भोपाल में जल संकट, पूरा जिला जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित, नए निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंध

Updesh Awasthee
Bhopal Declared Water-Scarce Area
भोपाल, 13 मार्च 2026
: भोपाल जिले में भू-जल स्तर में लगातार हो रही गिरावट को देखते हुए कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री कौशलेंद्र विक्रम सिंह द्वारा मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के अंतर्गत आदेश जारी करते हुए संपूर्ण भोपाल जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है।

Bhopal Declared Water-Scarce Area, Ban Imposed on New Private Borewells

कार्यपालन यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा अवगत कराया है कि जिले में कृषि एवं व्यावसायिक कार्यों के लिए भू-जल स्त्रोतों का अत्यधिक दोहन होने से पेयजल स्त्रोतों तथा नलकूपों का जल स्तर तेजी से गिर रहा है। प्रशासन ने आशंका व्यक्त की है कि यदि वर्तमान स्थिति बनी रही तो आगामी ग्रीष्मकाल में जिले में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है।

इसी को दृष्टिगत रखते हुए अधिनियम की धारा 6 (1) के अंतर्गत संपूर्ण भोपाल जिले में अशासकीय एवं निजी नलकूपों के नए खनन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया गया है।

जारी आदेश के अनुसार जिले की राजस्व सीमाओं में बिना संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अनुमति के कोई भी बोरिंग मशीन प्रवेश नहीं कर सकेगी तथा बिना अनुमति के नए नलकूप का खनन नहीं किया जा सकेगा। सार्वजनिक सड़कों से गुजरने वाली मशीनों को इस प्रावधान से छूट रहेगी।

राजस्व एवं पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि यदि कोई बोरिंग मशीन अवैध रूप से जिले में प्रवेश करती है अथवा प्रतिबंधित स्थानों पर नलकूप खनन का प्रयास करती है तो उसे तत्काल जप्त कर संबंधित थाना क्षेत्र में एफआईआर दर्ज की जाए।

कलेक्टर द्वारा सभी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को उनके क्षेत्र में अपरिहार्य परिस्थितियों में उचित जांच के बाद नलकूप खनन की अनुमति देने हेतु अधिकृत किया गया है।

आदेश का उल्लंघन करने पर मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के प्रावधानों के अंतर्गत दो हजार रुपये तक का जुर्माना तथा दो वर्ष तक के कारावास अथवा दोनों से दंडित किए जाने का प्रावधान है।

हालांकि यह आदेश शासकीय योजनाओं के अंतर्गत किए जाने वाले नलकूप खनन पर लागू नहीं होगा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा योजनाओं के तहत आवश्यकतानुसार नलकूप खनन का कार्य किया जा सकेगा।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवश्यकता पड़ने पर नवीन निजी नलकूपों एवं अन्य विद्यमान निजी जल स्त्रोतों को सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था के लिए अधिनियम की धारा-4 के अंतर्गत अधिग्रहित किया जा सकेगा।
समाचार क्रमांक/211/031/विजय/अरुण शर्मा

कार्यालय कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट, जिला भोपाल म.प्र.

क्रमांक 545 / सूखा राहत / पेयजल / 2026 भोपाल, दिनांक 13.03.2026
// आदेश // 
कार्यपालन यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जिला भोपाल द्वारा अवगत कराया गया है कि भोपाल जिले में कृषि एवं व्यावसायिक कार्य हेतु भू-जल स्रोतों का अतिदोहन होने से पेयजल स्रोतों/नलकूपों का जल स्तर तेजी से गिर रहा है।
 गिरते भू-जल स्तर के कारण संपूर्ण जिले में आगामी ग्रीष्मकाल में पेयजल संकट की संभावना को दृष्टिगत रखते हुए संपूर्ण भोपाल जिले में मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के तहत पेयजल से भिन्न अन्य प्रयोजन के लिए नवीन निजी नलकूपों के खनन पर प्रतिबंध लगाया जाना आवश्यक है।

 मेरे द्वारा पेयजल संकट की स्थिति का परीक्षण किये जाने पर यह परिलक्षित हुआ है कि यदि जिले में निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया तो ग्रीष्मकाल में जिले में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न होने की संभावना है।

मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 तथा संशोधन अधिनियम 2002 (अधिनियम) में निहित प्रावधानों के तहत मैं कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट जिला भोपाल अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत कि भोपाल जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित करता हूं तथा जिले में निरन्तर भू-जल की गिरावट को दृष्टिगत रखते हुए अधिनियम की धारा-6(1) के अन्तर्गत संपूर्ण जिले में अशासकीय व निजी नलकूप खनन करने पर प्रभावी दिनांक से तत्काल प्रतिबंध लगाया जाता है।

सम्पूर्ण जिला भोपाल की राजस्व सीमाओं में नलकूप/बोरिंग मशीन संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अनुमति के बिना न तो प्रवेश करेगी (सार्वजनिक सड़कों से गुजरने वाली मशीनों को छोड़कर) और न ही बिना अनुमति के कोई नया नलकूप खनन करेगी।

संबंधित राजस्व एवं पुलिस अधिकारियों को ऐसी बोरिंग मशीन जो अवैध रूप से जिले में प्रतिबंधित स्थानों पर प्रवेश करेगी अथवा नलकूप खनन/बोरिंग का प्रयास करेगी उक्त मशीनों को जब्त कर संबंधित पुलिस थाना क्षेत्र में एफ.आई.आर. दर्ज कराने का अधिकार होगा।

समस्त अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को उनके क्षेत्रान्तर्गत इस निमित्त अपरिहार्य प्रकरणों के लिए व अन्य प्रयोजनों हेतु उचित जांच के पश्चात अनुज्ञा देने हेतु प्राधिकृत किया जाता है।

इस अधिसूचना का उल्लंघन करने पर अधिनियम की धारा-3 या धारा-4 के उपबंध का उल्लंघन करने पर दो हजार रूपये के जुर्माने तथा दो वर्ष तक के कारावास या दोनों से दण्डित करने का प्रावधान है।

शासकीय योजनाओं के अंतर्गत किये जाने वाले नलकूप उत्खनन पर यह आदेश लागू नहीं होगा तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा कार्य योजनांतर्गत नलकूप खनन का कार्य कराया जा सकेगा, इस हेतु उपरोक्तानुसार अनुज्ञा प्राप्त किया जाना आवश्यक नहीं होगा।

नवीन खनित निजी नलकूप एवं अन्य विद्यमान निजी जल स्रोतों का आवश्यकता होने पर सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था हेतु अधिनियम की धारा-4 के अंतर्गत अधिग्रहण किया जा सकेगा।
यह आदेश तत्काल प्रभावशील रहेगा।
(कौशलेन्द्र विक्रम सिंह) कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट जिला भोपाल
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