जस्टिस चौबे ने पक्षपात का आरोप लगाने वाले जूनियर वकील को माफ किया, MPHC का मामला

Updesh Awasthee
जबलपुर, 12 मई 2026
: पॉलिटिकल बयानबाजी और न्यायालय में दलील के बीच काफी अंतर होता है, लेकिन जूनियर एडवोकेट इस बात को ठीक प्रकार से नहीं समझते। हाई कोर्ट आफ मध्य प्रदेश जबलपुर में एक जूनियर एडवोकेट ने जस्टिस चौबे पर पक्षपात का आरोप लगा दिया। जस्टिस चौबे ने आरोप को प्रमाणित करने के लिए कहा तो माफी मांगने लगा। यदि कोई सीनियर वकील होता तो निश्चित रूप से उसको दंडित किया जाता लेकिन वह एक जूनियर एडवोकेट था, उसके भविष्य की चिंता करते हुए जस्टिस चौबे ने उसको माफ कर दिया। 

Madhya Pradesh High Court: Justice Chaubey Shows Leniency to Lawyer in Bias Allegation Case

मामला Essential Commodities Act (आवश्यक वस्तु अधिनियम) का है। 6 मई को जूनियर वकील अपने क्लाइंट (आरोपी व्यापारी) की जमानत हेतु अनुरोध करने के लिए उपस्थित हुआ था। जैसे ही उसको समझ में आया कि उसकी दलीलों में दम नहीं है और जमानत नहीं मिलेगी तो उसने जस्टिस रामकुमार चौबे पर पक्षपात का आरोप लगा दिया। उसने कहा कि इसी तरह के मामले जब सीनियर एडवोकेट द्वारा प्रस्तुत किए जाते हैं तो जमानत के आदेश हो जाते हैं, लेकिन वह एक जूनियर एडवोकेट है। इसलिए उसके क्लाइंट को जमानत नहीं दी जा रही है। यह सुनते ही जस्टिस चौबे ने जूनियर वकील को अपना आरोप प्रमाणित करने के लिए कहा और इसके लिए दो दिन का अवसर दिया। 48 घंटे में वकील साहब को समझ में आ गया, यह कोर्ट है, कॉलेज नहीं है। यहां आरोप लगाएंगे तो प्रमाणित भी करना पड़ेगा। 

MP High Court: Junior Advocate Forgiven After Alleging Bias Against Justice Chaubey

8 मई को जूनियर एडवोकेट के भीतर से क्रांतिकारी गायब हो चुका था। उसने आज कोर्ट का एक अध्याय सीख लिया था। उसने माफी मांगी और सच बोलना शुरू कर दिया। उसने बताया कि, उसने बिना किसी आधार के आरोप लगा दिया था। उसने जमानत के कई मामलों का अध्ययन किया लेकिन उसको ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला जिसके आधार पर पक्षपात का आरोप भी लगाया जा सके। स्पष्ट हो गया था कि उसने न्यायालय की अवमानना की है। अपराध प्रमाणित हो गया था और अपराधी ने स्वीकार भी कर लिया था। इसके बावजूद जस्टिस चौबे ने जूनियर एडवोकेट को दंडित नहीं किया। यहां तक कि चेतावनी भी नहीं दी। उसकी क्षमा याचना को स्वीकार कर दिया गया और उसको अपनी जमानत याचिका पर पक्ष प्रस्तुत करने के लिए 15 मई की तारीख निर्धारित कर दी गई। रिपोर्ट: उपदेश अवस्थी (पत्रकार एवं विधि सलाहकार)।

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