भोपाल, 9 मार्च 2026 : मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नमिबिया से लाई गई मादा चीता "ज्वाला" ने आज पांच शावकों को जन्म दिया है। जो लोग Ecological Restoration को समझते हैं उनके लिए यह बहुत बड़ी खबर है क्योंकि इस घटना से प्रमाणित होता है कि मध्य प्रदेश के जंगल, क्लाइमेट चेंज से लड़ने में सक्षम हैं। भारत दुनिया का पहला देश है जहां इंटरकॉन्टिनेंटल चीता ट्रांसलोकेशन हुआ। दुनिया भर के वैज्ञानिक यह देखना चाहते हैं कि प्रोजेक्ट सफल होता है या नहीं और खुशी की बात है के प्रोजेक्ट सफल हो रहा है।
ज्वाला तीसरी बार मां बनी हैं: सीएम डॉ मोहन यादव
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि ज्वाला अब तीसरी बार मां बनी हैं। इन नए शावकों के साथ भारत में जन्मे स्वस्थ चीतों की संख्या 33 हो गई है, और यह भारत की धरती पर 10वीं सफल चीता लिटर (प्रसव) है। इसके साथ ही देश में कुल चीतों की संख्या 53 के पार पहुंच गई है, जो आधा सदी का आंकड़ा पार करने वाला ऐतिहासिक क्षण है।यह उपलब्धि वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भारत की मजबूत प्रतिबद्धता और प्रोजेक्ट चीता की सफलता का जीता-जागता प्रमाण है।Good News from Kuno National Park again...
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) March 9, 2026
Cheetah Jwala has given birth to 5 cubs, marking another major milestone for Project Cheetah. With this, India’s cheetah population has crossed the half-century mark, reaching 53.
A proud moment for wildlife conservation and a strong… pic.twitter.com/UfZz64zpJ6
चीता, प्राकृतिक आपदाओं और अकाल मृत्यु से बचाता है
चीता एक टॉप प्रिडेटर (apex predator) है, जो घास के मैदानों और ओपन फॉरेस्ट में बैलेंस बनाए रखता है। भारत में ये इकोसिस्टम पहले डैमेज हो चुके हैं, चीता वापस लाकर इन्हें रिवाइव किया जा रहा है। प्रोजेक्ट से घास के मैदानों की रेस्टोरेशन होती है, जो कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन (carbon sequestration) बढ़ाती है। यानी क्लाइमेट चेंज से लड़ने में मदद मिलती है। चीता एक फ्लैगशिप स्पीशीज है, जिसके नाम पर पूरे इकोसिस्टम को फंडिंग और ध्यान मिलता है।
भारत दुनिया का पहला देश है जहां इंटरकॉन्टिनेंटल चीता ट्रांसलोकेशन हुआ। चीता को अफ्रीका से प्लेन से लाना, क्वारंटाइन, वेटरनरी केयर, रेडियो कॉलर, मॉनिटरिंग, हेबिटेट रेस्टोरेशन, स्टाफ आदि कुछ भी आसान नहीं था। दुनिया भर के ज्यादातर विशेषज्ञों को लगता था कि यह प्रोजेक्ट फेल हो जाएगा। लोगों में मतभेद केवल इस बात की थी कि, यह प्रोजेक्ट 6 महीने में फेल होगा या 2 साल में?
इस प्रोजेक्ट की सफलता को नेशनल प्राइड और इंटरनेशनल लीडरशिप के तौर पर देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने सबका आभार जताया
CM डॉ यादव ने कहा कि, कूनो नेशनल पार्क में काम करने वाले वेटरनरी डॉक्टरों, फील्ड स्टाफ और सभी संबंधित लोगों की अथक मेहनत, समर्पण और विशेषज्ञता से ही यह संभव हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुआ यह अभियान चीतों को भारत में वापस लाने और उनकी आबादी को स्थिर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ज्वाला और उसके नए शावकों के स्वस्थ रहने और मजबूत होकर दौड़ने की कामना!
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