इंदौर, 16 मई 2026: धार भोजशाला मामले में हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद शुक्रवार की रात मुस्लिम समाज के राजनीतिक संरक्षक, कांग्रेस के नेता एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा की कट्टर हिंदू नेता एवं विधायक उषा ठाकुर का हाथ अपने हाथों में लेकर, घोषणा की कि मैं पक्का सनातनी हूं। इसी के साथ यह भी स्पष्ट किया कि वह भोजशाला मामले में हाई कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं।
Digvijaya Singh Calls Himself a ‘Kattar Sanatani’, Welcomes High Court Verdict on Dhar Bhojshala
राहुल गांधी द्वारा कांग्रेस पार्टी से बिना फेयरवेल के रिटायर कर दिए जाने के बाद श्री दिग्विजय सिंह राज्यसभा का कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद सरकारी बंगला एवं सुविधाओं को बहाल किए जाने के लिए सरकार द्वारा वित्त पोषित किसी ऐसे प्रोजेक्ट पर काम करना चाहते हैं जिसमें उनको भाजपा ज्वाइन ना करनी पड़े। इधर यूजीसी के नियम बनाने वाली कमेटी का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद श्री दिग्विजय सिंह ने जो कुछ किया "यूजीसी नियम कांड" सरकार थोड़ा संकोच कर रही है। इसलिए श्री दिग्विजय सिंह ने पार्टी की विचारधारा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सार्वजनिक किया।
‘I Am a Kattar Sanatani’: Digvijaya Singh Backs HC Decision in Bhojshala Case
दिग्विजय सिंह : मैं घोषणा करता आया हूं और आज फिर कह रहा हूं कि मैं घोर सनातन धर्म का मानने वाला हूं। मेरे कहने के बाद आपने सनातन धर्म को स्वीकार किया, पहले हिंदू-हिंदू धर्म करती थीं। मैंने इसकी शुरुआत की थी।
उषा ठाकुर : हम अनादि काल से सनातनी हैं।
दिग्विजय सिंह : अनादि काल से सनातनी तो तुम हो। हम क्या दुश्मन है उसके? मैं जितना सनातनी हूं... तूने नर्मदा परिक्रमा की है क्या?
उषा ठाकुर : नहीं करी।
दिग्विजय सिंह : तू एकादशी का व्रत करती है क्या?
उषा ठाकुर : आप बड़े भाई हैं। मैंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से पक्के सनातनी हैं, पर सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करते।
दिग्विजय सिंह : मैं सार्वजनिक रूप से कह तो रहा हूं, और कैसे सार्वजनिक करूं?
उषा ठाकुर : हां, मैं आपका धन्यवाद देती हूं। बहुत अच्छी बात है।
दिग्विजय सिंह : मैं सही सनातनी हूं।
उषा ठाकुर : तो आपको हाई कोर्ट के निर्णय का सम्मान करना चाहिए।
दिग्विजय सिंह : तूने कैसे मान लिया कि मैंने विरोध किया?
यहां उल्लेख करना उचित होगा कि, प्रेम, प्रोफेशन और पॉलिटिक्स में फेल होने के बाद कवि श्री कुमार विश्वास ने कथावाचक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। पहले वह संघ और मोदी विरोधी बातें करते थे फिर वह स्वयं को तटस्थ और गांधी एवं जिन्ना को अपना पूर्वज कहते थे, लेकिन फिर उन्होंने सार्वजनिक मंचों से सनातन हिंदू धर्म की लाइन पर बोलना शुरू किया। तब कहीं जाकर उनको कथाओं के लिए निमंत्रण और दक्षिण मिलना प्रारंभ हुई। श्री दिग्विजय सिंह भी शायद कुछ ऐसा ही चाहते हैं।

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