो हिंद महासागर से आने वाली मानसूनी हवाओं को अपनी ओर खींचता है। यदि इस दौरान बारिश होती है, तो तापमान में अस्थायी गिरावट आती है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह मानसून के आने की प्रक्रिया को धीमा या प्रभावित कर सकता है, क्योंकि जो 'लो प्रेशर' क्षेत्र मानसूनी हवाओं को खींचने के लिए चाहिए होता है, बारिश के कारण वह उतना प्रभावी नहीं बन पाता।
नौतपा में बारिश के बारे में प्राचीन भारतीय लोक-विज्ञान
सदियों से भारतीय ग्रामीण अंचलों में प्रचलित लोक-कहावतें पूर्वजों के गहरे अनुभव पर आधारित हैं।
"तपै नवतपा नव दिन जोय, तौ पुन बरखा पूरन होय।"
प्राचीन विशेषज्ञों का मानना था कि नौतपा की गर्मी जमीन के भीतर दबे हानिकारक कीटों और टिड्डियों के अंडों को नष्ट करने में मदद करती है। यदि इन दिनों बारिश हो जाती है, तो जमीन पूरी तरह नहीं तपती, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों की संख्या बढ़ सकती है और पारिस्थितिकीय संतुलन बिगड़ सकता है।
नौतपा में बारिश के बारे में ज्योतिष शास्त्र
धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में नौतपा को 'वर्षा ऋतु का गर्भकाल' माना गया है। कहा जाता है कि "रोहिणी नक्षत्र के 9 दिनों में सूर्य की गर्मी से धरती जितनी अधिक गर्म होगी, वर्षा कल उतना ही अच्छा होगा। नौतपा में प्रचंड गर्मी को ज्योतिष में अच्छी बारिश और खुशहाली का संकेत बताया गया है। यदि नौतपा में बारिश हो जाती है, तो इसे 'नौतपा का टूटना' कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इसे एक नकारात्मक संकेत माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यदि इन नौ दिनों में बारिश हो जाए, तो आगामी मानसून के दौरान वर्षा कम हो सकती है या अनियमित (खंड वृष्टि) हो सकती है। इसे फसल और जनजीवन के लिए शुभ नहीं माना जाता है।

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