जबलपुर, 14 मार्च 2026 : मध्य प्रदेश में माध्यमिक (मिडिल स्कूल) विशेष शिक्षकों की भर्ती को लेकर हाई कोर्ट द्वारा एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। माननीय न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकल पीठ ने अर्चना यदुवंशी और अन्य द्वारा दायर याचिका (Writ Petition No. 7505 of 2026) पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। इसमें सरकार को 4 महीने का समय दिया गया है।
MP High Court Deadline Set to Recruit Special Educators Within 4 Months
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से गुहार लगाई थी कि मध्य प्रदेश राज्य में माध्यमिक विशेष शिक्षकों के स्वीकृत 762 पदों पर नियमित नियुक्ति और भर्ती प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। याचिकाकर्ताओं के वकील, श्री आर्यन उर्मलिया ने तर्क दिया कि यह मामला सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के 'रजनीश कुमार पांडेय बनाम भारत संघ' (2021) के ऐतिहासिक फैसले से संबंधित है, जिसमें विशेष शिक्षकों की नियुक्ति के संबंध में बाध्यकारी निर्देश दिए गए थे।
अदालत की कार्यवाही और सरकार का पक्ष सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार की ओर से पेश सरकारी वकील श्री अंशुमन स्वामी ने अदालत को आश्वस्त किया कि याचिकाकर्ताओं के प्रतिवेदन (representation) पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा कानून के अनुसार विचार किया जाएगा और जो भी परिणाम होगा, उससे उन्हें अवगत करा दिया जाएगा।
हाई कोर्ट का फैसला और समय सीमा
दोनों पक्षों को सुनने के बाद, न्यायमूर्ति विशाल धगट ने याचिका को निम्नलिखित निर्देशों के साथ निपटा दिया:
- 15 दिनों की मोहलत: याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे अगले 15 दिनों के भीतर अपने दस्तावेज़ों और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के साथ सक्षम प्राधिकारी के समक्ष एक नया आवेदन (fresh representation) पेश करें।
- सरकार और सक्षम प्राधिकारी को इस आवेदन पर चार महीने के भीतर निष्पक्षता से विचार करना होगा।
- यदि याचिकाकर्ता पात्र पाए जाते हैं, तो उन्हें नियमानुसार लाभ दिया जाए। साथ ही, सरकार को एक 'स्पीकिंग ऑर्डर' (सकारण आदेश) पारित करना होगा, जिसे याचिकाकर्ताओं को सूचित किया जाए।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उसने मामले के मेरिट (गुण-दोष) पर कोई राय व्यक्त नहीं की है और सरकार को कानून के दायरे में रहकर ही आदेश पारित करना है। यह फैसला उन सैकड़ों उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी उम्मीद लेकर आया है जो लंबे समय से विशेष शिक्षक के पदों पर बहाली का इंतज़ार कर रहे हैं।

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