प्रधानमंत्री मोदी के संसद में संबोधन की खास बातें - Major Points You Need to Know

Updesh Awasthee
नई दिल्ली, 23 मार्च 2026
: भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज लोकसभा में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे लड़ाई झगड़ों को लेकर बयान दिया। उन्होंने बताया कि भारत में सर्वाइवल का खतरा नहीं है लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई में हमारी मजबूरी क्या है और हमारी भूमिका क्या हो सकती है। हम यहां पर प्रधानमंत्री के संबोधन की खास बातें बता रहे हैं:- 

पश्चिम एशिया संकट पर भारत की कूटनीतिक रणनीति क्या है? 

भारत ने इस संकट पर शुरू से ही एक स्पष्ट और शांतिपूर्ण रुख अपनाया है। भारत का मानना है कि बातचीत और कूटनीति ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है। भारत मानवीय हितों में शांति की आवाज़ उठाता रहा है। भारत के प्रयास तनाव को कम करने और संघर्ष को समाप्त करने पर केंद्रित हैं। प्रधानमंत्री ने क्षेत्र के अधिकांश राष्ट्राध्यक्षों से बात कर उन्हें हिंसा रोकने और शांतिपूर्ण समाधान की ओर बढ़ने का आग्रह किया है। भारत ने नागरिकों, ऊर्जा और परिवहन बुनियादी ढांचे पर हमलों का कड़ा विरोध किया है। Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में वाणिज्यिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भारत निरंतर कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। 

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए? 

सरकार ने प्रभावित देशों में रहने वाले लगभग एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई सक्रिय कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से पश्चिम एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से दो दौर की बातचीत की है, जिन्होंने भारतीयों की सुरक्षा का पूर्ण आश्वासन दिया है। प्रभावित देशों में भारतीय दूतावास 24/7 सहायता प्रदान कर रहे हैं। भारत और विदेशों में इमरजेंसी हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 3,75,000 से अधिक भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं। इसमें अकेले ईरान से आए 1,000 भारतीय शामिल हैं, जिनमें 700 से अधिक चिकित्सा छात्र हैं। घायल भारतीयों के लिए बेहतर चिकित्सा उपचार और शोक संतप्त परिवारों को सहायता दी जा रही है।  खाड़ी देशों के भारतीय स्कूलों में 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या योजना है? 

संकट के आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए सरकार ने एक व्यापक रणनीति तैयार की है। भारत ने तेल आयात के स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक कर दिया है ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो। वर्तमान में भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का भंडार है, जिसे 65 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाने का काम जारी है। एथेनॉल ब्लेंडिंग को 20% तक पहुंचाया गया है, जिससे सालाना करीब 4.5 करोड़ बैरल तेल आयात की बचत हो रही है।

एलपीजी के घरेलू उत्पादन और उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है।

पिछले दशक में 6 नए यूरिया प्लांट शुरू किए गए हैं, जिससे उत्पादन क्षमता में 76 लाख मीट्रिक टन की वृद्धि हुई है। नैनो यूरिया और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि वैश्विक संकट का बोझ किसानों पर न पड़े। इसके लिए उर्वरकों पर सब्सिडी और खरीफ की बुवाई के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गई है।

एक समर्पित अंतर-मंत्रालयी समूह (Inter-Ministerial Group) दैनिक आधार पर आयात-निर्यात श्रृंखला की बाधाओं का आकलन और समाधान कर रहा है। 

Strait of Hormuz में भारतीय जहाजों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा रही है?

Strait of Hormuz में भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार तेल, गैस और उर्वरक ले जाने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए खाड़ी के शिपिंग मार्गों की निरंतर और सतर्क निगरानी कर रही है। इसके साथ ही, वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं के साथ सक्रिय रूप से संपर्क बनाए रखा जा रहा है।

भारत समुद्री गलियारों (maritime corridors) को सुरक्षित रखने के लिए सभी वैश्विक भागीदारों के साथ निरंतर संवाद कर रहा है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया है कि वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में बाधा डालना पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

युद्ध के माहौल के बावजूद, भारत कूटनीति के माध्यम से भारतीय जहाजों के सुरक्षित मार्ग के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए कई भारतीय जहाज हाल के दिनों में सुरक्षित भारत पहुंच गए हैं।

संकट के इस समय में किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए तटीय सुरक्षा (coastal security) सहित सभी सुरक्षा क्षेत्रों को और अधिक मजबूत किया जा रहा है।

चूंकि भारत का एक बड़ा व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति (कच्चा तेल, गैस और उर्वरक) इसी मार्ग पर निर्भर है, इसलिए सरकार की प्राथमिकता इस जलमार्ग को निर्बाध बनाए रखने पर है।

सरकार एक समर्पित अंतर-मंत्रालयी समूह (Inter-Ministerial Group) के माध्यम से दैनिक आधार पर आयात-निर्यात श्रृंखला में आने वाली बाधाओं का आकलन और समाधान भी कर रही है। 

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