सरकारी खर्चे पर मंत्री जी की प्राइवेट यूनिवर्सिटी का प्रमोशन और फंडिंग

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 6 मार्च 2026 (प्रवीण पीतांबर)
: मध्य प्रदेश में आप सब कुछ खुलेआम होने लगा है। मध्य प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के परिवार से जुड़ी प्राइवेट यूनिवर्सिटी का सरकारी खर्चे पर प्रमोशन किया जा रहा है। भव्य रोजगार मेला का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन के लिए भी प्राइवेट यूनिवर्सिटी को फंडिंग की जाएगी। यानी प्राइवेट यूनिवर्सिटी के नाम का विज्ञापन भी सरकार करेगी और इवेंट के लिए पैसा भी देगी। 

मामला क्या है
सागर जिले में स्थित ज्ञानवीर यूनिवर्सिटी का भव्य उद्घाटन 11 मार्च 2026 को प्रस्तावित है, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। इसके साथ ही एक रोजगार मेला भी आयोजित किया जा रहा है, जहां युवाओं को निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से जुड़ने का मौका मिलेगा। लेकिन यहां विवाद की जड़ है। यूनिवर्सिटी 'ज्ञानवीर सेवा समिति' के तहत चलती है, जिसकी स्थापना और संचालन राजपूत परिवार से जुड़ा हुआ है। चांसलर अदित्य सिंह राजपूत मंत्री के परिवार के सदस्य हैं, और समिति के चेयरपर्सन सविता सिंह राजपूत भी परिवार से हैं। 

Allegations of Government Funds Used to Promote Minister’s Private University

वैसे आप देखेंगे तो कहेंगे कि इसमें क्या गलत है, लेकिन यदि चश्मा उतार कर देखेंगे तो समझ में आएगा कि यह पॉलीटिकल पावर की दुरुपयोग का मामला है। यूनिवर्सिटी के उद्घाटन कार्यक्रम का पैसा सरकार देगी, क्योंकि इसी दिन रोजगार मेला का आयोजन है। यूनिवर्सिटी के उद्घाटन के अवसर पर जो विज्ञापन जारी होंगे, उसका पैसा भी सरकार देगी, क्योंकि रोजगार मेला सरकारी आयोजन है। और रोजगार मेला के विज्ञापन में यूनिवर्सिटी का नाम तो आएगा ही। मतलब मंत्री जी की हींग लगे ना फिटकरी, और रंग चोखा हो जाएगा। 

सागर में जब सरकारी यूनिवर्सिटी है तो प्राइवेट यूनिवर्सिटी में मेला लगाने की क्या जरूरत 

सबसे बड़ा सवाल यही है। सागर में जब डॉक्टर हरि सिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय है। उसके पास बड़ा कैंपस है और यह यूनिवर्सिटी वर्ल्ड फेमस है तो फिर सरकार, एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी में रोजगार मेला लगने क्यों जा रही है। जिस सागर जिले में एंबुलेंस नहीं है। गरीबों को अपनी पत्नी को हाथगाड़ी पर रखकर अस्पताल ले जाना पड़ता है। बजट नहीं होने के कारण लाखा बंजारा झील में स्थापित 'म्यूजिकल फाउंटेन' बंद पड़ा हुआ है। वहां पर एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी के प्रमोशन पर इतना पैसा खर्च करने की क्या जरूरत है। 

यह कार्यक्रम मध्य प्रदेश की राजनीति में नैतिकता और पारदर्शिता पर सवाल उठता है। फिलहाल, उद्घाटन की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन विवाद थमने के आसार नहीं। अब सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम से दूरी बनाएंगे? या यह बुंदेलखंड क्षेत्र में गोविंद सिंह राजपूत को सबसे पॉवरफुल नेता बताने की रणनीति है? समय बताएगा।
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