भोपाल, 21 अप्रैल 2026: सरकारी यूनिवर्सिटी में विद्यार्थी अच्छे प्रोफेसर्स के कारण पढ़ाई के उद्देश्य से एडमिशन लेते हैं लेकिन जब प्रोफेसर्स ही पॉलिटिक्स करने लगे तो क्या हालत हो जाती है, देखना हो तो भोपाल के बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय को देखिए। इतनी हालत खराब हो गई है कि एडमिशन नहीं मिल रहे हैं। मैनेजमेंट ने सभी प्रवेश द्वार खोल दिए हैं, फिर भी कॉन्फिडेंस नहीं है।
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सब जानते हैं कि बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय केवल बीएएलएलबी, बीएससी एग्रीकल्चर, एमए साइकोलॉजी, एमए योग साइंस जैसे कोर्सेस के कारण संचालित हो रहा है। एमए समाजशास्त्र, एमएससी फिजिक्स, एमएससी इलेक्ट्रॉनिक्स आदि डिपार्टमेंट की हालत इतनी खराब है कि, कोई स्टूडेंट एडमिशन लेना नहीं चाहता। केवल उतने ही एडमिशन होते हैं जितने स्टूडेंट्स को इनके बारे में पता नहीं होता है। नतीजा यूनिवर्सिटी की टोटल सीट में से लगभग 35% सीट खाली रह जाती है। किसी भी कुलपति और प्रोफेसर्स के लिए इससे ज्यादा शर्मनाक क्या होगा, लेकिन पॉलिटिक्स में अंधे मैनेजमेंट के पास आत्मसम्मान कहां होता है। यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने कैंपस में संचालित यूजी-पीजी कोर्सेस की सीटें भरने के लिए नई पहल की है।
मैनेजमेंट की बेशर्मी देखिए
अगले सत्र से विवि उच्च शिक्षा विभाग की सेंट्रलाइज्ड एडमिशन काउंसिल ‘ई-प्रवेश’ में शामिल होगा। यानी बीयू में प्रवेश के तीन माध्यम होंगे। पहला, ई प्रवेश; दूसरा सीयूईटी स्कोर के आधार पर यूनिवर्सिटी लेवल काउंसलिंग और खाली सीट रहने पर 12वीं या स्नातक स्तर के रिजल्ट के आधार पर विवि स्तर पर क्वालिफाइंग राउंड। मैनेजमेंट की बेशर्मी देखिए, मीडिया को यह जानकारी देते हुए मैनेजमेंट ने कहा है कि, मप्र में बीयू ऐसा करने वाला अकेला विवि होगा। जबकि इस प्रकार से वह बता रहे हैं कि, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश का अकेला ऐसा विश्वविद्यालय है जहां पर कोई एडमिशन नहीं लेता। अब हम ऐसे स्टूडेंट्स को भी एडमिशन देंगे, जिनका कोई दूसरा कॉलेज एडमिशन नहीं देता।
शिक्षा के स्तर की किसको पड़ी है, संख्या होनी चाहिए
4 साल पहले 2022 में कुलगुरु के पद पर नायक टाइप एंट्री लेने वाले इंजीनियरिंग कॉलेज उज्जैन के प्रोफेसर डॉ सुरेश कुमार जैन की लीडरशिप में यूनिवर्सिटी की हालत और ज्यादा खराब हो गई है। कुलगुरु प्रो. एसके जैन का कहना है कि तीनों व्यवस्था समन्वय से लागू करेंगे। सीयूईटी वालों के लिए 25% सीटें आरक्षित रहेंगी। इनमें प्रवेश विवि स्तर पर आयोजित काउंसलिंग से और शेष 75% सीटों पर ई-प्रवेश से एडमिशन होगा। खाली सीट पर एक और राउंड विवि स्तर पर होगा। कुलगुरु महोदय की यह प्लानिंग स्पष्ट कर दिए की शिक्षा के स्तर की किसी को नहीं पड़ी है। कुलगुरु जाते हैं कि बस संख्या हो जानी चाहिए।
शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार की जरूरत
शिक्षा के विशेषज्ञों का कहना है, सीयूईटी जैसी परीक्षा के जरिए भी पर्याप्त छात्र बीयू का चयन नहीं कर रहे हैं, तो यह शैक्षणिक गुणवत्ता पर सवाल है। विश्वविद्यालय को शिक्षण, रिसर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर के स्तर पर ठोस सुधार करने होंगे। बीयू के यूटीडी में फिलहाल करीब 52 यूजी और पीजी कोर्स संचालित हो रहे हैं, जिनमें लगभग दो हजार सीटें हैं।

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