नई दिल्ली, 11 मार्च 2026 : भारतीय ज्योतिष पर सवाल उठाने वालों के गाल पर यह तमाचा अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी NASA की तरफ से आया है। NASA ने स्पष्ट किया है कि, ग्रहों की मार्गी और वक्री स्थिति होती है। सिर्फ इतना ही नहीं NASA ने यह भी स्पष्ट किया है कि, अंतरिक्ष में क्या बदलाव होता है जब किसी ग्रह को हम वक्री मानने लगते हैं।
When Do Planets Become Direct or Retrograde? Watch It Through a NASA Telescope
NASA ने बिलकुल ताजा उदाहरण दिया है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार दिनांक 10 मार्च 2026 को बृहस्पति ग्रह वक्री से मार्गी हुए। यह परिवर्तन वैज्ञानिकों द्वारा अंतरिक्ष वेधशाला (Space Observatory) से अपनी आंखों से देखा गया। ग्रह के वक्री हो जाने को अंतरिक्ष विज्ञान की भाषा में रेट्रोग्रेड मोशन (Retrograde Motion) कहते हैं। जिस प्रकार ज्योतिष में पृथ्वी से दिखाई देने वाले पूरे आकाश को 12 राशियों में विभाजित किया गया है। NASA के वैज्ञानिक भी इस विभाजन को स्वीकार करते हैं। NASA की लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार (यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं) बृहस्पति ग्रह (Jupiter) मिथुन राशि के तारों के बीच पश्चिम की ओर यात्रा कर रहा था लेकिन अब वापस अपनी सामान्य दिशा में पूर्व की ओर बढ़ना शुरू कर रहा है।
ग्रहों के मार्गी और वक्री का वैज्ञानिक विश्लेषण
कुछ लोग जो स्वयं को ज्योतिषी घोषित करते हैं, सामान्य बातचीत में रहते हैं कि गृह वक्री हो गए यानी की उल्टी चाल चल रहे हैं। जबकि वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं होता। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह केवल नज़रिया का एक भ्रम (trick of perspective) है। जब पृथ्वी अपनी कक्षा में बृहस्पति जैसे बाहरी ग्रहों की तुलना में अधिक तेज़ी से यात्रा करते हुए उन्हें पीछे छोड़ देती है, तो ऐसा प्रतीत होता है कि वह ग्रह स्थिर हो गया है और फिर पीछे की ओर (पश्चिम दिशा में) जा रहा है। बिल्कुल वैसे ही जब हम ट्रेन के अंदर बैठे होते हैं और आउटर पर रेलवे स्टेशन पर दूसरी ट्रेन चलना शुरू कर देती है तो हमको ऐसा लगता है जैसे हमारी ट्रेन चल रही है। जैसे ही पृथ्वी 'अपोजिशन' के बिंदु से आगे निकल जाती है, बृहस्पति अपनी सामान्य मार्गी चाल (Prograde Motion) में लौट आता है।
ग्रहों के मार्गी और वक्री का ज्योतिषीय विश्लेषण
ज्योतिष का आधार है जातक के शरीर पर विभिन्न ग्रहों की परावर्तित किरणों के प्रभाव का विश्लेषण करना। ग्रहों का यही परावर्तित प्रकाश मनुष्य की शारीरिक क्षमता का निर्धारण करता है। विभिन्न प्रकार की आईडियाज आते हैं और माइंडसेट बनता है। एक व्यक्ति जिद्दी और दूसरा समझौता वादी, इन्हीं ग्रहों के परावर्तित प्रकाश के कारण बनता है। जब कोई गृह वक्री हो जाता है, तो उस ग्रह का परावर्तित प्रकाश प्राप्त होना बंद हो जाता है। NASA के वैज्ञानिक विश्लेषण से, यह प्रमाणित हो जाता है। ज्योतिष कहता है कि इसके कारण उस ग्रह की परावर्तित प्रकाश से मिलने वाली ऊर्जा भी समाप्त हो जाती है।
NASA में ग्रहों के वक्री और मार्गी का विश्लेषण कर लिया है तो हम उम्मीद कर सकते हैं कि भविष्य में मनुष्य के जीवन पर परावर्तित प्रकाश के प्रभाव का विश्लेषण भी कर पाएंगे। भारतीय विद्वानों के लिए अब समय है कि, जितना अध्ययन कर लिया गया था उसके आगे बढ़ा जाए, और यह अध्ययन किया जाए कि क्या क्लाइमेट चेंज का मनुष्य के जीवन पर कोई ऐसा असर पड़ेगा जिसका अध्ययन ज्योतिष के अनुसार किया जा सके। रिपोर्ट: आचार्य कमलांश।

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