Pooja Soni IAS Trainee ने यह क्या कह डाला, खुशी में चाय-पानी करा दे तो मैं दखल नहीं देती

Updesh Awasthee
भोपाल, 16 मई 2026:
मध्य प्रदेश राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी और नरसिंहपुर के तेंदूखेड़ा एसडीएम पूजा सोनी का UPSC 2025 में सिलेक्शन हो चुका है। उनको ट्रेनिंग के लिए जाना है और यहां रिश्वतखोरी के मामले में फंस गई है। EOW का मामला तो अपनी जगह है लेकिन नरसिंहपुर के पत्रकार आकाश कौरव से बातचीत के दौरान उन्होंने एक और विवादित बयान दे दिया। पूजा सोनी का कहना है कि "अगर कोई व्यक्ति काम होने के बाद खुशी में चाय-पानी करा दे तो उसमें मैं दखल नहीं देती"। 

Pooja Soni IAS Trainee का रिश्वतखोरी कांड क्या है

मध्य प्रदेश शासन के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की एक यूनिट ने नरसिंहपुर के तेंदूखेड़ा एसडीएम दफ्तर में एसडीएम के स्टेनोग्राफर श्री सौरव यादव को 30 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। इस दौरान स्टेनोग्राफर ने कहा कि 30000 में से मेरे तो सिर्फ ₹5000 हैं। बाकी के ₹25000 मैडम के हैं। बताया जा रहा है कि ट्रैप से पहले शिकायतकर्ता ने एसडीएम पूजा सोनी से पूछा था- ‘मैडम आपकी क्या सेवा करें?’ इस पर उन्होंने सीधे कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन बाबू के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा- ‘जितनी श्रद्धा है, आप कर दीजिए।’ EOW के पास यह ऑडियो रिकॉर्डिंग भी है। फिलहाल स्टेनो सौरभ यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, लेकिन एसडीएम पूजा सोनी और चपरासी सुनील कुमार के खिलाफ भी जांच जारी है।

Pooja Soni IAS Trainee का रिश्वतखोरी कांड में विवादित बयान

एसडीएम पूजा सोनी ने नरसिंहपुर के पत्रकार श्री आकाश कौरव को बुलाकर अपना पक्ष प्रस्तुत किया। पूजा सोनी का पक्ष दैनिक भास्कर की वेबसाइट पर भी प्रकाशित हुआ है। भोपाल के प्रख्यात पत्रकार श्री योगेश पांडे इस न्यूज़ को लीड कर रहे थे। इसमें पूजा सोनी ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि:- 
  • रिश्वत उनके बाबू ने ली, उन्होंने नहीं। 
  • जब मेरा किसी तरह का लेन-देन ही नहीं हुआ तो मुझे आरोपी कैसे बनाया जा सकता है?
  • जिस काम को लेकर रिश्वत की बात हो रही है, उसकी NOC 12 मई को ही जारी हो चुकी थी। ‘27 अप्रैल को केस शुरू हुआ था और 12 मई को काम पूरा हो गया। जब काम हो चुका था तो 14 मई को षड्यंत्र करने की क्या जरूरत थी?’ 
  • शिकायतकर्ता संजय राय लगातार पूछता था- ‘मैडम आपकी क्या सेवा करें?’ लेकिन हर बार मना किया। बाद में जब उसने बाबू के लिए पूछा तो कहा- ‘वो तुम देख लो।’ 
  • अगर कोई व्यक्ति काम होने के बाद खुशी में चाय-पानी करा दे तो उसमें मैं दखल नहीं देती। अगर बाबू मुझे बताता कि 30 हजार रुपए की डिमांड हो रही है तो मैं उसी समय मना कर देती।

Pooja Soni IAS Trainee रिश्वत के लिए प्रेशर नहीं बनाती, लेकिन कोई खुशी से दे दो आपत्ति नहीं?

पूजा सोनी के उपरोक्त स्पष्टीकरण से वह निर्दोष तो साबित नहीं होती लेकिन इस बयान के साथ उन्होंने यह बता दिया कि वह रिश्वतखोरी का विरोध नहीं करती। वह केवल इतनी ईमानदारी की रिश्वत के लिए प्रेशर क्रिएट नहीं करती, लेकिन कम होने के बाद खुशी में चाय-पानी करा दे तो उसमें दखल नहीं देती। 

पब्लिक सेंटीमेंट पूजा सोनी के साथ

पन्ना जिले के देवेन्द्रनगर की रहने वाली पूजा सोनी साधारण परिवार से हैं। उनके पिता महेश सोनी किसान हैं, जबकि मां बर्तनों की दुकान संभालती हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पारिवारिक संस्कार ऐसे नहीं हैं कि हम ऐसे गलत काम करें। 
फैमिली बैकग्राउंड के कारण पब्लिक सेंटीमेंट पूजा सोनी के साथ है। हालांकि सरकारी ऑफिस में खुशी में चाय पानी के नाम पर पैसे लेना भी रिश्वत ही है, लेकिन वर्तमान में जब सरकारी सिस्टम रिश्वत के लिए प्रेशर क्रिएट करता है, काम बिगाड़ देता है, तब काम हो जाने के बाद खुशी में चाय पानी को पब्लिक सज्जनता का प्रतीक मानने लगी है, लेकिन भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 किसी भी प्रकार के अनुचित लाभ को रिश्वतखोरी का गंभीर अपराध मानता है। 

बिल्डर की पूजा सोनी से क्या दुश्मनी थी?

एसडीएम पूजा सोनी का कहना है कि, उन्होंने रिश्वत की मांग नहीं की और 12 तारीख को कम हो चुका था जबकि EOW की कार्रवाई 14 तारीख को हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि बिल्डर ने खुशी से चाय पानी दिया था। यदि पूजा सोनी की इस बात को सही मान भी लिया जाए तो एक सवाल तो बनता है, जिस व्यक्ति का काम पूरा हो चुका था, और वह खुशी से चाय पानी करवाना चाहता था तो फिर उसको नरसिंहपुर से जबलपुर जाकर EOW से शिकायत करने की क्या जरूरत थी। एसडीएम पूजा सोनी को यह भी बताना होगा कि बिल्डर संजय राय की उनके साथ क्या दुश्मनी थी। समय पर काम करने वाले और केवल चाय पानी में संतुष्ट हो जाने वाले अधिकारी को गिरफ्तार करवाने के लिए कोई क्यों EOW को बुलाएगा। 

EOW के अनुसार तेंदुखेड़ा के बिल्डर संजय राय ने EOW जबलपुर से शिकायत की थी कि कॉलोनी निर्माण के नक्शे के लिए स्थल निरीक्षण का उन्होंने आवेदन दिया था, लेकिन जानबूझकर देरी की जा रही थी। आरोप है कि एसडीएम ऑफिस के स्टेनो सौरभ यादव ने 30 हजार रुपए रिश्वत की मांग की थी। रिश्वत के बाद ही नक्शा मंजूर करने की बात कही गई। उसके लिए वह रोज चक्कर काट रहा था।

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