भोपाल, 24 मार्च 2026: बिल्डर की यूनियन क्रेडाई वाले इस बार भी भोपाल की कलेक्टर गाइडलाइन से नाराज है। वह हमेशा ऐसे किसी भी नियम से नाराज होते हैं जो, बिल्डर के बिजनेस के लिए हानिकारक हो, फिर भले ही वह जनता के लिए लाभदायक क्यों ना हो।
Bhopal Builders’ Body CREDAI Objects to Collector’s Guidelines Yet Again
इस बार कलेक्टर गाइडलाइन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए क्रेडाई भोपाल ने कहा है कि केवल सर्किल रेट बढ़ाना समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि पूरी वैल्यूएशन फिलॉसफी में सुधार की आवश्यकता है। एक दिन पहले जिला मूल्यांकन समिति ने शहर की कुल 740 लोकेशन पर गाइडलाइन में वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इनमें से कई इलाके ऐसे हैं, जहां पर गाइडलाइन 181 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। वहीं, कुल 63 में से 34 दावे-आपत्ति खारिज कर दिए गए हैं। पंजीयन विभाग ने एक महीने के अंदर 100 लोकेशन और बढ़ा दी।
क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने कहा कि अब यह मुद्दा केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे केंद्रीय स्तर पर अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाने की जरूरत है। उनके अनुसार गाइडलाइन को हर स्थिति में अंतिम मानकर लागू नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसे एक मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में देखा जाना चाहिए।
क्रेडाई ने रेंज-बेस्ड गाइडलाइन लागू करने, री-ट्रांसफर पर स्टाम्प ड्यूटी समायोजन, कृषि भूमि पर अनावश्यक प्रावधानों के युक्तिकरण, कमर्शियल प्रॉपर्टी में फ्लोर-वाइज यथार्थवादी दरें तय करने और ग्रीन बेल्ट, नदी-नाले, जलाशय तथा प्रतिबंधित क्षेत्रों की भूमि के लिए अलग मूल्यांकन नीति की मांग की है। साथ ही लंबित एग्रीमेंट वाली संपत्तियों के लिए सीमित अवधि की एमनेस्टी स्कीम और कम से कम तीन साल की स्थिर गाइडलाइन नीति का सुझाव भी दिया गया है।
क्रेडाई का कहना है कि गाइडलाइन दरों को बाजार की वास्तविक स्थिति, भूमि उपयोग और उपयोगिता के आधार पर तय किया जाना चाहिए। संगठन ने जोर दिया कि राजस्व का स्थायी आधार केवल दरों में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि वैध लेन-देन (वॉल्यूम) में वृद्धि है। पारदर्शी और संतुलित नीति से ही निवेश, अफोर्डेबिलिटी और बाजार का भरोसा मजबूत हो सकता है।

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