REELs वाली साध्वी का कैंपेन शुरू, सन्यास लिया लेकिन मेकअप और कैमरा नहीं त्यागा

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 24 अप्रैल 2026
: कॉर्पोरेट कंपनियों के इवेंट्स में एंकरिंग करने वाली हर्षा रिछारिया, सन्यास धारण कर चुकी है। उन्होंने अपना नया नाम साध्वी हर्षानंद गिरी घोषित किया है। उनके संन्यास संस्कार का कार्यक्रम भी अपने आप में कंट्रोवर्सी बन गया है लेकिन साध्वी हर्षानंद का कैंपेन शुरू हो गया है। मजे की बात यह है कि उन्होंने पिंडदान करके सार्वजनिक जीवन से संन्यास तो ले लिया है लेकिन वीडियो कैमरा और मेकअप का त्याग नहीं किया है। 

‘Reels’ Sadhvi Launches Campaign, Debate Over Sanyas and Modern Lifestyle Continues

हर्षा रिछारिया अपना नाम बदलकर साध्वी हर्षानंद गिरी कर दिया है। उनके 17 लाख फॉलोअर्स में से बहुत सारे ऐसे हैं जो इवेंट की हॉट एंड ब्यूटीफुल एंकर हर्षा रिछारिया को फॉलो करते थे। उनको पता ही नहीं चला कि कब उनकी खूबसूरत मॉडल सन्यासन हो गई। हर्षा रिछारिया ने सबसे पहले उनके संन्यास पर सवाल उठाने वालों को जवाब दिया। मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद ने हर्षा रिछारिया को संत मानने से इनकार कर दिया है। इस दौरान संत समाज का कहना है कि, संन्यास से पहले तपस्या और ब्रह्मचर्य इत्यादि की परीक्षा ली जाती है। हर्षा रिछारिया सार्वजनिक जीवन में थी और अचानक सन्यास धारण कर लिया। ऐसा नहीं होता। प्रोबेशन पीरियड पूरा करना चाहिए था। कुछ संतों का कहना है कि संन्यास धारण करते समय केशदान करने पड़ते हैं। हर्षा रिछारिया की मुंडन नहीं करवाया, इसलिए उसका सन्यास स्वीकार नहीं है। 

राधा कृष्ण का उदाहरण देने वाली मोनालिसा का विरोध कर करने वाली हर्षा रिछारिया ने भी अपने समर्थन में मीरा और बुद्ध का उदाहरण दिया। 

हर्षा रिछारिया सन्यासन नहीं साध्वी लुक में नजर आ रही है

आचार्य तन्मय वेदका दातार ने कहा- हर्षा का संन्यास जल्दबाजी में कराया गया। इसमें कई पारंपरिक नियमों का पालन नहीं हुआ। आचार्य के अनुसार, संन्यास लेने से पहले 17 प्रकार के पिंडदान किए जाते हैं। इनमें माता-पिता के साथ स्वयं का भी पिंडदान शामिल होता है। इस प्रक्रिया में मुंडन कराना अनिवार्य होता है, लेकिन हर्षा का संन्यास बिना बाल कटवाए ही करा दिया गया। संन्यास लेने के बाद भी हर्षा आम युवतियों की तरह मेकअप और आभूषणों के साथ नजर आ रही हैं, जबकि संन्यास परंपरा में इसका उपयोग वर्जित माना जाता है। वह अभी भी पारंपरिक साध्वी स्वरूप या संन्यासी वेशभूषा में नजर नहीं आई हैं। 

REELs वाली दुनिया में सुहागन लुक, ट्रेडिशनल लुक, हॉट लुक, बोल्ड लुक, बहन जी लुक ऐसे बहुत सारे लुक होने लगे हैं। इसका मतलब होता है कि एक व्यक्ति इस तरह का फैशन करता है कि वह बिल्कुल वैसा दिखाई देने लगता है जैसा वह चाहता है। इस फॉर्मेट में बोले तो हर्षा रिछारिया आजकल साध्वी लुक में नजर आ रही है। ध्यान साधना, जब तक और मोक्ष के मार्ग के स्थान पर, बैक टू बैक REELs वायरल की जा रही है।

हर्षा रिछारिया ने संन्यास क्यों लिया, साध्वी हर्षानंद की कहानी

हर्षा रिछारिया ने खुद कुछ नहीं बताया है लेकिन परिस्थितियों जो कहानी बता रही हैं वह बड़ी मजेदार है। दरअसल, कॉर्पोरेट कंपनियों के इवेंट्स में एंकरिंग करने के पैसे तो अच्छे मिलते हैं लेकिन रेगुलर काम नहीं मिलता। हर्षा रिछारिया को शुरू में अच्छा काम मिला लेकिन फिर दूसरी ब्यूटीफुल एंकर्स ने हर्षा रिछारिया को रिप्लेस कर दिया। लाइफ की इसी प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए हर्षा रिछारिया, संतों की शरण में गई थी। यही से इलाहाबाद महाकुंभ चली गई और वायरल हो गई। हर्षा रिछारिया अपने प्रोफेशन में वापस जाना चाहती थी इसलिए उसने महाकुंभ के समय खुद को कभी भी साध्वी नहीं कहा। वह डिसाइड नहीं कर पा रही थी कि उसको क्या करना चाहिए। एक बात पक्की थी कि वह पैसा कमाना चाहती थी। संत समाज ने उसको स्वीकार नहीं किया तो हर्षा रिछारिया ने बगावत का ऐलान कर दिया। 

शायद उसकी एजेंसियों ने भी उसको काम देने से मना कर दिया। अब हर्षा रिछारिया के पास कोई रास्ता ना था। इधर धार्मिक आयोजनों का प्रचार प्रसार करने के लिए एक मॉडल की कमी थी। हर्षा रिछारिया नहीं यहां पर एक करियर ऑपच्यरुनिटी देखी और संन्यास का एक इवेंट करके संत समाज को ज्वाइन कर लिया। हर्षा रिछारिया ने धार्मिक कार्यक्रमों के लिए मॉडलिंग करना शुरू कर दिया है।
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