सीएम डॉ मोहन ने कृषि वैज्ञानिकों से कहा: किसानों का भविष्य बदलना है, कुछ बड़ा करके दिखाइए - कृषि मंथन कार्यशाला न्यूज़

Updesh Awasthee
भोपाल, 8 अप्रैल 2026
: मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कृषि वैज्ञानिकों से कहा कि किसानों का भविष्य बदलने है। कुछ ऐसा बड़ा करके दिखाइए कि कृषि को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन बुधवार को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर में कृषि मंथन कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। 

इन विकास कार्यों की दी सौगातें

मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में 23 करोड़ 21 लाख की लागत के विभिन्‍न कार्यों का लोकार्पण कर विकास की सौगाते दी। इनमें प्रमुख रूप से:- 
  • 13 करोड़ रूपये की लागत से बने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्‍वविद्यालय के नवीन प्रशासनिक भवन, 
  • 1.11 करोड़ रूपये लागत के बोहानी गन्‍ना अनुसंधान केन्‍द्र के प्रशासनिक भवन, 
  • 1 करोड़ रूपये लागत के बालाघाट जिले के कृषि महाविद्यालय वारासिवनी के कौशल विकास केन्‍द्र 
  • 1.26 करोड़ रूपये से बने स्‍वचालित तरल जैव उर्वरक उत्‍पादन केन्‍द्र, जबलपुर 
मुख्यमंत्री डॉक्टर यादव ने किसान कल्‍याण तथा कृषि विकास विभाग की 4 करोड़ 92 लाख रूपये से निर्मित 4 इकाइयों का भी लोकार्पण किया गया, इसमें रीवा एवं शहडोल के ज्ञान प्रसार केन्‍द्र शामिल है।

कृषि स्टार्टअप्स के साथ ही हितग्राहियों को हितलाभ का किया वितरण

मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यशाला में भारत सरकार द्वारा वित्‍त पोषित 10 स्टार्टअप्स को 10 करोड़ रूपये से अधिक के स्‍वीकृति आदेश का वितरण किया। साथ ही कृषक अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में उत्‍कृष्‍ट कार्य करने को लेकर पीपीव्‍ही, एफआर ऑथॉरिटी नई दिल्‍ली द्वारा प्रदत्‍त प्रमाण पत्र विश्‍वविद्यालय को प्रदान किया। उन्‍होंने कृषि सखी प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ करने के साथ ही विभिन्‍न विभागों के द्वारा संचालित योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण भी किया।

कृषि मंथन कार्यशाला जबलपुर में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का भाषण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि कल्याण वर्ष में हमें और आगे बढ़ना है। प्रदेश में विकास की अपार संभावनाएं हैं। हमारे मेहनतकश किसानों ने प्रदेश को दलहन उत्पादन में शीर्ष स्थान दिलवाया, यह हमारे लिए गर्व का विषय है। अब हम तिलहन और अन्न सहित हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। प्रदेश के किसान तीसरी फसल भी ले रहे हैं। कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए परंपरागत बीजों के स्थान पर उन्नत किस्म के बीज किसानों को उपलब्ध कराये जाएंगे। इससे हमारी कृषि उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। राज्य सरकार पशुपालन, उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण, आधुनिक यंत्र सभी को साथ जोड़कर किसानों की आय दोगुना करने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक खेती का रकबा बढ़ा है। मध्यप्रदेश, देश में सर्वाधिक प्राकृतिक खेती करने वाला राज्य है। बाबा महाकाल के प्रसाद में रागी के लड्डू तैयार किए जा रहे हैं। राज्य सरकार दूध उत्पादन से किसान की आय बढ़ा रही है। खेती और पशुपालन एक सिक्के के दो पहलु हैं। अभी प्रदेश में 9 प्रतिशत दूध का उत्पादन होता है, इसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में दूध की खपत भी बढ़ेगी और उत्पादन भी बढ़ेगा। शासकीय स्कूलों में पहली कक्षा से 8वीं तक के बच्चों को नि:शुल्क दूध के पैकेट बांटने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार दुग्ध उत्पादन की अलग-अलग योजना पर कार्य कर रही है। प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे वैज्ञानिक नई किस्मों के विकास में पोषकता पर विशेष जोर दे रहे हैं। प्रदेश में गेहूं उत्पादन का रिकॉर्ड बना है। मध्यप्रदेश ने गेहूँ उत्पादन में सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। प्रदेश में गेहूं का उपार्जन 9 अप्रैल से शुरू हो रहा है। किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल का भाव दिया जा रहा है। इसे 2700 रूपए तक पहुंचाने के लिए हम संकल्पित है। प्रदेश के सोयाबीन उत्पादक किसानों को भी भावांतर योजना का लाभ मिला है। अब सरसों की फसल पर भी भावांतर का लाभ किसानों को दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने नदी जोड़ो अभियान की कल्पना की थी। मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। माँ नर्मदा प्रदेश के किसानों के लिए जीवन रेखा है, जो मध्यप्रदेश के साथ गुजरात और राजस्थान को भी जल देती है। माँ नर्मदा खेती से लेकर उद्योग की जरूरतों और हर कंठ की प्यास बुझाती है। मध्यप्रदेश, देश में कृषि क्षेत्र में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाला राज्य बना है। इसमें माँ नर्मदा का विशेष आशीर्वाद शामिल है।

कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. प्रमोद कुमार मिश्रा का बयान

कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. प्रमोद कुमार मिश्रा ने कहा कि कृषि मंथन कार्यशाला में देश-विदेश के कृषि वैज्ञानिक, कृषि स्टार्ट-अप, एफपीओ एवं किसान बंधु शामिल हुए हैं। यह मंच कृषि के क्षेत्र में प्रदेश को नई ऊंचाई प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मध्यप्रदेश अनेक कृषि फसलों में देश में नंबर-1 है। कृषि विश्वविद्यालय ने कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने के लिए गेहूं, सोयाबीन और चना सहित अनेक नई फसलों की किस्में तैयार की हैं। विश्वविद्यालय ने बालाघाट के चिन्नौर चावल और रीवा के सुंदरजा आम के लिए जीआई टैग प्राप्त किए हैं।

CM Dr Mohan Yadav Urges Agri Scientists: “Do Something Big to Transform Farmers’ Future

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर में देश के प्रख्यात कृषि वैज्ञानिकों के साथ सीधा संवाद किया, जिसका मुख्य उद्देश्य कृषि को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित करना और खेत से कारखानों तक उत्पादों की पहुंच सुगम बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि विकास दर को गति देने के लिए क्षेत्रीय अनुकूलता के आधार पर गतिविधियों को सुनिश्चित करने और आधुनिक तकनीकों को किसानों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने के निर्देश दिये।

संवाद में कृषि और कृषि संबद्ध क्षेत्र के विशेषज्ञों ने अनुसंधान और नवाचारों पर सारगर्भित चर्चा की, जिसमें कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसल वैरायटी, प्राकृतिक खेती, खरपतवार नियंत्रण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कृषि में उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया। वैज्ञानिकों ने पशुधन और पशुचारे के प्रबंधन के माध्यम से किसानों की अतिरिक्त आमदनी बढ़ाने के वैज्ञानिक तरीकों पर भी अपने विचार साझा किए। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर उन्नत बीज प्रसंस्करण, औषधीय पौध प्रजाति, खाद्य प्रसंस्करण एवं उन्नत कृषि फसलों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जनजातीय समुदाय के कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य एवं वाद्य यंत्रों से स्वागत किया।
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