कलेक्टर ने कटप्पा को बाहुबली बना दिया - श्योपुर स्कूल शिक्षा विभाग का मामला

Updesh Awasthee
श्योपुर, 25 मार्च 2026
: कई बार कटप्पा पर डिपेंडेंसी बाहुबली के लिए खतरनाक साबित हो जाती है। श्योपुर की जिला शिक्षा अधिकारी श्री एम.एल. गर्ग के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। वह हर काम के लिए अपने अधीनस्थ अधिकारी को भेज दिया करते थे। कलेक्टर ने उनके अधीनस्थ अधिकारी को ही जिला शिक्षा अधिकारी पद का प्रभार दे दिया। 

The Collector Turned Kattappa into Baahubali - A Case from the Sheopur School Education Department

इस तरह के उदाहरण बहुत कम सामने आते हैं। यह भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री अर्पित वर्मा की प्रशासनिक दक्षता का उदाहरण है। उन्होंने अपने आदेश में लिखा है,  श्री एम.एल. गर्ग प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी श्योपुर (प्राचार्य, शासकीय कन्या उ.मा.वि. श्योपुर) मैदानी क्षेत्रों, विद्यालयों और दूरस्थ छात्रावासों के नियमित निरीक्षण एवं आकस्मिक भ्रमण करने तथा विभागीय समीक्षा बैठकों एवं अन्य शासकीय कार्यक्रमों में स्वास्थ्य कारणों से उपस्थित नहीं हो पाते हैं। इस कारण से स्वयं श्री गर्ग अधिकांशतः शासकीय दौरा, टी. एल एवं अन्य बैठक में श्री यश जैन सहायक संचालक को अपने प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित रखते हैं। माननीय उच्च न्यायालय खण्डपीठ ग्वालियर में प्रचलित प्रकरणों में भी शासकीय अधिवक्ताओं से सम्पर्क हेतु श्री यश जैन ही उपस्थित रहते हैं। 

चूंकि स्कूल शिक्षा एक महत्वपूर्ण विभाग है, जिसमें शैक्षणिक गुणवत्ता बनाये रखने हेतु सतत् फील्ड मॉनिटरिंग एवं सक्रिय पर्यवेक्षण अत्यन्त आवश्यक है। अतः श्री यश जैन सहायक संचालक को जिला शिक्षा अधिकारी श्योपुर का प्रभार आहरण संवितरण अधिकार सहित सौंपा जाता है। श्री एम.एल. गर्ग को उनकी मूल पदस्थापना प्राचार्य, प्रशासकीय कन्या उ.मा.वि. श्योपुर हेतु कार्यमुक्त किया जाता है। यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा। 

क्या कलेक्टर किसी जिला शिक्षा अधिकारी को बदल सकता है 

इस मामले में सिर्फ एक सवाल से इस रह गया है, क्या कलेक्टर किसी जिला शिक्षा अधिकारी को बदल सकता है। जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर किसको प्रभार देना है और किसको हटाना है, इसका फैसला लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त द्वारा किया जाता है। जिले का कलेक्टर मिशन का प्रमुख जरूर होता है लेकिन कलेक्टर को स्कूलों की छुट्टी करने तक का अधिकार नहीं होता है। जिला शिक्षा अधिकारी का पद, मध्य प्रदेश शासन द्वारा नियंत्रित है। कलेक्टर इस प्रकार की सिफारिश कर सकते हैं लेकिन आदेश जारी नहीं कर सकते। अब देखना यह है कि, एक कलेक्टर के तौर पर श्री अर्पित वर्मा का यह आदेश क्या परिणाम लेकर आता है।

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