भोपाल, 9 अप्रैल 2026: मध्य प्रदेश की आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगने वाला है। इंदौर के भागीरथपुरा कांड वाले नगरीय विकास एवं आवास विभाग के मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय एक ऐसा कानून बनाने जा रहे हैं, जो प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र की पूरी अर्थव्यवस्था को हिला कर रख देगा।
मप्र कॉलोनी एकीकृत अधिनियम-2026 की तैयारी
श्री कैलाश विजयवर्गीय ‘मप्र कॉलोनी एकीकृत अधिनियम-2026’ लाने की तैयारी में है। इसके लागू होते ही शहर और गांवों में कॉलोनी डेवलपमेंट के नियम एक जैसे हो जाएंगे। नया कानून जहां बिल्डरों के लिए प्रक्रिया आसान करेगा, वहीं दावा है कि अवैध कॉलोनी बनाने वालों के लिए यह कड़ा कानून साबित होगा। नए कानून के तहत बिल्डर एक ही लाइसेंस से गांव और शहर दोनों में काम कर सकेगा। पांच साल की तय अवधि में कॉलोनी विकसित होने के बाद उसे कंप्लीशन सर्टिफिकेट (कार्यपूर्ति प्रमाण-पत्र) भी 45 दिन में मिल जाएगा। इसमें एक दिन की भी देरी होती है तो डीम्ड परमिशन (स्वत: मंजूर) की व्यवस्था लागू मानी जाएगी। अवैध कॉलोनी बनाने पर अभी 7 साल की सजा या दस लाख जुर्माने का नियम है, जिसे बढ़ाकर क्रमश: 10 साल कैद या एक करोड़ जुर्माना (दोनों भी) किया जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी
मप्र कॉलोनी एकीकृत अधिनियम-2026 का प्रजेंटेशन देखने में तो ऐसा लगता है, इससे बढ़िया कुछ हो ही नहीं सकता, जैसी शानदार कॉलोनी इंदौर भोपाल जैसे शहरों में देखने को मिलती है बिल्कुल वैसी ही गांव में मिलेंगी। गांव-गांव डेवलप हो जाएगा, लेकिन ध्यान से देखें तो इस कानून में बड़ी ही चतुराई के साथ ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं से सारे अवसर छीन लिए गए हैं। अब केवल शहरों के करोड़पति कारोबारी ही कॉलोनी बना पाएंगे। नियम इतने कठोर है कि, गांव का सिविल इंजीनियर लड़का, कभी कॉलोनाइजर नहीं बन पाएगा। शहर के इंजीनियर और कारीगर गांव में जाकर काम करेंगे, गांव के लोग केवल मजदूरी करेंगे। सीमेंट कंक्रीट से लेकर बिजली के तार तक सब कुछ शहरों से खरीद कर गांव में लगाया जाएगा। गांव का दुकानदार केवल चाय बचेगा।
होना क्या चाहिए
होना यह चाहिए कि, गांव के इंजीनियरिंग पास युवाओं को सरकार की तरफ से प्रशिक्षण दिया जाए। उनका शहर के बिल्डर की टक्कर का बिल्डर बनाया जाए और फिर अपने-अपने ग्रामीण क्षेत्र का विकास करने भेजा जाए। यह नियम बनाया जाए कि गांव में जो भी निर्माण कार्य होगा उसके लिए सामान की खरीदी उसी ग्रामीण क्षेत्र से होगी और विक्रेता गांव का मूल निवासी होना चाहिए।
कांग्रेस कुछ नहीं करेगी, जनता को आगे आना होगा
इस समाचार के साथ डिस्क्लेमर दे देना जरूरी है कि, इस मामले में कांग्रेस से कोई उम्मीद मत करना। पहली बात तो प्रदेश अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी भी इंदौर के रहने वाले हैं। दूसरी बात मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी, जनता की समस्याओं को हल करने की राजनीति नहीं कर रही है बल्कि कांग्रेस पार्टी के नेता चाहते हैं कि सरकार की नीतियों से पब्लिक परेशान हो जाए, और सरकार के खिलाफ वोट करें। इस प्रकार वह अपने आप सत्ता में आ जाएंगे। यही कारण है कि कांग्रेस मध्य प्रदेश में जनता की हित की लड़ाई नहीं लड़ती, बस फोटो वीडियो के लिए एक दिन का प्रदर्शन करती है।

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