गुना, 8 जून 2026: जिला अस्पताल में 10 बच्चों के भर्ती होने के बाद मामला सामने आया कि इंदौर की तरह गुना में भी दूषित पानी सप्लाई किया गया, लेकिन जैसे ही सीनियर डॉक्टर ने कहा कि सब बच्चे खतरे के बाहर हैं, जल जीवन मिशन के अधिकारी मामले की लीपापोती करने में लग गए, ताकि मीडिया ट्रायल को रोका जा सके, जिसके कारण पूरे कांड की पोल खुल सकती है।
डॉ. पीएन धाकड़ का बयान
ज़िला अस्पताल के अधिकारी डॉ. पीएन धाकड़ ने आज सुबह बयान दिया कि, "हमें पता चला है कि कुछ बच्चों को उल्टी और दस्त की शिकायत के बाद भर्ती कराया गया। सभी बच्चे अभी ठीक हैं। कोई भी गंभीर मामला नहीं है। लक्षणों में उल्टी, दस्त, पीलिया के कुछ मामले और पेट दर्द शामिल हैं... हालांकि जांच में अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन मामले की जांच कर रहा है और पानी की जांच के आदेश दिए गए हैं... यहां लगभग 10 बच्चों को भर्ती कराया गया है। उनकी उम्र लगभग 5 से 11 साल के बीच है।"#WATCH | Guna, Madhya Pradesh: Over a dozen children admitted to district hospital, suspected due to contaminated water. Administration collects samples for testing.
— ANI MP/CG/Rajasthan (@ANI_MP_CG_RJ) June 8, 2026
District Hospital Officer, Dr PN Dhakad, says, “It has come to our notice that some children were admitted… pic.twitter.com/dfeIgvrtWj
जल जीवन मिशन गुना के चीफ़ ऑफ़िसर संचित ढेमरी का बयान
जल जीवन मिशन गुना के चीफ़ ऑफ़िसर संचित ढेमरी कहते हैं, "आज मेरे ध्यान में वार्ड 9 और 10 का मामला आया, जिसमें दूषित पानी पीने से कुछ बच्चे बीमार पड़ गए और उन्हें ज़िला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जैसे ही मुझे यह जानकारी मिली, मैंने उस इलाके से सैंपल लेने के लिए एक टीम भेजी। कल सुबह 7 बजे जब पानी की सप्लाई फिर से शुरू होगी, तो हम और सैंपल लेंगे। आज लिए गए सैंपल साफ़ और बिना गंध वाले लग रहे हैं, लेकिन फिर भी उन्हें डिटेल जांच के लिए पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग (PHE) लैब भेजा जाएगा। प्रभावित इलाके में पानी सप्लाई करने वाला टैंक कम से कम 6 वार्डों में पानी पहुंचाता है। हमें परसों तक रिपोर्ट मिल जाएगी।"#WATCH | Guna, Madhya Pradesh: Over a dozen children admitted to district hospital, suspected due to contaminated water. Administration collects samples for testing.
— ANI MP/CG/Rajasthan (@ANI_MP_CG_RJ) June 8, 2026
Chief Officer, Jal Jeevan Mission Guna, Sanchit Dhemri, says, “Today, the issue regarding Wards 9 and 10 came to… pic.twitter.com/h0Hu7vAoDW
कुछ ध्यान देने वाली बातें
कल डॉक्टर्स ने मरीजों के परिजनों से कहा था कि यह दूषित पानी के कारण हुआ है। जैसा इंदौर में हुआ था लेकिन जैसे ही मीडिया एक्टिव हुई, सब चुप हो गए।
आज जब खतरा टल गया तो ज़िला अस्पताल के अधिकारी डॉ. पीएन धाकड़ ने ऐजेंसी को बुलाकर बयान दिया। हालांकि उनके बयान में सवाल का जवाब नहीं बल्कि कुछ और ही है। वो कह रहे हैं कि "प्रशासन मामले की जांच कर रहा है और पानी की जांच के आदेश दिए गए हैं।" सवाल यह है कि प्रशासन क्या कर रहा है इससे डॉक्टर का क्या लेना देना। डॉक्टर होने के नाते केवल इतना बताना था कि जो लक्षण दिख रहे हैं क्या वो दूषित पानी पीने के कारण हैं या नहीं।
सीनियर डॉक्टर का बयान आते ही जल जीवन मिशन गुना के चीफ़ ऑफ़िसर संचित ढेमरी ने भी तत्काल बयान जारी कर दिया। उन्होंने भी प्रेस के सवालों का सामना नहीं कि बल्कि ऐजेंसी को बुलाकर बयान जारी किया। डॉक्टर ने जैसे ही बताया कि सभी बीमार बच्चे खतरे से बाहर हैं, जल जीवन मिशन के अधिकारी पूरे मामले की लीपापोती में लग गए। सामान्य तौर पर ऐसा तभी होता है कि निर्णय लेने वाले वरिष्ठ अधिकारी भी मामले में शामिल रहे हों। यदि मामले का मीडिया ट्रायल शुरू हो गया तो जिम्मेदार तक पहुंचना पड़ेगा और यदि जिम्मेदार का खुलासा हो गया तो पूरा कांड ही ओपन हो जाएगा।

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