भोपाल, 21 अप्रैल 2026: एक तरफ लोक सरकारी नौकरी के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं और दूसरी तरफ रिश्वत के लिए सरकारी कर्मचारी, अपनी नौकरी दांव पर लगा रहे हैं। भोपाल में ₹15000 की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किए गए पुलिस अधिकारी को 5 साल जेल की सजा सुनाई गई है। बात सिर्फ इतनी सी नहीं है, इस सजा के आधार पर पुलिस अधिकारी की पेंशन भी खतरे में आ गई है। फैसला विशेष न्यायाधीश राम प्रताप मिश्र ने सुनाया।
Bhopal Court Sentences Corrupt Police Officer to 5 Years in Jail, Pension at Risk
लोकायुक्त पुलिस के मुताबिक मामला 2015 का है। सूखीसेवनिया थाने में पदस्थ तत्कालीन एएसआई ज्ञान सिंह चंदेल ने बरखेड़ा निवासी हिमांशु शर्मा से रिश्वत की मांग की थी। हिमांशु ने लोकायुक्त पुलिस को शिकायत में बताया कि एएसआई ज्ञान सिंह चंदेल ने फोन कर कहा था कि उनके और उनके छोटे भाई के खिलाफ थाने में अज्ञात शिकायत आई है। इसके बाद आरोपी ने मामला दर्ज कर एफआईआर करने की धमकी देते हुए 15 हजार रुपए और एक कूलर देने की मांग की।
एएसआई ने यह भी नहीं बताया कि किसने और क्या शिकायत की है। लगातार रिश्वत का दबाव पड़ने पर हिमांशु ने लोकायुक्त पुलिस से शिकायत की, जिसके बाद ट्रैप की कार्रवाई में मामला दर्ज हुआ। सुनवाई के दौरान कोर्ट में प्रस्तुत साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर आरोपी को दोषी पाया गया। प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक विवेक गौड़ ने पैरवी की।
18 मई 2015 को रिश्वत लेते लोकायुक्त ने किया था ट्रैप
कोर्ट में सामने आया कि एएसआई लगातार पीड़ित को फोन कर थाने बुलाता था और एफआईआर दर्ज करने की धमकी देता था। वह रिश्वत की मांग भी लगातार कर रहा था। हिमांशु की शिकायत के बाद लोकायुक्त पुलिस ने 18 मई 2015 को उन्हें उसे रिश्वत देने के लिए भेजा। इस दौरान एएसआई रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा गया। लोकायुक्त ने इस मामले में 5 जनवरी 2016 को चालान पेश किया था।

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