भोपाल, 28 मार्च 2026: PNG मतलब पाइप्ड नेचुरल गैस का महत्व अब पता चल रहा है लेकिन इसके साथ यह भी पता चल रहा है कि, राजधानी भोपाल में PNG को घर-घर तक पहुंचने की जिम्मेदारी ठीक प्रकार से नहीं निभाई गई। भोपाल के बहुत सारे लोगों को तो यह पता ही नहीं है कि, शहर में पाइपलाइन के माध्यम से भी गैस का कनेक्शन मिलता है। जबकि इंदौर और ग्वालियर इस मामले में भोपाल से आगे चल रहे हैं।
जिनको कनेक्शन मिल गया उनके पाइप में भी गैस नहीं आती
राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के सभी जिलों में पिछले तीन सालों से पाइपलाइन बिछाने का काम किया जा रहा है। PNG कंपनियों की ओर से बताया जा रहा है कि, जिसके तहत अधिकांश क्षेत्रों में पाइपलाइन तो बिछ गई लेकिन लोगों के घर-घर कनेक्शन देने का काम अभी धीमा है और जहां पर उपभोक्ताओं को कनेक्शन मिल गए हैं वहां पर आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। इसका मुख्य कारण पाइपलाइन होने के बावजूद घर तक अंतिम कनेक्शन में देरी, लोगों में जानकारी की कमी और अधिक शुरुआती खर्च बताया जा रहा है।
पब्लिक तैयार है लेकिन कंपनी कनेक्शन ही नहीं दे रही
जानकारी के अनुसार पीएनजी कनेक्शन देने में इंदौर पहले तो ग्वालियर दूसरे स्थान पर है, जबकि भोपाल में यह काम काफी पिछड़ा हुआ है। इंदौर में 50 हजार लक्ष्य के बदले में एक लाख 23 हजार 804 लोगों ने घरेलू पीएनजी कनेक्शन लिए हैं, जो तय लक्ष्य से अधिक हैं। इसी तरह, ग्वालियर में भी तय लक्ष्य 44 हजार के बदले में 63 हजार 150 लोगों ने कनेक्शन लिए हैं। वहीं भोपाल में 5 लाख 50 हजार 222 का लक्ष्य रखा गया है, जिसके बदले में अब तक महज 40 हजार कनेक्शन ही दिए गए हैं।
कलेक्टर लापरवाह इसलिए व्यवस्था खराब
सरकार और कंपनियों ने बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे गैस पाइपलाइन और कनेक्शन) की योजना बनाकर उसे स्थापित तो कर दिया, लेकिन इसके बाद पता नहीं क्या हुआ। पाइपलाइन बिछाने के बाद भी लोगों को कनेक्शन नहीं दिए जा रहे हैं। जो लोग जबरदस्ती कनेक्शन ले रहे हैं उनको गैस नहीं दी जा रही। अजीब बात तो यह है कि LPG को लेकर पैनिक सिचुएशन बनने के बावजूद भोपाल का जिला प्रशासन PNG पर शिफ्ट होने पर तैयार नहीं है। PNG को लेकर फरवरी और मार्च के महीने में कोई मीटिंग नहीं हुई।

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