Legal knowledge - सोनम बेवफा थी तो फिर उसको जमानत कैसे मिली, कोर्ट में वकील की कौन सी दलील काम आ गई, पढ़िए

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 30 अप्रैल 2026
: इंदौर के युवा कारोबारी राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान हत्या के मामले में गिरफ्तार की गई उसकी पत्नी सोनम रघुवंशी को कोर्ट से जमानत मिल गई है। इस मामले में लोग अपनी भावनाओं के आधार पर प्रतिक्रियाएं व्यक्त कर रहे हैं, और यह साबित कर रहे हैं कि उन्हें कानून की जानकारी नहीं है। इसलिए हम आपके यहां पर कानून की वह जानकारी दे रहे हैं जिसके आधार पर आप अपनी मजबूत प्रतिक्रिया बना पाएंगे, जिसके कारण सोसाइटी में आपकी वैल्यू भी बढ़ेगी। 

Sonam Case: If She Was “Disloyal”, How Did She Get Bail? Lawyer’s Key Argument in Court Explained

सोनम बेवफा की कहानी सबको पता है, फ्लैशबैक की भी जरूरत नहीं है। मुद्दे की बात यह है कि पिछले 320 दिनों से सोनम जेल में थी और पिछले 7 महीना में उसने चार बार जमानत याचिका दाखिल की थी परंतु हर बार उसकी जमानत निरस्त कर दी जाती थी। इस बार वकील ने जो दलील दी, उसके कारण सोनम को जमानत मिल गई। बस यही पॉइंट समझने वाला है। आप इसको अच्छा भी कह सकते हैं और बुरा भी कह सकते हैं, यह आपके ऊपर है कि आप कानून की इस व्यवस्था को किस प्रकार से देखते हैं परंतु कानून ऐसा ही है। आप चाहते हैं कि बदलना चाहिए तो फिर आवाज उठाइए, और यदि चाहते हैं कि कानून ऐसा ही रहना चाहिए तो भी अपनी प्रतिक्रिया दीजिए ताकि इस कानून के समर्थन का भी पता चल सके। 

पहली बार वकील ने कहा कि सोनम के खिलाफ हत्या का कोई सबूत नहीं है इसलिए जमानत दे दी जानी चाहिए परंतु कोर्ट ने रिजेक्ट कर दी। 

फिर वकील ने कहा कि राज कुशवाहा जिसको पुलिस ने सोनम का बॉयफ्रेंड बताया है। वह दरअसल सोनम रघुवंशी का मुंह बोला भाई है। इसके समर्थन में फैक्ट्री की कर्मचारी प्रियांशी जैन को कोर्ट में पेश किया गया है प्रियांशी ने कहा कि,  दोनों के बीच भाई-बहन जैसा रिश्ता था। सोनम उसे राखी बांधती थी और राज उसे 'दीदी' कहता था। इससे 'प्रेम प्रसंग' की थ्योरी को कमजोर करने की कोशिश की गई। इसके अलावा भी कई दलील दी गई लेकिन कोर्ट ने सब कुछ रिजेक्ट कर दिया। मतलब ऐसा लग रहा था जैसे सोनम रघुवंशी के पक्ष में जो कुछ भी कहा जा सकता था, सब कुछ हो गया है अब सोनम रघुवंशी के वकील के पास कोई दलील नहीं बची है। 

फिर सोनम के वकील ने गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई में जो लापरवाही हुई है उसको मुद्दा बनाकर जमानत की मांग की। कोर्ट को बताया कि, 7 जून 2025 को गाजीपुर से गिरफ्तारी के समय सोनम को 'गिरफ्तारी की ठोस वजह' नहीं बताई गई थी, जो संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। 
  • गिरफ्तारी के समय भरे फॉर्म में चेक बॉक्स खाली थे। यह स्पष्ट नहीं था कि किन धाराओं में हिरासत में लिया गया।
  • केस डायरी और गिरफ्तारी के कागजों में अंतर मिला। मामला धारा 103(1) का था, लेकिन कई दस्तावेजों में 403(1) दर्ज था।
  • रिकॉर्ड में कोई प्रमाण नहीं मिला कि गाजीपुर में पहली पेशी के दौरान सोनम के पास वकील था या नहीं था।
  • वकील ने कहा कि 10 फरवरी 2026 को सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल हुई, जिसमें दो आरोपियों के नाम हटाए गए। अब सुनवाई और आरोप तय करने की प्रक्रिया नए सिरे से होगी, जिससे ट्रायल लंबा खिंचेगा।
  • वकील ने कहा कि सोनम इंदौर के बड़े कारोबारी परिवार से हैं। उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, इसलिए फरार होने का खतरा नहीं है। 

लास्ट के दोनों पॉइंट इस बार काम आ गए। पुलिस की तरफ से इन्वेस्टिगेशन पूरी हो चुकी है। अब ऐसी कोई संभावना नहीं है कि सोनम रघुवंशी या उसका परिवार पुलिस की इन्वेस्टीगेशन को प्रभावित कर सकते हैं। और फिर सोनम रघुवंशी का कोई पुराना क्राइम रिकॉर्ड भी नहीं है। परिवार इंदौर का प्रतिष्ठित कारोबारी परिवार है। इसलिए सोनम रघुवंशी के फरार हो जाने की संभावना बहुत कम है। और सबसे बड़ी बात 90 गवाहों के बयान होने हैं। इसमें काफी समय लगेगा। जबकि भारतीय न्याय व्यवस्था में 'दोष सिद्ध होने तक निर्दोष' माने जाने की मान्यता है। इस हिसाब से सोनम रघुवंशी को जेल में रखना अनुचित है। 

इसलिए कोर्ट ने सोनम रघुवंशी को जमानत तो दे दी लेकिन एक शर्त भी रखी है कि, सोनम रघुवंशी को किसी भी कोर्ट पेशी भी पर उपस्थिति से माफी नहीं मिलेगी और सोनम रघुवंशी इंदौर वापस नहीं जाएगी, बल्कि मेघालय में रहेगी।
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