रिश्वत में डुप्लेक्स लेने वाले अधिकारी कातुलकर के खिलाफ EOW भोपाल में मामला दर्ज, जीशान अली का मामला

Updesh Awasthee
भोपाल, 13 मार्च 2026
: ROYAL HERITAGE BUILDERS COLONISERS INFRASTRUCTURE के डायरेक्टर ZEESHAN ALI के समय का चक्र वक्री हो चुका है। जनवरी 2025 से लेकर अब तक कई मामले दर्ज हो चुके हैं। ताजा मामला EOW BHOPAL द्वारा दर्ज किया गया। इसमें सहकारिता विभाग के डिप्टी ऑडिटर आर के कातुलकर को भी नामजद किया गया है। FIR में लिखा है कि कातुलकर ने रिश्वत में डुप्लेक्स लिया है। 

Fraudulent allocation of land reserved for schools and colleges in Bhopal

बात ऐसी है कि, नरेला शंकरी क्षेत्र की 0.4330 हेक्टेयर जमीन (लगभग 46,600 स्क्वायर फीट) को स्कूल कॉलेज के लिए आरक्षित किया गया था। फिर यह जमीन प्राइम एजुकेशन सोसाइटी के नाम आवंटित कर दी गई। इस समिति की अध्यक्ष निकहत शमीम थी। इनके बेटे का नाम जीशान अली है। बाद में यह जमीन वाटिका गृह निर्माण सहकारी समिति को बेच दी गई। इन्वेस्टिगेशन में पाया गया है कि यह सोसाइटी, जीशान अली के कंट्रोल में थी। इस प्रकार स्कूल कॉलेज के लिए आरक्षित जमीन, एक रेजिडेंशियल सोसायटी के नाम ट्रांसफर हो गई। इस मामले में कई सरकारी और गैर सरकारी लोगों ने जीशान अली का साथ दिया है। 

Duplex as Bribe? Economic Offences Wing Registers Case Against Officer Katulkar in Bhopal

EOW की प्राइमरी इन्वेस्टिगेशन में यह भी पाया गया है कि सहकारिता विभाग के डिप्टी ऑडिटर आर कातुलकर द्वारा पद का दुरुपयोग किया गया और जमीन की गड़बड़ी में जीशान अली का बराबर से साथ दिया। इसके बदले में जीशान अली ने रॉयल रेजिडेंसी कॉलोनी में एक महंगे प्लॉट के ऊपर डुप्लेक्स बनवा कर दिया है। 

ईओडब्ल्यू ने जांच के बाद जीशान अली, नाजनीन अली, आर के कातुलकर, एके तिवारी और रामपाल धौसले सहित अन्य पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 61 (2), 318 (4), 338, 336(3), 340 (2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा के तहत केस दर्ज किया है। अब विभाग इस घोटाले की गहराई तक जाने के लिए आगे की विवेचना कर रहा है। 13(1)(d) 

जीशान अली के खिलाफ EOW में यह दूसरा मामला है। इससे पहले 23 जनवरी 2026 को IPC की धारा 120-B (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 और 471 (जालसाजी) के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में नरेला शंकरी इलाके में पार्क, खुले स्थान, मंदिर और बिजली ट्रांसफार्मर के लिए आरक्षित जमीन को रेजिडेंशियल प्लॉट बनाकर बेचने का आरोप है।
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