सरकारी लाइसेंस पर काम करने वाले ठेकेदारों के लिए हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Updesh Awasthee
जबलपुर, 24 मार्च 2026
: सरकारी लाइसेंस पर काम करने वाले ठेकेदार एवं अन्य कंपनियों के लिए हाई कोर्ट आफ मध्य प्रदेश ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला दिया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का यह डिसीजन इस प्रकार के विवादों के निपटारे में, पूरे देश में काम आएगा। लाइसेंस देने वाले सरकारी विभागों के अधिकारियों, ठेकेदारों के अलावा अधिवक्ताओं और LLB के विद्यार्थियों के लिए भी यह मामला काफी उपयोगी है। 

Som Distilleries vs Government of Madhya Pradesh

यह विवाद मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी शराब कंपनी Som Distilleries और मध्य प्रदेश शासन के आबकारी विभाग के बीच में था। एक्साइज डिपार्मेंट ऑफ मध्य प्रदेश गवर्नमेंट ने 4 फरवरी 2026 के आदेश से Som Distilleries Pvt. Ltd. और Som Distilleries and Breweries Pvt. Ltd. के कुल 8 लाइसेंस सस्पेंड किए थे। यह कार्रवाई 26 फरवरी 2024 के शो-कॉज नोटिस के आधार पर हुई थी, जिसमें फर्जी परमिट से शराब परिवहन के आरोप थे। इस नोटिस के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करके दोनों कंपनियों ने दलील दी कि नोटिस 2023-24 की अवधि से जुड़ा था और 31 मार्च 2024 को लाइसेंस समाप्त हो चुके थे। नए लाइसेंस जारी होने के बाद पुराने नोटिस के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती। 

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह और शासकीय अधिवक्ता मानस मणि वर्मा ने कहा कि एक्साइज एक्ट के तहत कार्रवाई का अधिकार स्पष्ट है और नियमों का पालन अनिवार्य है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि शराब का कारोबार पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में है। नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस सस्पेंड या रद्द करना कानूनन वैध है। कोर्ट ने कहा कि शो-कॉज नोटिस किसी अवधि तक सीमित नहीं होता। गंभीर आरोप होने पर बाद में भी कार्रवाई संभव है और पुराने उल्लंघन नए लाइसेंस को प्रभावित कर सकते हैं।

जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच ने 32 पन्नों के फैसले में स्पष्ट किया कि शराब का कारोबार, कंपनी का मौलिक अधिकार नहीं है। यदि नियमों का उल्लंघन होता है तो सख्त कार्रवाई को मन नहीं किया जा सकता।फैसले में यह भी कहा गया कि धोखाधड़ी किसी भी कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित करती है। एक बार आरोप साबित होने पर अन्य दलीलें कमजोर हो जाती हैं।

कोर्ट ने कहा कि डिस्टिलिंग, ब्रूइंग और बॉटलिंग जैसी गतिविधियों में गंभीर उल्लंघन होने पर व्यापक कार्रवाई उचित है। यह निर्णय “प्रोपोर्शनैलिटी टेस्ट” पर खरा उतरता है। 

यहां उल्लेख करना उचित होगा कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी अधिकारी के एक भ्रष्टाचार के मामले में स्पष्ट किया है कि अधिकारी की मृत्यु के बाद भी मामला खत्म नहीं किया जा सकता। जब तक की आय से अधिक संपत्ति का हिसाब क्लियर ना हो जाए, तब तक मामला चलता रहेगा और संबंधित संपत्ति का जो भी मलिक होगा उसे मुकदमे का सामना करना होगा। 

High Court Delivers Big Verdict on Contractors Working Under Government Licences

Som Distilleries का मामला भी कुछ ऐसा ही है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि, लाइसेंस के खत्म हो जाने से, लाइसेंस की अवधि में की गई गलतियां या अपराधों का दंड प्रावधान खत्म नहीं होता। यदि कोई गड़बड़ी की है तो उसकी सजा दी जाएगी और इसके कारण नवीन लाइसेंस की स्थिति भी प्रभावित होगी। 

इसका मतलब यह हुआ कि ठेकेदारी के मामले में, यदि किसी ठेकेदार ने निर्माण कार्य में कोई गड़बड़ी की है और गड़बड़ी का पता काम पूरा हो जाने के बाद चलता है तो भी ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट किया जा सकता है या फिर ठेकेदार के नए ठेकों को निलंबित किया जा सकता है।
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