नई दिल्ली, 23 मई 2026: उत्तर प्रदेश के बांदा में पारा 48 डिग्री सेल्सियस को छू रहा है। दोपहर के वक्त सड़कें ऐसी वीरान हैं मानो कर्फ्यू लगा हो और चलने वाली हवा ऐसी महसूस होती है जैसे किसी ने चेहरे पर 'हेयर ड्रायर' चला दिया हो। लेकिन इस साल की गर्मी की सबसे डरावनी कहानी दिन के सूरज में नहीं, बल्कि रातों की खामोश तपिश में छिपी है।
India’s Heat Becoming Unescapable: People Suffer Heat Stress Even at Night
कभी रातें दिन भर की थकान मिटाने और राहत पाने का जरिया हुआ करती थीं, लेकिन अब कई शहरों में रात का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच रहा है। लोग पसीने से तर-बतर होकर सो रहे हैं और पंखे चलने के बावजूद शरीर ठंडा नहीं हो पा रहा है। क्लाइमेट ट्रेंड्स की नई रिपोर्ट 'Why India’s heatwaves feel more brutal than before' के अनुसार, भारत की गर्मी अब सिर्फ गर्म नहीं रही, बल्कि 'अनएस्केपेबल' (जिससे बचा न जा सके) होती जा रही है।
आंकड़ों में छिपी तबाही की आहट
भारत का 'कोर हीटवेव ज़ोन', जिसमें दिल्ली, यूपी, राजस्थान, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्य शामिल हैं, वहां हीटवेव का समय और बारंबारता दोनों बढ़ रहे हैं। 1961 से अब तक इन इलाकों में हीटवेव की अवधि 0.44 दिन प्रति दशक की रफ्तार से बढ़ी है। यह बदलाव सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी खेती, बिजली की मांग और अस्पतालों पर बढ़ते दबाव की भी कहानी है।
नींद और सेहत पर सीधा हमला
2010 से 2024 के बीच देश में औसत न्यूनतम तापमान (रात की गर्मी) 0.21 डिग्री प्रति दशक बढ़ा है। WHO की गाइडलाइन कहती है कि घर के अंदर का तापमान 24 डिग्री से ऊपर नहीं होना चाहिए, वरना यह दिल और शरीर की रिकवरी को प्रभावित करता है। मगर आज भारत के 36 में से 35 राज्यों में रातें गर्म हो रही हैं, जिससे लोग रात में भी 'हीट स्ट्रेस' झेलने को मजबूर हैं।
सिर्फ पारा नहीं, नमी ने बिगाड़ा खेल
इस बार गर्मी के खतरनाक होने का एक बड़ा कारण बढ़ती आर्द्रता (humidity) है। 2015-19 के मुकाबले पिछले पांच सालों में भारत की औसत आर्द्रता 67.1% से बढ़कर 71.2% हो गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि हवा में बढ़ी हुई यह नमी शरीर को पसीने के जरिए ठंडा होने से रोकती है, जिससे 36 डिग्री की उमस भरी गर्मी, 40 डिग्री की सूखी गर्मी से कहीं ज्यादा जानलेवा साबित हो रही है।
शहर बन रहे हैं 'हीट ट्रैप'
कंक्रीट के जंगल, डामर की सड़कें और एसी (AC) से निकलती गर्म हवा ने शहरों को 'हीट ट्रैप' में बदल दिया है। रिपोर्ट बताती है कि भारत के कई शहर अपने आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में 2 से 10 डिग्री तक ज्यादा गर्म हो सकते हैं। इसका सबसे बुरा असर गरीबों और मजदूरों पर पड़ रहा है, जिन्हें दिन भर कड़ी धूप में काम करने के बाद रात में भी राहत नहीं मिलती, जिससे उनका शरीर अगले दिन के लिए रिकवर ही नहीं कर पाता।
निष्कर्ष
सूखी मिट्टी, कम बारिश और बदलता क्लाइमेट इस संकट को और तीखा बना रहे हैं। आज गर्मी सिर्फ एक मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि हमारे शहरों की डिजाइन, आर्थिक असमानता और पर्यावरण के प्रति हमारी अनदेखी की एक चेतावनी है। यही कारण है कि अब लोग केवल पारा नहीं पूछ रहे, बल्कि यह पूछ रहे हैं कि "आखिर रात में भी इतनी गर्मी क्यों है?" रिपोर्ट: निशांत सक्सेना।

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