दिव्यांग बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ : मध्य प्रदेश में 3200 विशेष शिक्षकों की भर्ती फर्जीवाड़े की भेंट

Updesh Awasthee
विशाल धाकड़, श्योपुर, 28 मार्च 2026
: मध्य प्रदेश में पहली बार विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए आयोजित की जा रही 'विशेष शिक्षक' भर्ती प्रक्रिया विवादों के घेरे में है। एक ओर जहाँ प्रदेश के हजारों दिव्यांग बच्चे अपने हक के विशेषज्ञों का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग की कथित अनदेखी और प्रक्रियात्मक खामियों के चलते इस भर्ती में अपात्र अभ्यर्थियों के शामिल होने का अंदेशा गहरा गया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की सरेआम अवहेलना

माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने रिट पिटीशन 132/ 2016 (रजनीश कुमार पाण्डेय बनाम भारत संघ) में ऐतिहासिक निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि विशेष बच्चों को शिक्षा देना सरकार का संवैधानिक दायित्व है। कोर्ट ने आदेश दिया था कि छात्र-शिक्षक अनुपात के आधार पर नियमित पदों का सृजन कर केवल RCI (भारतीय पुनर्वास परिषद) द्वारा प्रमाणित विशेषज्ञों की ही नियुक्ति की जाए। आरपीडब्ल्यूडी एक्ट 2016 और आरसीआई एक्ट 1992 भी यही कहते हैं कि बिना विशेष योग्यता के कोई भी व्यक्ति दिव्यांग बच्चों को नहीं पढ़ा सकता।

3200 पद, लेकिन 14000 'फर्जी' दावेदार?

हैरानी की बात यह है कि मध्य प्रदेश शासन ने विशेष शिक्षा के लिए लगभग 3200 पद चिन्हित तो किए, लेकिन आवेदन प्रक्रिया में ऐसी खामी छोड़ी कि सामान्य डिप्लोमा धारक हजारों अभ्यर्थियों ने भी 'RCI योग्यता' (कण्डिका 7.7) के कॉलम में 'हाँ' अंकित कर दिया। गौर करने वाली बात यह है कि शिक्षा विभाग द्वारा इन अभ्यर्थियों को अपनी गलती सुधारने के लिए दो बार लिंक ओपन कर सुधार का मौका भी दिया गया था। इसके बावजूद, हजारों सामान्य डिप्लोमाधारियों ने जानबूझकर अपनी गलती नहीं सुधारी और विशेष शिक्षकों के लिए आरक्षित सीटों पर अवैध रूप से दावा ठोक दिया। यदि विभाग चाहता, तो मात्र विशेष योग्यता वाले अभ्यर्थियों से उनका 'CRR (Central Rehabilitation Register) प्रमाण पत्र पोर्टल पर अपलोड कराकर इस विवाद को शुरुआत में ही खत्म कर सकता था, लेकिन विभाग की सुस्ती ने इस फर्जीवाड़े को बढ़ावा दिया है।

अजीब विडंबना: 1300 पात्रों के बीच 14000 दावेदार

आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में वास्तविक रूप से सक्रिय CRR प्रमाण पत्र वाले पात्र अभ्यर्थी मात्र 1300 के आसपास हैं, जबकि फॉर्म भरने वालों की संख्या 14000 के पार पहुँच गई है। यह सीधे तौर पर उन दिव्यांग बच्चों के साथ धोखा है जिन्हें विशेषज्ञ शिक्षण की आवश्यकता है। विभाग द्वारा सामान्य शिक्षकों की भर्ती को प्राथमिकता देना और विशेष शिक्षकों की भर्ती को लटकाए रखना, शासन की मंशा पर सवाल खड़े करता है।

अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें:

1. दस्तावेज सत्यापन (DV) से पहले ही अनिवार्य रूप से RCI/CRR प्रमाण पत्र पोर्टल पर अपलोड कराए जाएं।
2. अपात्र अभ्यर्थियों को तुरंत बाहर कर वास्तविक विशेषज्ञों की चयन सूची जारी हो।
3. सर्वोच्च न्यायालय के 7 मार्च 2025 के नवीनतम आदेश का पालन करते हुए 12 सप्ताह के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण की जाए।

सामान्य भर्ती को प्राथमिकता, विशेष बच्चों की उपेक्षा क्यों?

सालों से प्रतीक्षारत दिव्यांग बच्चों के लिए पहली बार हो रही इस भर्ती को 'संयुक्त भर्ती' का हिस्सा बनाकर इसकी गंभीरता को कम किया जा रहा है। विभाग सामान्य शिक्षकों की भर्ती को तो प्राथमिकता दे रहा है, लेकिन विशेष शिक्षकों की चयन प्रक्रिया को कछुआ चाल से चलाकर सुप्रीम कोर्ट के 12 सप्ताह वाले नवीनतम आदेश (मार्च 2025) की अवहेलना कर रहा है।

एक मानवीय अपील: कौन सुनेगा इन मासूमों की पुकार ?

यह केवल नौकरी की लड़ाई नहीं है, बल्कि उन मूक-बधिर, दृष्टिबाधित और बौद्धिक रूप से दिव्यांग बच्चों के मौलिक अधिकारों की रक्षा का सवाल है। यदि एक सामान्य शिक्षक इन बच्चों को पढ़ाएगा, तो यह उनके विकास के साथ अन्याय होगा। शासन और शिक्षा विभाग की यह उदासीनता न केवल सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी अक्षम्य है।

"हम मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से अपील करते हैं कि इस 'फर्जीवाड़े' को रोकें और वास्तविक विशेष शिक्षकों को नियुक्त कर दिव्यांग बच्चों का भविष्य सुरक्षित करें।" संघर्षरत विशेष शिक्षक अभ्यर्थी, मध्य प्रदेश
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