Bhopal, Madhya Pradesh, 23 April 2026: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में संचालित एम्स भोपाल में अभी भी मनमानी चल रही है। 21 अगस्त 2025 को जो मेमोरेंडम जारी हुआ था, उसका पालन नहीं किया जा रहा है। Dr Rishu Sinha ने ऑडिट की मांग की है। उनका कहना है कि स्पष्ट होना चाहिए, आदेश का पालन हुआ या नहीं। उल्लेखनीय है कि एम्स भोपाल में काम के घंटे को लेकर बड़ा विवाद बना हुआ है। सिर्फ इतना ही नहीं, एम्स भोपाल में जूनियर डॉक्टर को प्रताड़ित किए जाने के मामले भी सुनाई देते रहते हैं।
Bhopal AIIMS: Audit Demanded Over Resident Doctors’ Duty Hours Violations
दिनांक 21 अगस्त 2025 को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली के शैक्षणिक अनुभाग (Academic Section) ने रेजिडेंट डॉक्टरों के कार्य घंटों (Duty Hours of Resident Doctors) को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) जारी किया गया था। इसमें रेजिडेंट डॉक्टरों के स्वास्थ्य और कार्यक्षमता को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार की रेजिडेंसी योजना के तहत निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन किए जाने हेतु लिखा गया था। हमने इस बारे में एम्स भोपाल से पूछा था कि, इस आदेश में क्या कोई अपडेट हुआ है। एम्स भोपाल के जनसंपर्क अधिकारी ने कोई उत्तर नहीं दिया। अतः यह माना जाता है कि कोई बदलाव नहीं हुआ है। आज की तारीख में भी यह आदेश प्रभावशाली है।
Key Highlights of AIIMS Duty Rules
संस्थान द्वारा जारी ज्ञापन (No. F. 1-2/Misc/2025-Acad.i) के अनुसार, डॉक्टरों के काम के घंटों को लेकर निम्नलिखित प्रावधान किए गए हैं:
रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए निरंतर सक्रिय ड्यूटी (Continuous active duty) सामान्यतः प्रति दिन 12 घंटे से अधिक नहीं होगी।
Weekly Holiday: कार्य की अत्यावश्यकता को देखते हुए, रेजिडेंट डॉक्टरों को रोटेशन के आधार पर सप्ताह में एक दिन का अवकाश दिया जाएगा।
On-Call Duty: ऑन-कॉल ड्यूटी की अवधि भी एक बार में 12 घंटे से अधिक नहीं होनी चाहिए।
Junior Residents - JR के लिए नियम:
जूनियर रेजिडेंट्स को सामान्यतः सप्ताह में 48 घंटे काम करना होगा। किसी भी स्थिति में उनसे लगातार 12 घंटे से अधिक काम नहीं लिया जाना चाहिए, हालांकि कार्यभार और डॉक्टरों की उपलब्धता के आधार पर इसमें लचीलापन रखा जा सकता है।
HoDs और केंद्रों के प्रमुखों को सख्त निर्देश
रजिस्ट्रार प्रोफेसर गिरिजा प्रसाद रथ (Prof. Girija Prasad Rath) द्वारा हस्ताक्षरित इस आदेश में सभी केंद्रों के प्रमुखों (CoCs) और विभागाध्यक्षों (HoDs) को निर्देश दिया गया है कि वे इन नियमों का पालन करें। इसके साथ ही, विभागों को रेजिडेंट डॉक्टरों के ड्यूटी घंटों के आंकड़े (Statistics of duty hours) बनाए रखने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें शैक्षणिक अनुभाग के साथ साझा करने को कहा गया है।
Demand for Audit of Illegal Long Duty Hours
डॉक्टर रिशु सिन्हा (@drrishu1993) जैसे चिकित्सा विशेषज्ञों ने मांग की है कि इन नियमों का केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर क्रियान्वयन होना चाहिए। उन्होंने 'illegal long duty hours' के ऑडिट की आवश्यकता पर बल दिया है ताकि ड्यूटी घंटों के आंकड़ों में किसी भी प्रकार की हेराफेरी न हो सके।
भोपाल समाचार ने भी इस आदेश की वर्तमान स्थिति और प्रभावशीलता पर स्पष्टीकरण मांगा है। AIIMS की तरफ से अब तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। अतः यह माना जाता है कि एम्स भोपाल में आदेश का पालन नहीं हो रहा है। यहां अभी भी मनमानी जारी है। वैसे भी आदेश में छूट दी गई है की आवश्यकता पड़ने पर जूनियर डॉक्टरों को 12 घंटे से ज्यादा ड्यूटी पर लगाया जा सकता है। लचीलेपन का फायदा उठाया जा रहा है।
AIIMS BHOPAL के रेजिडेंट डॉक्टरों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने की दिशा में बहुत जरूरी है कि, इस आदेश का कड़ाई से पालन किया जाए और किसी भी स्थिति में किसी भी डॉक्टर से 12 घंटे से अधिक काम ना लिया जाए। अब देखना यह है कि क्या सभी विभाग अपनी स्थिति स्पष्ट करते हैं, और क्या मरीज के अटेंडर द्वारा तनाव में कोई गलती कर देने पर हड़ताल करने वाले डॉक्टरों के संगठन मैनेजमेंट के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत कर पाते हैं।

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