भोपाल समाचार, 20 अप्रैल 2026: मध्य प्रदेश में लगभग 10 लाख दैनिक वेतन भोगी और आउटसोर्स कर्मचारी को एक दमदार नेता की तलाश है। वैसे तो इन कर्मचारियों के लिए एक दर्जन से ज्यादा संगठन है परंतु या तो कमजोर हैं या फिर पदाधिकारी द्वारा दलाली की जा रही है। कर्मचारियों के हित के नाम पर प्रदर्शन किए जाते हैं और फिर सरकार के साथ सौदेबाजी हो रही है। कर्मचारियों को कोई ऐसे नेता की जरूरत है, जो न्याय और निर्णय तक संघर्ष करें।
Madhya Pradesh: 10 Lakh Outsourced and Daily Wage Workers Look for a Strong Leader
हाल ही में हाई कोर्ट आफ मध्य प्रदेश द्वारा सरकारी विभागों में वर्षों से कार्यरत संविदा, आउटसोर्स और अंशकालिक कर्मचारियों को लेकर बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि 10 साल से अधिक समय से काम कर रहे कर्मचारियों को स्थाई श्रेणी में रखने के लाभ से वंचित करने का कोई ठोस आधार नहीं है। साथ ही, इन्हें न्यूनतम वेतनमान देने के निर्देश भी दिए गए हैं। मध्य प्रदेश में इस प्रकार के कर्मचारियों की संख्या 5 लाख से अधिक है लेकिन एक भी संगठन ऐसा नहीं है जो 50000 कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता हो।
कांग्रेस और कांग्रेस पार्टी के नेताओं से जुड़े हुए कर्मचारी संगठनों से उम्मीद नहीं की जा सकती। क्योंकि वह चाहते हैं कि कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता रहे। जब कर्मचारियों में सरकार के खिलाफ आक्रोश बढ़ेगा तभी तो कांग्रेस को वोट मिलेगा और कांग्रेस की सरकार बनेगी। कांग्रेस की सरकार बनने के बाद भी कर्मचारियों की समस्या हल कर दी जाएगी इसकी कोई गारंटी नहीं है। 2018 के विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी ने घोषणाओं के पूरा होने की तारीख घोषित की थी। सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा की घोषणाएं 5 साल के लिए होती हैं। 4 साल बाद बात करेंगे। अतिथि विद्वान लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री श्री जीतू पटवारी उनसे मिलने तक नहीं आए जबकि चुनाव से पहले कहा था कि सरकार बनते ही नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करेंगे।
कुल मिलाकर कर्मचारियों को किसी पार्टी का नहीं बल्कि अपना नेता चाहिए। जब तक कोई ठीक प्रकार का नेता, सक्रिय नहीं होगा तब तक हालत यही बने रहेंगे और मध्य प्रदेश के कर्मचारी का वेतन हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों की तुलना में कम बना रहेगा।

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