भोपाल कोर्ट में एससी एसटी एक्ट के 65% मामलों में फरियादी पलटे, 15% मामले फर्जी निकले

Updesh Awasthee
भोपाल, 22 अप्रैल 2026
: यह बात लगातार दोहराई जाती है कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों के साथ आज भी भेदभाव होता है लेकिन भोपाल कोर्ट का रिकार्ड बताता है कि, भेदभाव नहीं होता बल्कि भेदभाव के झूठे मामले दर्ज होते हैं। 65 प्रतिशत मामले ऐसे हैं जिसमें फरियादी ने कोर्ट में खुद कहा कि उसके साथ कोई भेदभाव नहीं हुआ जबकि 15% मामले झूठे निकले। इस प्रकार 80% मामले गलत पाए गए। 

Bhopal Court Data Reveals 65% SC/ST Act Complainants Turn Hostile, 15% Cases Found False

भोपाल के प्रख्यात पत्रकार श्री अली अख्तर ने जनवरी 2025 से लेकर मार्च 2026 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया है। श्री अख्तर अली की डिटेल रिपोर्ट दैनिक भास्कर में प्रकाशित हुई है। श्री अली ने भोपाल कोर्ट के आंकड़ों की समीक्षा करते हुए बताया है कि जनवरी 2025 से अब तक जितने भी मामलों का फैसला सुनाया गया उसमें से 80% मामलों में आरोपी को बरी कर दिया गया। 65% मामले ऐसे थे जिसमें फरियादी ने कोर्ट में खुद कहा कि उसके साथ कोई जाति आधारित भेदभाव नहीं हुआ है। पुलिस ने एट्रोसिटी एक्ट की धारा गलत लगे हैं जबकि 15% मामले ऐसे हैं जिसमें आरोपी कोर्ट में आखिरी तक लड़ा और जीत गया। साबित हुआ कि उसने जातिगत आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया। उसके खिलाफ फरियादी ने झूठी रिपोर्ट लिखवाई थी। 

श्री अली अख्तर का कहना है कि, अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत मामले इसलिए भी दर्ज करवाए जाते हैं क्योंकि इसमें सरकार की तरफ से मुआवजा मिलता है। हत्या और बलात्कार जैसे मामले में 8.25 लाख रुपए तक मुआवजा मिलता है। यह सत्य थोड़ा कठोर है लेकिन, एक सत्य यह भी है की मारपीट के मामलों में यदि परिवार का कोई अनुपयोगी सदस्य घायल हो जाता है तो, उसकी तत्काल इलाज नहीं करवाया जाता, क्योंकि यदि उसकी मृत्यु हो जाएगी तो 8.25 लाख मुआवजा मिलेगा। बलात्कार के झूठे मामले तो हर रोज सामने आते रहते हैं। 

श्री अली की रिपोर्ट के अनुसार मारपीट और छेड़खानी के मामले में भी 3 लाख तक का मुआवजा मिलता है इसलिए सामान्य मारपीट एवं अनजान व्यक्ति द्वारा की गई छेड़छाड़ के मामले में भी एट्रोसिटी एक्ट लगा दिया जाता है। 

श्री अली का कहना है की सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह नहीं है कि मुआवजा दिया जाता है बल्कि, प्रॉब्लम यह है कि मुआवजे का भुगतान मामला दर्ज होते ही कर दिया जाता है। 50% मुआवजा FIR दर्ज होते ही मिल जाता है। फिर जब कोर्ट में चालान पेश होता है तो 25% मुआवजा मिलता है। इस प्रकार फैसले से पहले ही 75% मुआवजा मिल जाता है। 

Some Cases Are Filed for Compensation Despite No Discrimination

बहुत प्रैक्टिकल बात है और बताने की जरूरत नहीं है कि, 75% मुआवजा प्राप्त करने के बाद यदि फरियादी पलट जाता है तो उसको आरोपी पक्ष की तरफ से भी काफी अच्छा गिफ्ट दिया जाता है। गिफ्ट की कीमत कई बार 75% मुआवजा से ज्यादा होती है। यानी एक बार मामला दर्ज करवाने का बड़ा फायदा होता है। एक तरफ सरकार से मुआवजा मिलता है और दूसरी तरफ आरोपी पक्ष की तरफ से गिफ्ट भी मिलता है। पुलिस भी इसीलिए हर मामले में एट्रोसिटी एक्ट दर्ज कर लेती है क्योंकि, जब फरियादी को मुआवजा मिलता है तो पुलिस अधिकारी को भी इनाम मिलता है। 
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