भोपाल, 20 अप्रैल 2026: पुलिस इन्वेस्टिगेशन में गड़बड़ी के कारण हत्या का एक आरोपी मात्र 11 महीने में जेल से रिहा हो गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री मनोज कुमार श्रीवास्तव ने अपने आदेश में स्पष्ट लिखा कि सबूत की कमी के कारण आरोपी को दोष मुक्त किया जाता है।
Bhopal Case Controversy: How a Murder Accused Got Released Within 11 Months
भोपाल के भीम नगर में 25 मार्च 2025 की रात दोस्त सगे भाइयों विवेक और ओमकार गिरी में विवाद हो गया था। इसी विवाद के चलते ओमकार ने अपने भाई विवेक की चाकू मार के हत्या कर दी थी। अरेरा हिल्स थाना पुलिस ने मामले की इन्वेस्टीगेशन की थी। जांच के दौरान पुलिस ने कई ऐसी गड़बड़ी की जिसके कारण आरोपी को सजा नहीं मिल पाई। कोर्ट ने बताया कि, FSL रिपोर्ट में आरोपी की टी-शर्ट पर मानव रक्त बताया गया है, लेकिन जब्ती के वीडियो में कपड़ों पर खून के निशान नहीं दिखे। इस विरोधाभास ने कोर्ट में संदेह पैदा किया।
आरोपी के नाखूनों में खून मिला, लेकिन उससे संबंधित कोई डीएनए रिपोर्ट पेश नहीं की गई। इससे यह साबित नहीं हो सका कि खून मृतक का ही था।
पुलिस ने जब्त चाकू की लंबाई 19 सेंटीमीटर बताई, जबकि डॉक्टर की रिपोर्ट में 21 सेंटीमीटर का चाकू दर्शाया गया। दोनों में अंतर होने से विश्वसनीयता पर सवाल उठे।
इस प्रकार पुलिस इन्वेस्टिगेशन में हुई लापरवाही अथवा जानबूझकर की गई गड़बड़ी के कारण हत्या के एक आरोपी को सजा नहीं दी जा सकी। पर्याप्त सबूत के अभाव में उसको जेल से रिहा करना पड़ा। वैसे इस मामले में पुलिस की इन्वेस्टीगेशन और कार्रवाई काफी तेज थी। हत्या के केवल 11 महीने में कोर्ट का फैसला आ गया।

.webp)