धार, 18 अप्रैल 2026: ट्राइबल डिपार्टमेंट द्वारा अपने चार शिक्षकों को सस्पेंड कर दिया गया है। कलेक्टर ने भ्रष्टाचार के एक मामले की जांच करवाई थी। रिपोर्ट आने की 1 साल बाद शिक्षकों को सस्पेंड किया गया है। सवाल यह है कि, 1 साल तक जांच रिपोर्ट का क्या किया गया। एक साल तक जांच रिपोर्ट को दबा के रखना, यह किस प्रकार का व्यवहार है। यहां उल्लेख करना जरूरी है कि, जांच रिपोर्ट जब आई थी तब श्री प्रियंक मिश्रा आईएएस, कलेक्टर थे और अब जब सस्पेंड किया गया है तब प्रियंक मिश्रा का ट्रांसफर भोपाल हो गया है एवं श्री अभिषेक चौधरी (CEO जिला पंचायत) के पास कलेक्टर के पद का प्रभार है।
Major Action in Dhar: 4 Teachers Suspended After Collector Change, One-Year-Old File Cleared
कलेक्टर कोषालय द्वारा दिनांक 5 मार्च 2025 को जांच प्रतिवेदन दे दिया गया था। इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट में लिखा है कि, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की शिक्षिका प्रारू रावत, ग्राम बड़दा विकासखंड डही द्वारा वित्तीय वर्ष 2022-23 तक विभिन्न मदों की राशि 18 लाख 81 हजार 620 रुपये स्वयं के बैंक खाते में जमा की। ग्राम गाजगोटा के शिक्षक प्रताप सिंह भिड़े के खाते में 14 लाख 90 हजार रुपए की राशि जमा हुई। ग्राम अराड़ा के शिक्षक भूर सिंह रावत के खाते में 4 लाख 3 हजार दो रुपये जमा हुए। इसी तरह: शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, ग्राम अराड़ा के शिक्षक अशोक कुमार चौंगड़ के खाते में 4 लाख 5 हजार 400 रु की राशि जमा हुई।
भ्रष्टाचार के खिलाफ धार कलेक्टर का साबुन स्लो क्यों है
भ्रष्टाचार की धुलाई के लिए धार्मिक कलेक्टर का साबुन काफी स्लो चल रहा है। जब इंक्वारी में चार शिक्षकों को दोषी पाया गया है तो सस्पेंड करने में एक साल का समय क्यों लगा दिया गया। लोकल मीडिया में बताया गया है कि निलंबन करना, भ्रष्टाचार की अपराध की सजा है। जबकि यह जांच की एक प्रक्रिया है। निलंबन कोई सजा नहीं होती बल्कि विभागीय जांच प्रभावित न हो इसलिए एक व्यवस्था होती है। अब आरोप पत्र दिए जाएंगे, सुनवाई होगी और फिर फैसला होगा। जब जांच रिपोर्ट आ जाने के बाद, जो काम दूसरे दिन किया जाना चाहिए था वह काम 1 साल बाद किया गया। तो इस पूरी प्रक्रिया में कितना समय लग जाएगा। इस प्रकार से भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को स्लो कर देना, क्या भ्रष्टाचार नहीं है।

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