भोपाली बटुआ पर BBC की स्पेशल स्टोरी, एक्सपोर्ट बढ़ने की उम्मीद

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 15 मार्च 2026
: BBC (British Broadcasting Corporation) ने भोपाली बटुआ पर एक स्पेशल स्टोरी की है। यह स्टोरी 14 मार्च को टेलीकास्ट की गई। जैसा कि हम जानते हैं कि BBC एक अंतरराष्ट्रीय समाचार संस्थान है और दुनिया भर के लोग विदेशी खबरों के लिए BBC को विश्वसनीय न्यूज सोर्स मानते हैं। दुनिया भर के लोगों में जब एक बार फिर भोपाली बटुआ की यादें ताजा होंगी तो स्वाभाविक एक ही भोपाली बटुआ की बिक्री बढ़ जाएगी। इसके लिए भोपाली बटुआ के कारीगरों को तैयार रहना चाहिए। 

Bhopali Batua कैसे बनाया जाता है

यह बहुत मुश्किल नहीं है लेकिन बहुत शानदार है। भोपाली बटुआ की अपनी एक अलग पहचान है। एक जिला एक उत्पाद के तहत ज़री, ज़रदोज़ी प्रोडक्ट भोपाल की पहचान है। भोपाली बटुआ इस पहचान का सिग्नेचर है। भोपाली बटुआ (Bhopali Batua) अपनी बारीक़ ज़री, ज़रदोज़ी के काम और खास बनावट के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। इसे बनाने की प्रक्रिया काफी धैर्य और कलाकारी वाली होती है।

यहाँ भोपाली बटुआ बनाने के मुख्य चरण दिए गए हैं:

1. Bhopali Batua Materials
कपड़ा: आमतौर पर मखमली (Velvet) या साटन (Satin) का उपयोग किया जाता है।
अस्तर (Lining): मज़बूती के लिए सूती या सिल्क का कपड़ा।
सजावट: ज़री के धागे, सितारे, मनके (Beads), और रेशम के धागे।
डोरी: रेशम की गूंथी हुई डोरी और सजावटी फुंदने (Tassels)।

How to make a 'Bhopali Batua': A step-by-step guide

कढ़ाई (Embroidery - ज़रदोज़ी):
सबसे पहले कपड़े को एक लकड़ी के फ्रेम (अड्डे) पर कस दिया जाता है। इसके बाद उस पर चॉक से बारीक डिज़ाइन उकेरी जाती है। भोपाली बटुए पर अक्सर फूल-पत्ती और पारंपरिक मुगलई पैटर्न बनाए जाते हैं। कुशल कारीगर सुई और धागे से इस पर 'ज़री' और 'सितारों' का काम करते हैं।

Bhopali Batua Cutting 

कढ़ाई पूरी होने के बाद, कपड़े को बटुए के पारंपरिक गोल या अंडाकार आकार में काटा जाता है। इसी नाप का अस्तर भी काटा जाता है।

सिलाई (Stitching):

अब कढ़ाई वाले कपड़े और अस्तर को उल्टा रखकर साथ में सिया जाता है, ताकि सिलाई अंदर की तरफ रहे। ऊपर का हिस्सा खुला छोड़ा जाता है जहाँ से डोरी डाली जाएगी।

डोरी और आईलेट्स (Eyelets):

बटुए के ऊपरी हिस्से में छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं (जिन्हें हाथ की सिलाई से पक्का किया जाता है)। इनमें रेशम की डोरी डाली जाती है। यह डोरी बटुए को बंद करने और खोलने के लिए 'खींचने' (Drawstring) का काम करती है।

अंतिम सजावट (Finishing):

डोरी के सिरों पर सुंदर भारी फुंदने या मोतियों की लटकन लगाई जाती है, जो भोपाली बटुए की असली पहचान है। 

BBC Special Story on Bhopali Batua Sparks Fresh Hopes for Export Growth

भोपाल में हाथ और मशीन दोनों से भोपाली बटुआ बनाए जाते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाथ से बनाया गया भोपाली बटुआ पसंद किया जाता है और हैंडमेड भोपाली बटुआ की डिमांड सबसे ज्यादा होती है। भोपाली बटुआ पर स्पेशल स्टोरी के लिए BBC का धन्यवाद।
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