किताबों में ज्ञान होता है, जानकारियां होती हैं, कहानियां होती हैं, यह तो सब जानते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं किताबों की भी अपनी कहानियां होती है। आज मैं आपको किताबों के बारे में कुछ ऐसी जानकारी देने जा रहा हूं, जो ज्यादातर लोग नहीं जानते। World Book Day के अवसर पर यह जानकारी आपकी सोशल लाइफ में काम की साबित होगी।
पेड़ की किताब में पेड़ होता था
स्वीडन के अल्नार्प लाइब्रेरी में 217 वॉल्यूम वाली एक अनोखी किताबों की सीरीज है। हर किताब किसी खास पेड़ पर आधारित है। यह तो एक सामान्य बात है लेकिन अब आपको जानकर आश्चर्य हुआ कि हर किताब जिस पेड़ पर आधारित होती थी, उस किताब की बाइंडिंग उसी पेड़ की छाल, मॉस और लाइकेन से बनी होती है, और अंदर पेड़ से जुड़े नमूने रखे होते हैं। यह 19वीं शताब्दी की जर्मन परंपरा से प्रेरित है। बहुत कम लोग इसके बारे में जानते हैं।
विश्व किताब दिवस की तारीख में गड़बड़ी
अक्सर यह कहा जाता है कि विश्व प्रसिद्ध लेखक विलियम शेक्सपियर और मिगुएल डी सर्वेंटिस दोनों की मृत्यु 23 अप्रैल 1616 को हुई थी। उनकी याद में 23 अप्रैल को मनाया जाता है। लेकिन "रोचक तथ्य" यह है कि वे एक ही दिन नहीं मरे थे!
उस समय स्पेन ग्रेगोरियन कैलेंडर का पालन करता था, जबकि इंग्लैंड जूलियन कैलेंडर का।
अगर हम दोनों को एक ही कैलेंडर (ग्रेगोरियन) पर लाएँ, तो शेक्सपियर की मृत्यु सर्वेंटिस के 11 दिन बाद (3 मई 1616) हुई थी। यानी तारीख एक थी, पर दिन अलग-अलग।
50000 शब्दों की किताब जिसमें एक भी 'e' अक्षर नहीं है
क्या आप 'e' अक्षर के बिना अंग्रेजी में कोई एक सेंटेंस लिख सकते हैं। यदि सफल हो जाए तो क्या पैराग्राफ लिख सकते हैं और यदि पैराग्राफ लिखने में भी सफल हो जाएंगे तो क्या कोई एक पेज लिख सकते हैं?Ernest Vincent Wright की 1939 की किताब Gadsby, पूरे 50,000 शब्दों की एक ऐसी कहानी है जिसमें एक भी 'e' अक्षर नहीं है। मतलब पूरे 50000 शब्दों में एक भी बार 'e' अक्षर का उपयोग नहीं किया गया है। यह lipogram का शानदार उदाहरण है। ये तथ्य आम "फन फैक्ट्स" लिस्ट से अलग हैं और ज्यादा गहरी या दुर्लभ इतिहास से आते हैं। आज पुस्तक दिवस पर कोई दुर्लभ किताब पढ़ने या ऐसी अनोखी कहानी शेयर करने का दिन है!
किताबी कीड़ा के तीन अर्थ
हम पढ़ने के शौकीनों को 'किताबी कीड़ा' कहते हैं, लेकिन यह शब्द मूल रूप से उन कीड़ों के लिए था जो किताबों की गोंद और पन्नों को खाते थे (जैसे Common Furniture Beetle के लार्वा)। 16वीं शताब्दी में यह शब्द उन लोगों के लिए एक अपमानजनक शब्द (Insult) के रूप में इस्तेमाल होना शुरू हुआ जो दुनियादारी छोड़कर बस किताबों में घुसे रहते थे। बाद में इसे एक सम्मानजनक पहचान मिल गई।
पुर्तगाल में चमगादड़ किताबों की रक्षा करते हैं
पुर्तगाल की कोइम्ब्रा यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में रात के समय चमगादड़ों की एक सेना को खुला छोड़ दिया जाता है। यह कोई डरावनी कहानी नहीं है, बल्कि किताबों के संरक्षण का एक नायाब तरीका है। ये चमगादड़ उन कीड़ों को खा जाते हैं जो किताबों के कागजों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। सुबह लाइब्रेरियन को बस उनकी गंदगी (Guano) साफ करनी पड़ती है, लेकिन किताबें सदियों से सुरक्षित हैं।
दुनिया की सबसे छोटी किताब
यह तो आप भी जानते होंगे Teeny Ted from Turnip Town दुनिया की सबसे छोटी किताब है। इसका साइज सिर्फ 0.07mm x 0.10mm है। इसे scanning electron microscope से ही पढ़ा जा सकता है। सिर्फ 100 कॉपी बनी थीं। फिर दूसरा एडिशन नहीं बना।
पुरानी किताबों की खुशबू का रहस्य
क्या आप जानते हैं कि पुरानी किताबों से आने वाली उस खास मिट्टी जैसी खुशबू का एक वैज्ञानिक नाम भी है? इसे 'बिब्लियोस्मा' (Bibliosmia) कहा जाता है। यह खुशबू तब पैदा होती है जब कागज में मौजूद 'लिग्निन' (Lignin) और 'सेल्युलोज' समय के साथ टूटने लगते हैं। यह प्रक्रिया 'वैनिलिन' जैसे यौगिक छोड़ती है, जिससे पुरानी किताबों से हल्की वनीला जैसी महक आती है।
किताबों को मानव चमड़ी से बांधने की प्रथा
19वीं शताब्दी में डॉक्टरों और सर्जनों के बीच किताबों को मानव चमड़ी से बांधने की प्रथा काफी प्रचलित थी। ये ज्यादातर मेडिकल किताबें या व्यक्तिगत संस्मरण होती थीं। अब तक दुनिया भर में लगभग 18 ऐसी किताबें हैं। जिनकी पुष्टि हो चुकी है कि उन्हें मानव चंडी से बांधा गया था। उदाहरण: हार्वर्ड यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी में एक किताब थी जो एक मानसिक अस्पताल की अनक्लेम्ड महिला की चमड़ी से बंधी थी। एडिनबर्ग के सर्जन्स हॉल म्यूजियम में विलियम बर्क (एक मर्डरर) की चमड़ी से बनी नोटबुक है। ये किताबें अब दुर्लभ हैं और वैज्ञानिक परीक्षण (जैसे peptide mass fingerprinting) से ही पुष्टि होती है। यह प्रथा 20वीं शताब्दी में खत्म हो गई।

