ग्वालियर से बड़ी खबर - व्यापामं घोटाले के बर्खास्त मेडिकल स्टूडेंट्स, बिना परीक्षा दिए डॉक्टर बन गए

Updesh Awasthee
भोपाल, 10 अप्रैल 2026
: ग्वालियर से एक बड़ी खबर आ रही है। पूर्व छात्र संदीप लहारिया ने पत्रकार श्री रामेंद्र सिंह परिहार को बताया है कि, व्यापामं घोटाले के दौरान गलत तरीके से एडमिशन हासिल करने के कारण बर्खास्त कर दिए गए मेडिकल स्टूडेंट्स को बिना परीक्षा दिए MBBS की डिग्री दे दी गई है। इसके बदले में 16-16 लाख रुपए लिए गए हैं। अपने दावे के समर्थन में श्री संदीप लहारिया ने एक ऑडियो भी दिया है और बताया है कि यह ऑडियो रिकॉर्डिंग उनके एवं गजरा राजा चिकित्सा महाविद्यालय के छात्र शाखा प्रभारी प्रशांत चतुर्वेदी की है। 

Gwalior Vyapam Case: Dismissed Students ‘Became Doctors’?

श्री संदीप लहारिया ने छात्र शाखा (यूजी) प्रभारी प्रशांत चतुर्वेदी और उनके सहायक पंकज कुशवाह पर आरोप लगाया है। कहा है कि, व्यापमं कांड में बर्खास्त छात्रों को बिना बहाली, बिना अटेंडेंस और बिना परीक्षा दिए एमबीबीएस की डिग्री दे दी गई। लहारिया ने बताया कि व्यापमं मामले में करीब 150 छात्रों पर एफआईआर दर्ज की गई थी। इनमें से 30 से अधिक एमबीबीएस छात्रों को बर्खास्त किया गया था, जिनमें संदीप लहारिया खुद भी शामिल हैं।

उनका दावा है कि बर्खास्त छात्रों में से किसी को भी अब तक बहाल नहीं किया गया है और न ही किसी नई कमेटी ने राहत दी है। इसके बावजूद कई छात्रों को एमबीबीएस की डिग्री जारी कर दी गई, जो धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है। राज्यपाल के नाम लिखी गई शिकायत में संदीप लहारिया ने आरोप लगाया है कि बर्खास्त छात्रों को गलत तरीके से एमबीबीएस डिग्री जारी की गईं। न तो उन्हें बहाल किया गया और न ही उन्होंने निर्धारित मानक पूरे किए। उनका कहना है कि इस पूरे मामले में छात्र शाखा (यूजी) प्रभारी प्रशांत चतुर्वेदी और उनके सहायक पंकज कुशवाह की भूमिका है। साथ ही मेडिकल कॉलेज प्रशासन और जीवाजी यूनिवर्सिटी के संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी डिग्रियां जारी होने का आरोप लगाया गया है।

ऑडियो में 16 लाख में डिग्री देने की बात 

संदीप लहारिया: 15 दिन में ही कर दिया तुमने लाठी (एक छात्र का कोड नाम) का।
प्रशांत चतुर्वेदी : भैया इन लोगों के काम पेंडिंग थे इसलिए किया।
संदीप लहारियाः लाठी का तुमने नाम भी नहीं लिया था जो पेंडिंग थे वह पांच नाम में यह नाम नहीं था।
प्रशांत चतुर्वेदीः लाठी का नाम नहीं लिया था मैंने, लेकिन अब किया है आकर बोल तो रहा हूं।
संदीप लहारियाः अब तुमको जो करना है करो, मुझसे मत कहना बाद में।
प्रशांत चतुर्वेदीः भाई यह पुराने काम थे जो अब किए हैं।
संदीप लहारियाः लाठी का तुमने नाम भी नहीं लिया था जो पेंडिंग थे वह पांच नाम में यह नाम नहीं था।
प्रशांत चतुर्वेदीः लाठी का नाम नहीं लिया था मैंने, लेकिन अब किया है आकर बोल तो रहा हूं।
संदीप लहारियाः अब तुमको जो करना है करो, मुझसे मत कहना बाद में।
प्रशांत चतुर्वेदीः भाई यह पुराने काम थे जो अब किए हैं।
संदीप लहारियाः तुमने मुझे बताया था कि पांच लोगों के अलावा कोई नहीं है फिर लाठी का कर दिया।
प्रशांत चतुर्वेदी: बता रहा हूं यह पहले के काम थे जो रोक कर रख दिए थे मैंने उस समय।
संदीप लहारियाः ठीक है तुमको जो करना है खूब करो।
प्रशांत चतुर्वेदी: अरे संदीप भाई यह पुराने काम थे नया काम कोई करूंगा नहीं। मैं ऑफिस तक तो जाता नहीं हूं।
संदीप लहारियाः तो ऑफिस नहीं जा रहे घर बैठकर काम करवा रहे हो।
प्रशांत चतुर्वेदीः हां मुझे लगा है कि उसने ही भिजवाए होंगे यह।
संदीप लहारियाः तुम कह रहे हो कि यह अभी का काम है, जबकि यह प्रोविजन भी पुराना है शर्त लगा लो।
प्रशांत चतुर्वेदीः हां तो कह रहा हूं यह पुराना काम है। प्रोविजन ही तो हुआ है उसका।
संदीप लहारियाः तुमने मेरे सामने पांच के अलावा कोई नाम नहीं लिया।
प्रशांत चतुर्वेदी: जिन पांच का नाम लिया उनके मैंने रिजल्ट रुकवा दिए। यह काम अभी किया है।
संदीप लहारियाः लाठी ने 2022 में मेरे साथ एग्जाम दिया है रिजल्ट नहीं निकला है, अभी तुमने काम करा दिया।
प्रशांत चतुर्वेदी: हां तो रिजल्ट निकलवा तो रहा हूं धीरे-धीरे।
संदीप लहारियाः तुमने जिनका नाम नहीं लिया उनके भी काम किए हैं।
प्रशांत चतुर्वेदीः अब जिनके काम लटके रखे थे उनको तो निकालूंगा। नहीं तो मैं फंसा रहूंगा इसमें।
संदीप लहारियाः तुम 16-16 लाख रुपए में काम निपटा रहे हो मुझे पता है।
प्रशांत चतुर्वेदी: मैंने उनको बोला था कि वहां यूनिवर्सिटी में पैसा बहुत लगता है।

निष्कर्ष: इस पूरे घटनाक्रम से एक बात क्लियर हो गई है कि व्यापामं घोटाले में बर्खास्त किए गए मेडिकल स्टूडेंट्स को डिग्री दी जा रही है। काम धीरे-धीरे किया जा रहा है ताकि किसी को पता ना चल पाए और संदीप लहारिया के प्रतिस्पर्धी लाठी का यदि नहीं होता तो, इस बात का किसी को पता भी नहीं चलता। अब जरूरी हो गया है कि, इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और जिन 6 स्टूडेंट्स को डॉक्टर बना दिया गया है, उनकी डिग्री रद्द कर दी जाए।
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