AIIMS BHOPAL डॉक्टर यूनुस द्वारा प्रताड़ित डॉ रश्मि सुसाइड केस, मानवाधिकार आयोग ने रिपोर्ट मांगी

Updesh Awasthee
भोपाल, 5 मार्च 2026
: गरीबों के लिए भगवान का दूसरा रूप डॉक्टर रश्मि वर्मा सुसाइड केस में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा AIIMS BHOPAL, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और भोपाल पुलिस को नोटिस जारी करके जांच रिपोर्ट मांगी है। यहां उल्लेख करना जरूरी है कि, ट्रॉमा एंड इमरजेंसी विभाग के तत्कालीन HOD डॉ. मोहम्मद यूनुस द्वारा लगातार प्रताड़ना और सार्वजनिक अपमान से परेशान होकर डॉ रश्मि ने बेहोशी की दवाइयों का ओवरडोज लेकर जान दे दी थी। 

आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने इस मामले को गंभीर मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग की ओर से भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव, एम्स भोपाल के निदेशक और भोपाल पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी किया गया है। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 15 दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। रिपोर्ट में संस्थान की आंतरिक शिकायत समिति (POSH कमेटी) द्वारा की गई कार्यवाही का पूरा विवरण, दर्ज एफआईआर की प्रति और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अनिवार्य रूप से शामिल की जाए।

POSH कमेटी की भूमिका पर निगाह, आरोप होंगे तय

आयोग ने विशेष रूप से संस्थान की POSH (Prevention of Sexual Harassment) कमेटी की कार्यवाही का ब्यौरा मांगा है। यह कमेटी कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न और संबंधित शिकायतों की जांच के लिए गठित की जाती है। यदि शिकायत दर्ज होने के बावजूद उचित जांच या कार्रवाई नहीं हुई, तो यह नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आएगा। ऐसे में जिम्मेदारी केवल आरोपित व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि संस्थागत तंत्र भी जवाबदेह होगा।

पुलिस जांच भी डाउटफुल

भोपाल पुलिस से भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। यह देखा जाएगा कि आत्महत्या के लिए उकसाने, मानसिक प्रताड़ना या अन्य संबंधित धाराओं के तहत क्या कदम उठाए गए। जांच का दायरा अब व्यापक हो चुका है। आयोग यह स्पष्ट करना चाहता है कि कहीं प्रारंभिक स्तर पर मामले को हल्के में तो नहीं लिया गया।

15 दिन बाद सामने आएगी सच्चाई

अब सभी की नजरें आयोग को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं। 15 दिनों के भीतर आने वाली यह रिपोर्ट तय करेगी कि आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई किस दिशा में जाएगी। आयोग की ओर से जारी संदेश में कहा गया है कि पीड़ित परिवार के साथ संवेदनाएं हैं और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। परिवार की ओर से भी निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग की गई है। उनका कहना है कि यदि समय पर शिकायतों पर ध्यान दिया जाता, तो शायद यह त्रासदी टल सकती थी।

डॉ रश्मि वर्मा कौन थी 

वर्तमान परिवेश में, जब डॉक्टर एक बिजनेसमैन की तरह अपनी पढ़ाई के खर्चे को इन्वेस्टमेंट और अपने नोबल प्रोफेशन को रिटर्न हासिल करने का जरिया बताते हैं, डॉक्टर रश्मि गरीबों के लिए भगवान का दूसरा नाम थी। एक तो डॉक्टर रश्मि खुद काफी योग्य और प्रतिभावान डॉक्टर थी। रिसर्च के लिए उन्हें कहीं पुरस्कार भी मिल चुके थे। देश में उनका नाम और सम्मान था। वहीं दूसरी ओर वह अपनी सैलरी से गरीबों के लिए दवाइयां खरीद लेती थी, और इसके बदले में सोशल मीडिया पर कोई अपडेट भी नहीं करती थी। 

मानो किसी ने उनकी dignity को चूर-चूर कर दिया हो

24 दिन तक मौत से संघर्ष के बाद 5 जनवरी 2026 को डॉक्टर रश्मि ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। 12 दिसंबर 2025 को, डॉ रश्मि वर्मा ने ड्यूटी के बाद घर जाकर एक हाई डोज इंजेक्शन खुद को लगाया। शाम करीब 5 बजे डॉ. रश्मि को "सीरियस मिसकंडक्ट" टाइटल वाला नोटिस थमाया गया। ये नोटिस पढ़ते ही उनका मन टूट गया, मानो किसी ने उनकी dignity को चूर-चूर कर दिया हो। नोटिस और उसके attachments सामने आने के बाद बहस छिड़ गई है। क्या ये सिर्फ administrative action था, या इसके पीछे departmental rivalry का काला खेल खेला जा रहा था? डॉ. रश्मि ने अपने written reply में साफ कहा कि ये language painful, humiliating और mentally shattering थी। उन्होंने जोर देकर बताया कि उन्होंने कभी intentionally rules तोड़े नहीं, लेकिन इस नोटिस ने उन्हें deep stress में धकेल दिया। एक डॉक्टर जो patient की जान बचाने के लिए रात-दिन मेहनत करती हैं, उसी को institution से ऐसा झटका, ये fairness कहां है? 

HOT के द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था

डॉ. रश्मि ने 25 से 27 सितंबर तक की academic leave को लेकर भी अपनी side रखी थी। उन्होंने clarify किया कि 25 अगस्त को ही faculty group में conference के लिए inform कर दिया था, जैसा departmental guidelines में है। उनका दावा है कि HOD ने ये message देखा था, और इसके proof में faculty group के screenshots attach किए। फिर भी, नोटिस आया। ये देखकर लगता है कि छोटी-छोटी बातों को तूल देकर प्रताड़ित किया जा रहा था।

डॉ. मोहम्मद यूनुस की तानाशाही का सबूत

इसी बीच विभाग से एक और notice जारी हुआ, जिसमें डॉ. भूपेश्वरी पटेल और डॉ. बाबूलाल को छोड़कर बाकी सभी faculty को HOD डॉ. मोहम्मद यूनुस से मिलने के लिए prior appointment लेना compulsory कर दिया गया। Appointment के लिए DEO नितेश कुमार पांडेय से contact करना होगा, उनका mobile number और email ID भी notice में दिया गया। यहां सवाल तो बनता है की फैकल्टी को अपने ही विभाग के अध्यक्ष से मिलने के लिए अपॉइंटमेंट क्यों लेना पड़ेगा। दो डॉक्टरों ने ऐसी कौन सी मेरिट हासिल कर ली है जो उनको अपॉइंटमेंट नहीं लेना पड़ेगा। दरअसल, मोहम्मद यूनुस, फैकल्टी को प्रताड़ित करना चाहते हैं और यह तभी हो सकता है जब फैकल्टी की समस्याओं की सुनवाई बंद कर दी जाए।

यदि फैकल्टी को अपॉइंटमेंट लेकर ही मिलना है तो फिर हेड ऑफ द डिपार्टमेंट की क्या जरूरत है, डीन काफी है।


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