भारत की जनगणना 2027 का पहला चरण आधिकारिक तौर पर 1 अप्रैल, 2026 को शुरू हुआ। इस श्रृंखला की 16वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद से आठवीं जनगणना होने के नाते, यह अभ्यास पैमाने और महत्वाकांक्षा में अभूतपूर्व है: यह दुनिया की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनसंख्या जनगणना है, जिसमें 1.4 अरब से अधिक लोग शामिल हैं।
Digital Census 2027: Laying the Foundation for India’s Next Phase of Development
डिजिटल जनसंख्या जनगणना से आंकड़ों की शुद्धता बढ़ेगी, समय की बचत होगी और कागजी प्रक्रिया कम होने से पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा। जनगणना केवल गिनती नहीं, बल्कि देश के विकास की दिशा तय करने का आधार है। इसी के आंकड़ों पर शिक्षा, स्वास्थ्य, सडक, बिजली, पानी जैसी योजनाएं बनती हैं और संसाधनों का सही वितरण सुनिश्चित होता है। ऐसे में प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह सही और पूर्ण जानकारी देकर इस प्रक्रिया में सहयोग करे, ताकि देश की योजनाए वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बन सकें।
दो-चरणीय संरचना:
भारत की जनगणना 2027 को दो चरणों में आयोजित किया जाएगा।
चरण-I - हाउसलिस्टिंग एवं आवास जनगणना (HLO) की शुरुआत कर दी है, जो डिजिटल डेटा संग्रहण और स्व-गणना की शुरुआत के साथ विश्व की सबसे बड़ी जनगणना प्रक्रिया का आरंभ है पहली बार गणनाकर्त्ता स्मार्टफोन पर मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से डेटा एकत्रित और प्रस्तुत करेंगे।
दूसरा चरण: जनसंख्या गणना
दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा। इसमें लोगों के नाम, उम्र, शिक्षा, लिंग, वैवाहिक स्थिति, व्यवसाय और प्रवास जैसी विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी।
स्व-गणना सुविधा:
नागरिक एक सुरक्षित वेब पोर्टल (se.census.gov.in) के माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं। विवरण जमा करने के बाद सत्यापन हेतु एक सेल्फ-एन्यूमरेशन आईडी (SE ID) उत्पन्न होगी, जिसे गणनाकर्त्ता के दौरे के समय उपयोग किया जाएगा। स्व-गणना सुविधा 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे यह प्रक्रिया देशभर के लोगों के लिये सुलभ बनती है।
कानूनी ढाँचा: जनगणना के दौरान एकत्रित आँकड़े जनगणना अधिनियम, 1948 के अंतर्गत संरक्षित होते हैं, जो व्यक्तिगत जानकारी की कड़ी गोपनीयता सुनिश्चित करता है।
निश्चित रूप से यह डिजिटल जनगणना भारत के लिए एक ‘आईना’ साबित होगी, जिससे देश को अपनी वर्तमान स्थिति सही तरीके से समझने का मौका मिलेगा, न कि पुराने आंकड़ों के आधार पर। इससे आगे की विकास योजनाएँ तय करने में मदद मिलेगी।
लेखक: जनवेद सिंह मौर्य, UMS

