मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल है लेकिन भारत की राजधानी दिल्ली की तरह भोपाल भी एक ऐतिहासिक शहर है और इस शहर में कई रहस्य छुपे हुए हैं। इस शहर की अपनी कई खास बातें हैं और भोपाल की अपनी सांस्कृतिक पहचान भी है। शोले फिल्म का वर्ल्ड फेमस "सूरमा भोपाली' किरदार तो आपको याद ही होगा। आज हम आपको मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की 10 खास बातें बताने जा रहे हैं, जिनके बारे में ज्यादातर लोग नहीं जानते:-
लालघाटी के युद्ध की असली कहानी
सोशल मीडिया पर कुछ इनफ्लुएंसर्स ने रानी कमलापति के सुपुत्र को लालघाटी के युद्ध का नायक बताया है। जबकि यह ऐतिहासिक सत्य नहीं है। लालघाटी का युद्ध सन 1715 में जगदीशपुर के युवराज और राजा नरसिंह देवड़ा के पुत्र कुंवर अनिरुद्ध सिंह के बीच लड़ा गया था। यहां भी दोस्त खान ने युवराज अनिरुद्ध सिंह को धोखे से मार दिया था। यहां क्लिक करके लालघाटी के युद्ध की पूरी कहानी पढ़ सकते हैं।
भोपाल में झील नहीं तालाब बनाया गया था
जिस जलाशय को आज भोपाल की बड़ी झील (Upper Lake) कहा जाता है। उसको पहले भोपाल का तालाब कहा जाता था। यह एशिया की सबसे पुरानी मानव निर्मित जल संरचना है। कहते थे कि यह तालाब इतना बड़ा था, कि अंतरिक्ष से भी दिखाई देता था। इस तालाब की शुरुआत वहां से होती थी जहां आज भोजपुर मंदिर है। और आज जहां भोपाल शहर है, वह पूरी जमीन तालाब के अंदर थी। झील और तालाब में बड़ा अंतर होता है। हालांकि दोनों के अंदर पानी स्टोर होता है लेकिन झील एक प्राकृतिक जल संरचना होती है, जो सामान्य तौर पर पहाड़ों के बीच में पाई जाती है। जबकि तालाब एक मानव निर्मित जल संरचना होती है। कुछ सालों पहले किसी शरारती तत्वों ने भोपाल के तालाब के किनारे Lake of Bhopal लिख दिया। तब से तालाब को झील कहा जाने लगा।
भोपाल में दो प्रकार के मुसलमान
भोपाल की संस्कृति अपने आप में अनोखी है। सन 1700 के पहले से यहां पर हिंदू और मुसलमान एक साथ रहते आ रहे हैं और दोनों के बीच तनाव नहीं बल्कि प्रेम है। दोनों समुदाय एक दूसरे के त्यौहार मनाते हैं लेकिन फिर कभी-कभी तनाव होता है क्योंकि भोपाल के नवाब और मूल रूप से गद्दार दोस्त खान, उसके परिवार और रिश्तेदार, भोपाल के मूल मुसलमान और हिंदुओं से नफरत करते हैं। आज भी उनको अपना गुलाम मानते हैं। यही कारण है कि भारत की आजादी के बाद भोपाल की आजादी के आंदोलन में भोपाल के मूल मुसलमान और हिंदू, एक साथ लड़े थे जबकि नवाब, भोपाल को पाकिस्तान में मिलाना चाहता था। गद्दार दोस्त खान के रिश्तेदार आज भी भोपाल में रहते हैं और भारत का नहीं बल्कि पाकिस्तान और इस्लाम का झंडा लहराते हैं।
भोपाल में कला और संस्कृति
'भारत भवन' यहाँ का प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र है, जहाँ कला, संगीत और साहित्य का अद्भुत संगम होता है। इसके अलावा, 'जनजातीय संग्रहालय' (Tribal Museum) मध्य प्रदेश की समृद्ध आदिवासी संस्कृति को बहुत ही खूबसूरती से दर्शाता है। Tribal Museum की तारीफ शब्दों में नहीं की जा सकती, किसी फोटो या वीडियो से भी नहीं समझ सकते। इसका तो केवल अनुभव किया जा सकता है और यकीन मानिए, एक बार यदि आप ट्राइबल म्यूजियम चले गए तो आप भी बोलेंगे कि यह आपके जीवन का सबसे यादगार सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र है।
भीमबेटका और सांची:
'सांची का स्तूप' (बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र) तो आप जानते ही होंगे लेकिन यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल 'भीमबेटका की गुफाओं' के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मतलब लोगों को यह पता है कि यह कोई प्राचीन क्षेत्र है। कुछ लोग उसे महाभारत के भी की बैठक के रूप में जानते हैं और इसलिए दर्शन हेतु चले जाते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इन गुफाओं में प्रागैतिहासिक काल की रॉक पेंटिंग्स देखने को मिलती हैं। मतलब लगभग 30 लाख साल पहले इंसान इन गुफाओं में रहते थे और यहां गुफाओं की दीवार पर उन्होंने चित्र बनाए। अब कल्पना कीजिए पत्थर पर बनाया गया कोई चित्र 30 लाख साल से वैसा का वैसा है।
भारत में प्रागैतिहासिक काल का केवल यही एक मात्र जीवित प्रमाण है। इसके अलावा मेहरगढ़ (बलूचिस्तान) और हड़प्पा पाकिस्तान में है।
हस्तशिल्प और बटुए: भोपाल के 'ज़री-ज़रदोजी' का काम और पारंपरिक 'भोपाली बटुए' पूरी दुनिया में निर्यात किए जाते हैं। यहाँ की हस्तशिल्प कला सदियों पुरानी है।
7 पहाड़ियों पर बसा शहर: भोपाल सात पहाड़ियों पर बसा हुआ है। इनमें श्यामला हिल्स, ईदगाह हिल्स, अरेरा हिल्स सबसे प्रमुख है। जिसके कारण यहाँ का मौसम और प्राकृतिक दृश्य बहुत ही सुहावने होते हैं।
पुराने और नए शहर का कॉन्ट्रास्ट: भोपाल में “पुराना भोपाल” और “नया भोपाल” दोनों का अनोखा मिश्रण देखने को मिलता है, जहाँ एक तरफ ऐतिहासिक गलियाँ हैं और दूसरी तरफ आधुनिक टाउनशिप। भारत में ऐसे बहुत कम शहर है जहां, पुराना और नया, ना केवल एक साथ जीवित है बल्कि समृद्ध भी है। सामान्य तौर पर शहर के पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर को तोड़कर नया बनाया जाता है लेकिन भोपाल में पुराने को संभाल कर रखा गया है। नया अलग से बना है।
भोपाल की स्थापना: माना जाता है कि इस शहर को 11वीं शताब्दी में परमार राजा भोज ने 'भोजपाल' के नाम से बसाया था। लेकिन यह एक ऐसा झूठा है जिसे राजनीति के कारण इंटरनेट पर लोकप्रिय कर दिया गया है। राजा भोज ने ऐसा कोई शहर नहीं बसाया था। उन्होंने भोजपुर बसाया था जो आज भी अस्तित्व में है। जिस जमीन पर भोपाल शहर बसा हुआ है, राजा भोज के समय वह जमीन, राजा भोज द्वारा बनवाए गए तालाब के अंदर डूबी हुई थी।
सुलेमानी चाय: पुरानी भोपाल की गलियों में मिलने वाली नमक और मलाई वाली सुलेमानी चाय बहुत लोकप्रिय है।

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