भोपाल नगर निगम में करोड़ों का घोटाला, 10 साल से चल रहा था, लोकायुक्त की छापामार कार्रवाई

Updesh Awasthee
भोपाल, 13 मार्च 2026
: भोपाल नगर निगम में आज बहुत बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। लोकायुक्त ने छापामार कार्रवाई करते हुए पिछले 10 साल के डॉक्यूमेंट और सर्वर डाटा जप्त किया है। इस केस में फिलहाल केवल एक अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है लेकिन बिल्कुल स्पष्ट है कि यह शुरुआत है, पिछले 10 सालों में जितने भी लोग पावरफुल पोजीशन में रहे हैं, वह सब इस घोटाले की जांच की जद में आएंगे।

Bhopal Municipal Corporation Scam Exposed: MP Lokayukta Raids Reveal Crores Misappropriated for a Decade

लोकायुक्त एसपी दुर्गेश राठौर के अनुसार, भोपाल नगर निगम में फर्जी भुगतान की शिकायत नवंबर 2025 में लोकायुक्त को मिली थी। प्रारंभिक जांच में तथ्य सही पाए जाने पर 9 मार्च को अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी की धाराओं में FIR दर्ज की गई है। इसके बाद कोर्ट से सर्च वारंट लेकर छापेमारी की गई। श्री राठौर ने बताया कि, शिकायत में आरोप है कि सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी बिल तैयार कराए गए और बिना काम कराए ही परिचितों व रिश्तेदारों की फर्मों के नाम पर करोड़ों रुपए का भुगतान कराया गया।

तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

लोकायुक्त टीम ने सुबह करीब 10:30 बजे निगम के लेखा शाखा, कंप्यूटर शाखा, डाटा सेंटर, लिंक रोड-2 स्थित मुख्य कार्यालय और फतेहगढ़ स्थित पुराने कार्यालय में एक साथ छापेमारी की। लोकायुक्त का कहना है कि डिजिटल डाटा और दस्तावेजों की जांच के बाद मामले में अन्य कर्मचारियों और फर्मों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

SAP सॉफ्टवेयर का डाटा जब्त किया

प्रारंभिक जांच में मोटर वर्क शाखा, जल कार्य विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़े कुछ कार्यों में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। जांच टीम ने भुगतान से जुड़े SAP सॉफ्टवेयर का डिजिटल डाटा भी कब्जे में लिया है। अब इसकी जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि किन-किन कार्यों के नाम पर भुगतान किया गया और वास्तव में काम हुआ भी था या नहीं।

अपर आयुक्त बोले- मैं अकेला जिम्मेदार नहीं हूं

अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर का कहना है कि लेखा शाखा में बिल सीधे तैयार या पास नहीं किए जाते। बिल संबंधित विभागों से सत्यापन के बाद आते हैं और फंड की उपलब्धता के अनुसार नगर निगम आयुक्त से चर्चा के बाद भुगतान किया जाता है। कुल मिलाकर अपर आयुक्त का कहना है कि, मामला भले ही केवल उनके खिलाफ दर्ज हुआ हो लेकिन इस पूरे मामले में वह अकेले शामिल नहीं है और अन्य के अलावा नगर निगम की आयुक्त भी शामिल है। 

अब देखना यह है कि लोकायुक्त की टीम इस मामले की इन्वेस्टीगेशन में कितना ईमानदार रहती है।
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